विधि-विधान से पूजी गईं मां कूष्मांडा

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भदोही, 10 अक्टूबर (वेब वार्ता)। शारदीय नवरात्र के चौथे दिन रविवार को देवी मंडप और मंदिरों में दुर्गा के चौथे स्वरूप कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान अर्गलास्तोत्र व देवी तंत्रोक्ति से वातावरण गुंजायमान रहा। भोर की आरती के बाद से मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। वहीं अधिकांश स्थानों में आयोजित भजन- संध्या में भक्तिगीतों के माध्यम से श्रद्धालु भक्तिसागर में गोता लगा रहे थे।

माता रानी की आस्था में लीन भक्त नौ दिनों तक अनुष्ठान में जुटे हुए हैं। सुरियावां क्षेत्र के निदिउरा गांव में स्थित मां विध्यवासिनी धाम में समाजसेवी भोलानाथ शुक्ला की ओर से शतचंडी महायज्ञ का आयोजन कियास गया है। भोर की आरती के बाद से देवी भक्तों की लगी लंबी कतार दोपहर बाद भी टूटने का नाम नहीं ले रही है। चौथे दिन त्रिविध तापयुक्त संसार जिनके उदर में स्थित है, वह भगवती कूष्मांडा के नाम से विख्यात हुईं। स्थानीय घोपइला स्थित मातारानी के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए भोर में ही भक्तों की भीड़ लगी रही। गोपीगंज नगर स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर में आदि शक्ति के दर्शन- पूजन करने के लिए भोर से ही भक्तों का तांता लगा रहा। इसके अलावा काली देवी, बंबा देवी, हनुमानगढ़ी मंदिर, बड़े शिव मंदिर आदि स्थानों पर भक्तों की भीड़ लगी रही। दुर्गा मंदिर में नौ दिनों तक लगातार भजन- संध्या का आयोजन किया गया है। भक्ति गीतों से पूरा नगर देवीमय हो गया है। यहां पर देररात तक प्रवचन का भी आयोजन किया गया। इसी तरह महाराजगंज, सीतामढ़ी, ऊंज, बाबूसराय, औराई, दुर्गागंज,चौरी आदि क्षेत्रों में देवी पंडालों में भक्तों की भीड़ लगी रही। दोपहर बाद से ही शुरू हुई भक्तों की भीड़ देर रात तक मातारानी का दर्शन करते रहे।

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