मेवात में बाजरा की सरकारी खरीद न होने से किसानों को करीब 10 हजार रूपये प्रति एकड नुकसान हो रहा है.

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एमएसपी रेट 2250 और मंडियों में बिक रहा है 1200 रूपये क्विंटल

मेवात, 11 अक्टूबर (वेब वार्ता)। नूंह जिला में बाजरा की सरकारी खरीद न होने से किसानों को करीब 10 हजार रूपये प्रति एकड का नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार का एमएसपी रेट 2250 रूपये प्रति क्विंटल है जबकि अनाज मंडियों में बाजरा 1000 से 1200 रूपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। जिससे जिले के किसानों को करीब दस हजार प्रति एकड़ का नुकसान उठाना पड रहा है।

आपको बता दें कि पिछले बार सरकार द्वरा बाजरा की सरकारी खरीद करने और इस बार बाजरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2250 रूपये प्रति क्विंटल किए जाने से किसानों ने सरसों की बजाए बाजरा की ज्यादा बिजाई की थी। इस बार नूंह जिला में करीब 21500 हेक्टीयर यानि 53750 एकड बाजरा की बिजाई की है। हरियाणा सरकार ने इस बार 25 सितंबर, एक अक्तुबर और फिर 11 अक्तुबर से बाजरा की खरीद 2250 रूपये प्रति क्विंटल खरीदने के आदेष दिए थे लेकिन सरकार ने अचानक अपना फैंसला बदल लिया और किसानों का बाजरा न खरीदकर किसानों को मात्र 600 रूपये प्रति क्विंटल के पैसे देने का वादा किया है। ये पैसे भी उन किसानों को मिलेगें जिन्होने मेरी फसल, मेरा ब्यूरों में दर्ज करा रखा होगा। जिन्होने सरकारी पोर्टल पर अपना बाजरा दर्ज नहीं कराया होगा उनको सरकार कुछ नहीं देगीं।

किसान हाजी मूसा बादली, असगर हुसैन गुलालता, सलीम खान, मनसूर उर्फ काला ने बताया कि सरकार ने किसानों का बाजरा 2250 रूपये प्रति क्विंटन खरीदने के तीन बार आदेष दिए थे लेकिन तीनों बार खरीद तो नहीं हुई लेकिन आदेष वापिस ले लिए गए हैं। उनका कहना है किअब सरकार केवल 600 रूपये प्रति क्विंटल राषी देने की बात कर रही है। जिससे किसानों की आमदनी दुगनी तो दूर घाटा भी पूरा नहीं हो रहा है। किसानांे का कहना है कि अनाजमंडी में बाजरा केवल एक हजार से 1200 प्रति क्विंटल बिक रहा है। जिससे किसानों को करीब एक हजार रूपय प्रिति क्विंटल का नुकसान हो रहा है। अगर सरकार 600 रूपये देती है तब भी किसानांे को करीब पांच सौ से 700 रूपये प्रति क्विंटल के हिसाब से नुकसान होगा। किसानों ने उनके बाजरे को सरकारी एमएसपी दर पर खरीदने की मांग की है। किसानों ने बताया कि नूंह जिला में 8 से 10 क्विंटल प्रति एकड की दर से बाजरा पैदा होता है। अगर किसानों को एक हजार  का ही नुकसान होता है तो किसानों को प्रति एकड करीब 8 से 10 हजार रूपये का नुकसान उठाना पडेगा।

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