प्रदूषण के खिलाफ एक्शन में केजरीवाल सरकार

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विंटर एक्शन प्लान बनाने को लेकर पर्यावरण मंत्री ने की समीक्षा बैठक

नई दिल्ली, 14 सितंबर (वेब वार्ता)। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने प्रदूषण के खिलाफ विंटर एक्शन प्लान तैयार करने को आज सभी संबंधित विभागों के साथ समीक्षा बैठक की। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि सभी विभागों को 21 सितंबर तक अपनी-अपनी कार्य योजना बनाकर पर्यावरण विभाग को सौंपने का निर्देश दिया गया है। सभी विभागों को निर्धारित 10 फोकस बिंदुओं पर अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसके अनुसार हम दिल्ली सरकार का विंटर एक्शन प्लान तैयार करेंगे। साथ ही, जमीनी स्तर पर काम करने वाले इंजीनियर, एई और ठेकेदारों को प्रशिक्षण देकर उन्हें सरकार के जारी दिशा-निर्देशों का पालन कराने के लिए संवेदनशील बनाया जाएगा। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जल्द ही केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से मिलेंगे। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री को पराली पर बायो डि-कंपोजर के प्रयोग को लेकर आई थर्ड पार्टी ऑडिट रिपोर्ट सौंपेंगे और उनसे अन्य राज्यों में लागू कराने की मांग करेंगे।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने विंटर एक्शन प्लान को लेकर सभी संबंधित विभागों के साथ संयुक्त बैठक की। इस बैठक में सभी विभागों को विंटर एक्शन प्लान तैयार करने को लेकर जिम्मेदारियां सौंपी गई। प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से संयुक्त बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए पर्यावरण मंत्री ने कहा कि प्रदूषण के खिलाफ दिल्ली के अंदर विंटर एक्शन प्लान बनाने की प्रक्रिया दिल्ली सरकार ने शुरू की है। पिछले दिनों हमने पर्यावरण विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में मुख्य तौर पर 10 सूत्रीय फोकस बिंदु चिंहित किए थे। उन 10 क्षेत्रों में फोकस तरीके से काम करने के लिए आज हमने दिल्ली के अंदर जितनी प्रमुख एजेंसियां हैं, उनकी संयुक्त बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में तीनों एमसीडी, एनडीएमसी, कैंटोनमेंट बोर्ड, डीडीए, सीपीडब्ल्यूडी, पीडब्ल्यूडी के साथ-साथ ट्रैफिक पुलिस, ट्रांसपोर्ट विभाग, पर्यावरण विभाग, विकास विभाग के सभी उच्च अधिकारी मौजूद रहे। बैठक का मकसद दिल्ली के अंदर प्रदूषण के खिलाफ इस जंग में संयुक्त कार्य योजना का निर्माण करना है। आज की बैठक में हमने अलग-अलग विभागों के लिए विशिष्ट कार्य दिए हैं। जिस पर सभी विभागों को 21 सितंबर तक अपना एक्शन प्लान बना कर पर्यावरण विभाग को सौंपना है। जिसके अनुरूप हम सरकार का विंटर एक्शन प्लान तैयार करेंगे।

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि दिल्ली के अंदर पराली की समस्या से निपटने के लिए विकास विभाग को एक्शन प्लान बनाने के लिए जिम्मेदारी दी गई है। विकास विभाग के अंतर्गत कृषि विभाग आता है। विभाग से पूछा गया है कि दिल्ली के अंदर पैदा होने वाली पराली से निपटने के लिए इस साल टाइम लाइन और एक्शन प्लान क्या होगा? वहीं, धूल प्रदूषण रोकने के लिए तीनों एमसीडी, कंटोनमेंट बोर्ड, एनडीएमसी, डीडीए पीडब्ल्यूडी, सीपीडब्ल्यूडी, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को जिम्मेदारी गई है। साथ ही, सभी निर्माण एजेंसियों को खासतौर से चार बिंदुओं पर अपना एक्शन प्लान बनाने के लिए लक्ष्य दिया गया। पहला, डस्ट सबमिशन केमिकल का प्रिक्योरमेंट करने का एक्शन प्लान। दूसरा, मैकेनिकल डोर स्वीपिंग का एक्शन प्लान। तीसरा, जो यह मशीनें धूल को खींचती हैं, उसके डिस्पोजल का एक्शन प्लान। चौथा, हमने इस बार सभी विभागों को विशेष कार्य दिया है कि हर विभाग जमीन पर काम करने वाले अपने जूनियर इंजीनियर, एई और ठेकेदारों संवेदनशील बनाने और उनके माइंड सेट को बदलने करने का काम करें। इसके लिए सभी विभागों के अंदर विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। क्योंकि पिछली बार जब मैं एंटी डस्ट कैंपेन के दौरान दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों में गया और लोगों से बात की, तो मुझे ऐसा लगा कि लोगों की संवेदनशीलता कम है। अगर कोई कर रहा है तो वह इसलिए कर रहा है, क्योंकि उनको दिशा निर्देश दिया हुआ है। इसलिए इस बार विशेष प्रावधान करते हुए यह कार्य दिया है। सभी विभाग जमीन पर काम करने वाले अपने इंजीनियर, एई और ठेकेदारों के साथ बैठक कर उन्हें प्रशिक्षित करेंगे कि यह करना क्यों जरूरी है? और दिशा-निर्देशों का अनुपालन करना क्यों जरूरी है? ताकि प्रदूषण को रोका जा सके।

पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने आगे कहा कि हमारा तीसरा फोकस बिंदु कूड़ा जलने का है। इसके लिए हमने एक्शन प्लान बनाने के लिए खासतौर से एमसीडी को जिम्मेदारी दी गई है। इसमें एक सुझाव भी आया है कि कई जगहों पर लोग कूड़ा घर के अलावा भी कूड़ा फेंक देते हैं और उस दौरान वहां पर आग लगती है। हमने एमसीडी से एक एक्शन प्लान बनाने के लिए कहा है कि दूसरे जगहों पर फेंके गए कूड़े को आग लगने से पहले ही एकत्र कर कूड़ा घर पहुंचा दिया जाए। जिससे कि कूड़े में लगने वाली आग की घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही, आरडब्ल्यूए और अन्य एजेंसियों के साथ बात की जाए। एक अन्य समस्या सामने आई है कि रात की ड्यूटी करने वाले गार्ड आदि ठंड से बचने के लिए छोटे-छोटे कूड़ा जलाते हैं। इसका एक वैकल्पिक प्लान बनाने को कहा गया कि कैसे उनको ठंड से बचाया जा सकता है। वाहन प्रदूषण को कम करने के लिए परिवहन विभाग को जिम्मेदारी दी गई है। विभाग से कहा गया है कि दिल्ली सरकार की इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को और प्रचारित किया जाए। उसका रिस्पॉन्स काफी अच्छा है, लेकिन उसको और गति दिया जाए। परिवहन विभाग को प्रदूषण सर्टिफिकेट की निगरानी को गति देने के लिए एक्शन प्लान बनाने को कहा गया है। ट्रैफिक पुलिस को वाहनों प्रदूषण को कम करने के लिए एक्शन प्लान बनाने का लक्ष्य दिया गया है। बहुत जगहों पर जब जाम की स्थिति पैदा होती है, तो वहां प्रदूषण स्तर बढ़ जाता है। जिन जगहों पर वाहनों की भीड़ ज्यादा हो रही है, उसके समाधान के लिए एक्शन प्लान बनाने का लक्ष्य दिया गया है। वहीं, जहां-जहां रेड लाइट खराब है या रेड लाइट बढ़ाने की जरूरत है, उनको सही करने को कहा गया है।

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि सड़कों पर जाम लगने के दो प्रमुख कारण होते हैं। एक रास्ते में ट्रक खराब हो जाती है और वह काफी समय तक पड़ी रहती है और वहां पर जाम लग जाता है। या फिर कहीं पर निजी गाड़ियां खराब हो जाती हैं। वह गाड़ियां सड़क पर पड़ी रहती हैं और जाम लग जाता है। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस को कुछ विशेष प्रबंधन करने जिम्मेदारी दी गई है। जिससे कि इस तरह की घटना होने पर उन गाड़ियों को तत्काल हटाया जा सके। साथ ही, परिवहन विभाग को जिम्मेदारी दी गई है कि डीटीसी की या क्लस्टर की जो बसें हैं, अगर वो बसें सड़क पर खराब हुई, उसे ठीक करने के लिए सबसे करीबी डिपो से मकैनिक भेजा जाए। अभी तक यह सिस्टम रहा है कि खराब बस को ठीक करने के लिए संबंधित डिपो से मैकेनिक आता है। जैसे- अगर सिविल लाइन डिपो की बस छतरपुर पहुंच में खराब हो गई, तो उसको ठीक करने के लिए सिविल लाइन से मैकेनिक जाएगा, तब उसे ठीक किया जाए। ट्रांसपोर्ट विभाग को इस समस्या से निपटने के लिए एक रचनात्मक कार्य योजना बनाने के लिए कहा गया है कि ऐसा सिस्टम बनाया जाए कि जहां बस खराब हुई है, उसके सबसे करीबी डिपो से मैकेनिक जाकर बस ठीक कर सके। दिल्ली के अंदर जो हॉटस्पॉट हैं, एमसीडी उनकी नोडल एजेंसी है। हॉटस्पॉट की निगरानी की जिम्मेदारी एमसीडी को दी गई है।

पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि पड़ोसी राज्यों से संवाद की जिम्मेदारी पर्यावरण विभाग को दी गई है। वार्ड रूम और ग्रीन एप पर डीपीसीसी और पर्यावरण विभाग काम करेंगे। डीपीसीसी खासतौर से इस काम करेगी कि इसको कैसे और बेहतर कर सकते हैं। केंद्र सरकार से सामंजस्य स्थापित करने का काम पर्यावरण विभाग करेगा। सभी विभागों को 21 सितंबर तक विंटर एक्शन प्लान बनाने लक्ष्य दिया गया है। पर्यावरण विभाग की तरफ से हम सभी विभागों को एक फॉर्मेट भेज रहे हैं, जिसमें वे अपना एक्शन प्लान बनाकर सौंपेंगे। साथ ही, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जल्द ही केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से मिलेंगे और उनसे भी हम चर्चा करेंगे। आज हमने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री को चिट्ठी भेजकर मिलने का समय मांगा है। हमें उम्मीद है कि जल्द ही समय मिलेगा। मुख्यमंत्री और मैं, हम दोनों लोग पर्यावरण मंत्री से मिलेंगे और केंद्र सरकार से भी हम विस्तार से चर्चा करेंगे। पिछले साल हमने दिल्ली में जो बायो डि-कंपोजर का प्रयोग किया था, उसका थर्ड पार्टी ऑडिट हुआ है उसकी रिपोर्ट केंद्रीय पर्यावरण मंत्री को सौंपेंगे। जिससे कि दिल्ली को जो बाहर से पराली की समस्या से जूझना पड़ता है, उसमें हस्तक्षेप करके और उसको समय रहते लागू किया जा सके। आज मुख्य तौर पर एक्शन प्लान के लिए संयुक्त बैठक में हमने अलग-अलग विभाग के लक्ष्य को निर्धारित किया है। 21 सितंबर तक रिपोर्ट आने के बाद हम सरकार का विंटर एक्शन प्लान दिल्ली की जनता के सामने रखेंगे।

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