क्या सीएम केजरीवाल का यमुना किनारे गणेश आरती करना कोविड प्रॉटोकोल का उल्लंघन नहीं : कांग्रेस

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नई दिल्ली, 10 सितंबर (वेब वार्ता)। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा गणेश चतुर्थी के अवसर पर यमुना किनारे भव्य गणेश पूजन में हिस्सा लेने की घोषणा पर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के पूर्व विधायक एवं मुख्यमंत्री के पूर्व संससदीय सचिव अनिल भारद्वाज ने निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में अनिल भारद्वाज ने कहा कि त्यौहार के सीजन के आगमन गणेश चतुर्थी पर दिल्ली डिसास्टर मेनेजमेंट अथारिटी, दिल्ली सरकार ने कोविड-19 की तीसरी लहर की आशंका के तहत पंडाल, टेंट व सावर्जनिक स्थलों पर गणेश चतुर्थी पर पूजा की मनाही होने के बावजूद मुख्यमंत्री केजरीवाल अपने मंत्रियों के साथ सरकारी खर्चे पर आज सिग्नेचर ब्रिज नजदीक सूरघाट, यमुना नदी पर गणेश पूजन व आरती का गोवा के टीवी चैनल पर सीधा प्रसारण करके धर्म के नाम पर आडंबर कर रहे है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल यदि धर्म के प्रति आस्था रखते तो पिछले सात वर्षों में गणेश चतुर्थी पर पूजा अर्चना क्यों नही की। केजरीवाल यह आडंबर केवल गोवा के चुनावों पर केन्द्रित करके कर रहे है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी सभी धर्मों में आस्था रखती है और सभी धार्मिक आयोजनों का सम्मान करती है। अनिल भारद्वाज ने दिल्ली कांग्रेस की ओर से सभी दिल्लीवासियों को गणेश चतुर्थी शुभकामनाऐं दी। संवाददाता सम्मेलन में परवेज आलम और राम निवास शर्मा भी मौजूद थे।

संवाददाताओं को सम्बोधित करते हुए अनिल भारद्वाज ने कहा कि 10 दिनों बाद दिल्ली लौटे अरविन्द केजरीवाल की दिल्ली सरकार दिल्ली के उन सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं, जो पिछले कई वर्षो से सार्वजनिक गणेश पूजा का आयोजन कर रहे थे, उन पर रोक लगा रही है परंतु स्वयं चुनावों को अवसर बनाकर दिल्ली में बड़े स्तर पर दिल्ली के करदाताओं के पैसे से धार्मिक आयोजन करके डीडीएम के आदेश की धज्जियां उड़ा रहे है। उन्होंने कहा कि कोविड काल में गणेश चतुर्थी आयोजन से पूर्व भी केजरीवाल अक्षरधाम मंदिर में 6 करोड़ के सरकारी खर्चे पर दिवाली पूजन का आयोजन किया था। श्री भारद्वाज ने कहा कि जनहित व सार्वजनिक हित के लिए अरविन्द केजरीवाल दिल्लीवासियों से घरों में पूजा अर्चना करने की अपील कर रहे है। वे खुद क्यों नही अपने सरकारी बंगले में गणेश चतुर्थी की पूजा अर्चना करते? श्री भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को सरकारी खर्चे पर धार्मिक आयोजन करने पर आपति है। हमें धर्म के नाम पर आडंबर और राजनैतिक लाभ उठाने के लिए धार्मिक आयोजन पर आपति है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी परहित को सबसे बड़ा धर्म मानती है, इसलिए धार्मिक आयोजन समाज कल्याण, लोक कल्याण तथा जन कल्याण के लिए होने चाहिए।

श्री भारद्वाज ने कहा कि कोविड-19 महामारी के मामले फिर बढ़ रहे है और नेशनल डिसास्टर मेनेजमेंट अथॉरिटी व विशेषज्ञ एजेंसियों की चेतावनी के अनुसार सितम्बर/अक्टूबर में कोविड की तीसरी लहर आ सकती है जिसका अंदेशा कल कोविड के 34973 मामले सामने आए और 260 लोगों की मृत्यु हुई। उन्होंने कहा कि दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल की असंवेदनशील और लापरवाही का परिणाम कोविड की दूसरी लहर में अप्रैल-मई में दिल्ली में बहुत दुख झेला था और हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। उन्होंने कहा कि दूसरी लहर के दौरान दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन स्टोरेज, टैंकर सुविधा, बफर स्टॉक की क्षमता व स्वास्थ्य व्यवस्था ध्वस्त हो गई थी तथा सरकार निष्क्रिय साबित हुई। केजरीवाल ने अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए 976 एमटी ऑक्सीजन की मांग करके दिल्लीवासियों का ध्यान भटकाने का काम किया। उन्होंने कहा कि कोविड प्रोटोकॉल न मानने के लिए जुर्माने से वसूले गए 135 करोड़ का प्रयोग तीसरी लहर की रोकथाम की व्यवस्थाओं के लिए कर सकते है। श्री भारद्वाज ने कहा कि सरकारी व्यवस्था की दुहाई देने वाले मुख्यमंत्री व मंत्रियों ने सरकारी खर्चें पर प्राईवेट अस्पतालों में कोविड इलाज कराकर लाखों के बिल अदा किए जिनमें केजरीवाल की पत्नी, स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और गोपाल ने मैक्स अस्पताल साकेत में इलाज कराया। जबकि ठीक उसी समय दिल्ली की जनता एक-एक बैड के लिए अस्पतालों में दर-दर भटक रही थी। श्री भारद्वाज ने कहा कि एक आरटीआई के जवाब में सरकारी सहायता प्राप्त दिल्ली के 56 अस्तपालों में से 22 अस्पतालों ने बताया कि उन्होंने आंशिक रुप से ईडब्लूएस वर्ग के लिए बेड/ओपीडी को आरक्षित किए। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार सुनिश्चित करें कि यदि तीसरी लहर आती है ई.डब्लू.एस. वर्ग के गरीबों का इलाज निजी अस्पतालों में निशुल्क होना चाहिए। उन्होंने कहा कि डीडीएमए की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार तीसरी लहर की आशंका पर दिल्ली में कोई ठोस नीति बनाए ताकि दिल्ली में दूसरी लहर की तरह हाहाकार न मचे और सभी निजी अस्पतालों में ईडब्लूएस वर्ग के मरीजों का भी इलाज हो सके।

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