काराकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए घोषणा की है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को हिरासत में ले लिया है. यह घटनाक्रम वेनेजुएला की राजधानी काराकस में हुए उन संदिग्ध हवाई हमलों और धमाकों के बाद आया है, जिसकी खबरें पिछले कुछ घंटों से अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में बनी हुई थीं.
लैटिन अमेरिका के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा सैन्य और राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल रहा है.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए दावा किया अमेरिकी सुरक्षा बलों ने एक विशेष अभियान के तहत वेनेजुएला के विवादित राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया है.
इससे पहले शनिवार को काराकस में कई बड़े धमाके सुने गए थे और सरकारी इमारतों के ऊपर काला धुआं उठता देखा गया था. माना जा रहा है कि अमेरिकी हवाई हमलों ने मादुरो के सुरक्षा घेरे को ध्वस्त कर दिया, जिसके बाद विशेष बलों ने उन्हें हिरासत में ले लिया. हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि मादुरो को वेनेजुएला में ही किसी सुरक्षित स्थान पर रखा गया है या उन्हें अमेरिका ले जाया जा रहा है.
वेनेजुएला के रक्षामंत्री बोले- सरेंडर नहीं करेंगे
वेनेजुएला पर हमला: वेनेजुएला के रक्षा मंत्री के जीवित होने और बयान जारी करने की पुष्टि हुई है. इससे पहले खबरें आई थीं कि बमबारी में उनके आवास को निशाना बनाया गया है. रक्षा मंत्री ने अपने बयान में कहा, ‘हम न बातचीत करेंगे, न आत्मसमर्पण करेंगे और अंत में जीत हमारी होगी.’ वहीं, इस बीच CBS News ने दावा किया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सेना की एलीट स्पेशल ऑपरेशंस यूनिट डेल्टा फोर्स ने हिरासत में लिया है. हालांकि वेनेजुएला सरकार की ओर से मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है.
ट्रंप बोले- यह शानदार ऑपरेशन था
वेनेजुएला पर हमला: न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला में की गई कार्रवाई बेहद सोच समझकर की गई थी और इसमें बेहतरीन योजना तथा शानदार सैनिकों की भूमिका रही. ट्रंप ने इसे “वास्तव में एक शानदार ऑपरेशन” बताया. इसी बीच अमेरिका की ओर से वेनेजुएला में निशाना बनाए गए ठिकानों की पुष्टि भी की गई है. इन लक्ष्यों में कराकस स्थित मुख्य सैन्य अड्डा फुएर्ते तिउना, राजधानी का प्रमुख एयरबेस ला कार्लोटा, संचार और सिग्नल से जुड़ा अहम केंद्र एल वोल्कान, देश का सबसे बड़ा बंदरगाह ला ग्वायरा पोर्ट और मिरांडा प्रांत में स्थित हिगुएरोटे एयरपोर्ट शामिल हैं. इन ठिकानों पर हमले के बाद वेनेजुएला में सैन्य और प्रशासनिक ढांचे को बड़ा झटका लगने की बात कही जा रही है. हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं.
ट्रंप का बड़ा दावा- मादुरो को गिरफ्तार करके देश से बाहर ले जाया गया
वेनेजुएला पर हमला: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सनसनीखेज बयान जारी करते हुए कहा है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमला सफलतापूर्वक किया है और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी के साथ हिरासत में लेकर देश से बाहर भेज दिया गया है. ट्रंप के मुताबिक यह ऑपरेशन अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर किया गया. उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई से जुड़े और विवरण जल्द साझा किए जाएंगे. ट्रंप ने यह भी बताया कि इस मामले पर आज सुबह 11 बजे मार ए लागो में प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी. फिलहाल वेनेजुएला सरकार की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं.
कराकस के ऊपर ड्यूल-रोटर हेलिकॉप्टर, वेनेजुएलाई सेना के पास ऐसे विमान नहीं
वेनेजुएला पर हमला: कराकस में जारी सैन्य कार्रवाई के बीच सामने आए वीडियो फुटेज ने हालात को और गंभीर बना दिया है. CNN ने बताया कि राजधानी कराकस के ऊपर धुएं के गुबार उठते दिख रहे हैं और उसी इलाके में कई ड्यूल-रोटर हेलिकॉप्टर उड़ते नजर आ रहे हैं. अहम बात यह है कि एविएशन जर्नल फ्लाइटग्लोबल के मुताबिक वेनेजुएला की सेना के पास किसी भी तरह के ड्यूल-रोटर हेलिकॉप्टर नहीं हैं. इससे यह संकेत और मजबूत हो गए हैं कि कराकस के ऊपर दिखाई दे रहे ये हेलिकॉप्टर विदेशी सैन्य ताकत से जुड़े हो सकते हैं.
ईरान का बयान- अमेरिका का हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन
वेनेजुएला पर हमला: ईरान के विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला पर अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा की है. जारी बयान में कहा गया है कि अमेरिका की ओर से किया गया हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर के बुनियादी सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है. ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताते हुए कहा कि किसी संप्रभु देश पर इस तरह की सैन्य कार्रवाई वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा है. ईरान के इस बयान से साफ है कि वेनेजुएला पर हमले को लेकर अब पश्चिम एशिया से लेकर लैटिन अमेरिका तक विरोध की आवाजें तेज होती जा रही हैं.

