शुक्रवार, अप्रैल 17, 2026

विज्ञापन के लिए संपर्क करें

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in Whatsapp Telegram-plane
उदय बुलेटिन
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • स्वास्थ्य
  • अपराध
  • खेल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • मनोरंजन
  • धर्म
Reading: रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में “शोध शिखर 2026” का भव्य शुभारंभ
Font ResizerAa
Notification
उदय बुलेटिन
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • स्वास्थ्य
  • अपराध
  • खेल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • मनोरंजन
  • धर्म
Search
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • स्वास्थ्य
  • अपराध
  • खेल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • मनोरंजन
  • धर्म
Follow US
© 2024. All Rights Reserved.

Home - भोपाल - रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में “शोध शिखर 2026” का भव्य शुभारंभ

रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में “शोध शिखर 2026” का भव्य शुभारंभ

UB News Network
Last updated: फ़रवरी 6, 2026 8:38 अपराह्न
By : UB News Network
Published on : 2 महीना पहले
रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में “शोध शिखर 2026” का भव्य शुभारंभ
साझा करें

भोपाल। 

नवाचार, अनुसंधान और समाजोन्मुख विकास पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय संवाद

रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “शोध शिखर 2026” का शुभारंभ अत्यंत गरिमामय वातावरण में हुआ। यह सम्मेलन नवाचार, हरित प्रौद्योगिकी, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और समाजोन्मुख अनुसंधान की दिशा में वैश्विक दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा। कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही।
बतौर मुख्य अतिथि डॉ. अपर्णा एन., ग्रुप डायरेक्टर, एनआरएससी, इसरो, हैदराबाद ने रिमोट सेंसिंग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक शोध में भू-स्थानिक तकनीक अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। कृषि, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और संसाधन प्रबंधन में रिमोट सेंसिंग का योगदान समाज के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। उन्होंने शोधार्थियों और पेपर प्रेजेंटर्स को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शोध का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं का समाधान होना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए  संतोष चौबे, कुलाधिपति, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आईसेक्ट समूह की प्रेरणादायी यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस संस्था की शुरुआत एक पुस्तक “कंप्यूटर एक परिचय” से हुई थी, जिसकी अब तक लगभग दो मिलियन प्रतियां प्रकाशित और वितरित हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक आंदोलन था। हाल ही में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर प्रकाशित पुस्तक भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जो भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार आज जिन पहलों—डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया—को आगे बढ़ा रही है, उन दिशाओं में आईसेक्ट समूह लंबे समय से कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालयों की भूमिका को नवाचार और सामाजिक परिवर्तन का प्रमुख माध्यम बताते हुए शोध को व्यवहारिक और समाजोपयोगी बनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट वक्ताओं में  माइकल श्क्लोव्स्की, वेंचर फाउंडर, बेयर क्रॉप साइंस ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से भारत में रह रहे हैं और यहां की संस्कृति, अनुशासन और कार्यशैली से अत्यंत प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि वे किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और किसानों के बीच तकनीकी हस्तांतरण पर कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि जब तक शोध और तकनीक का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगा, तब तक उसका वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं होगा। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि हमें व्यवहारिक और प्रैक्टिकल सोच विकसित करनी होगी, तभी हम लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला सकेंगे।

डॉ. विनोद शिवरैन, सिन्जेंटा इंडिया ने कहा कि कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का उद्देश्य किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। उन्होंने ‘विजन 2047’ का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर नवाचारों को अपनाना होगा। केवल कृषि ही नहीं, बल्कि सभी क्षेत्रों में विश्व की चुनौतियों का समाधान खोजने की दिशा में कार्य करना होगा। विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना भी उतना ही आवश्यक है।

डॉ रजत संधीर, प्रोफेसर पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़, ने अपने संबोधन में कहा कि रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय किसानों, सरकार और उद्योग के साथ मिलकर कार्य कर रहा है, जो अनुसंधान को जमीन से जोड़ने का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारत में स्टार्टअप संस्कृति तेजी से विकसित हो रही है और लाखों युवाओं ने नवाचार के माध्यम से नए आयाम स्थापित किए हैं। विचारों को वास्तविकता में बदलने की क्षमता ही आज के भारत की सबसे बड़ी ताकत है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो रवि प्रकाश दुबे ने स्वागत वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि “शोध शिखर” जैसे कार्यक्रमों से ऐसे विचार सामने आते हैं जो समाज और राष्ट्र के विकास में उपयोगी सिद्ध होते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि यहां 10 संकायों में विविध पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं तथा 18 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से शोध और नवाचार को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
डॉ अरुण जोशी, कुलगुरु, डॉ सी वी रामन यूनिवर्सिटी खण्डवा ने कहा कि यदि कोई अच्छा और नवाचारी शोधकर्ता बनना चाहता है, तो उसे ‘रिफ्लेक्शन’ शब्द को समझना और अपनाना होगा। जब तक आत्म-मंथन और चिंतन नहीं होगा, तब तक सच्चा शोध संभव नहीं है। उन्होंने शोध आधारित प्रशिक्षण और इनसाइटफुल एनालिसिस पर बल देते हुए कहा कि यही प्रक्रिया हमें क्रिटिकल थिंकिंग की ओर ले जाती है।

डॉ. विजय सिंह, कुलगुरु, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी ने कहा कि आज कौशल आधारित शिक्षा और शोध की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि उद्योगों के साथ मिलकर विश्वविद्यालय स्किल और रिसर्च दोनों क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। रक्षा, कृषि और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र प्रस्तुत होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विशेष कार्य हो रहा है, जो भविष्य की शिक्षा और उद्योग दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
कार्यक्रम की प्रस्तावना और भूमिका रखते हुए सम्मेलन की संयोजक डॉ. रचना चतुर्वेदी ने “शोध शिखर” की अवधारणा, उद्देश्य और इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल शोध प्रस्तुत करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह नवाचारों को समाज के वास्तविक मुद्दों से जोड़ने का प्रयास है, जिससे अकादमिक ज्ञान और सामाजिक आवश्यकताओं के बीच सेतु स्थापित किया जा सके।

उद्घाटन समारोह के पश्चात पैनल डिस्कशन में डॉ. अपर्णा एन. ने सेटेलाइटों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसरो 32 मंत्रालयों के साथ काम कर रहा है, उन्होंने आगे कहा कि एनआरएससी और आरएनटीयू विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ रिमोट सेंसिंग, डाटा एनालिसिस, जियो स्पेशियल जैसे विषयों पर ट्रेनिंग दे सकता है। वहीं डॉ मनीष मोहन गोरे, सीनियर साइंटिस्ट एंड एडिटर विज्ञान प्रगति एनआईएसपीआर नई दिल्ली ने एनआईएसपीआर की यात्रा को बताते हुए कहा कि एनआईएसपीआर और आरएनटीयू साथ मिलकर विज्ञान संचार के लिए काम कर सकते हैं जिसमें संयुक्त पब्लिकेशन और भारतीय भाषाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर सकते हैं। डॉ रजत संधीर, प्रोफेसर पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ ने विद्यार्थियों को माइंडसेट चेंज करने की बात कही। उन्होंने बताया कि आरएनटीयू कृषि में एआई के उपयोग पर साथ में कार्य कर सकता है। डॉ. विनोद शिवरैन, सिन्जेंटा इंडिया और  माइकल श्क्लोव्स्की, वेंचर फाउंडर, बेयर क्रॉप साइंस इन्होंने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस सत्र में मॉडरेटर की भूमिका डॉ अदिति चतुर्वेदी वत्स ने निभाई।
 
विज्ञान संचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सी. वी. रामन विज्ञान सम्मान प्रदान

विज्ञान संचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और विज्ञान लेखकों को “सी. वी. रमन विज्ञान सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन विशेषज्ञों को प्रदान किया गया, जिन्होंने विज्ञान को समाज तक सरल, प्रभावी और जनोन्मुखी तरीके से पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सम्मान प्राप्त करने वालों में डॉ. मनोज कुमार पटेरिया (पूर्व निदेशक, डीएसटी, नई दिल्ली), डॉ. मनीष मोहन गोरे (वरिष्ठ वैज्ञानिक, निस्पर, नई दिल्ली), डॉ. समीर गांगुली (वरिष्ठ विज्ञान लेखक, मुंबई) तथा डॉ. प्रदीप मिश्रा (वैज्ञानिक अधिकारी “एफ” राजा रमन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी परमाणु ऊर्जा विभाग, इंदौर शामिल रहे। इन सभी ने विज्ञान संचार, वैज्ञानिक सोच के प्रसार और आमजन में विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में विशेष योगदान दिया है।
विज्ञान पर्व
 

शोध शिखर 2026 में दस विषयों पर तकनीकी सत्रों का आयोजन

सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित सत्रों में अभियांत्रिकी प्रौद्योगिकी एवं हरित नवाचार, समग्र स्वास्थ्य, वेलनेस एवं पर्यावरणीय कल्याण, समाज पर प्रभाव डालने वाला आधुनिक विज्ञान, सतत कृषि, खाद्य सुरक्षा एवं ग्रामीण नवाचार, मानविकी, कला एवं सतत समाज, व्यवसाय प्रबंधन एवं हरित अर्थव्यवस्था, नवाचार एवं सततता के लिए शिक्षा, सतत विकास लक्ष्यों के परिप्रेक्ष्य में विधि, सुशासन एवं पर्यावरण नीति, विनिर्माण, ऑटोमेशन एवं ऊर्जा के क्षेत्र में नवीन विकास तथा भारतीय ज्ञान प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।
शोध शिखर 2026 की स्मारिका, रिसर्च इन एजीयू बुक, इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए: कंप्यूटर एक परिचय के नवीन अंक, उद्यमिता, पर्यावरण, और भाषाओं पर कुलाधिपति  संतोष चौबे जी की किताब और डॉ रचना चतुर्वेदी की किताब डिजिटल स्किलिंग इन लाइवलीहुड बुक का विमोचन किया गया।
 
रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में एमओयू साइनिंग, अकादमिक एवं अनुसंधान सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय भोपाल ने शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों को नई दिशा देने की पहल करते हुए पीआई-RAHI: नॉर्दर्न रीजन एस एंड टी क्लस्टर, चंडीगढ़ के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार, शोध तथा विद्यार्थियों के कौशल विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया है। इस एमओयू के माध्यम से दोनों संस्थान संयुक्त रूप से शोध परियोजनाओं, अकादमिक आदान-प्रदान, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा नवाचार आधारित गतिविधियों का संचालन करेंगे। साथ ही विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नई तकनीकों, प्रयोगात्मक अनुसंधान और उद्योग-अकादमिक समन्वय से जुड़ने के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। इस अवसर पर देश-विदेश से आए शोधार्थियों, शिक्षकों और विशेषज्ञों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए ज्ञान, अनुभव और विचारों का आदान-प्रदान किया।
सम्मेलन का समापन सत्र 7 फरवरी 2026 को आयोजित होगा, जिसमें प्रो. खेमसिंह डहेरिया, अध्यक्ष, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। वहीं डॉ. मृत्युंजय महापात्रा, महानिदेशक, भारत मौसम विज्ञान विभाग विशिष्ट अतिथि होंगे। समापन सत्र में सम्मेलन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी, पुरस्कार वितरण किया जाएगा तथा उत्कृष्ट शोध कार्यों को सम्मानित किया जाएगा।

जीवन का दर्शन समझाती विज्ञान कविताओं का कवियों ने किया पाठ

द्वितीय सत्र विज्ञान कवि सम्मेलन का रहा। इसमें छिंदवाड़ा से शेफाली शर्मा, दिल्ली से डॉ दीवा नियाजी, डॉ मनीष मोहन गोरे, प्रदीप मिश्रा, संतोष चौबे, डॉ विशाखा राजुरकर और मोहन सगोरिया ने शिरकत करते हुए अपनी विज्ञान कविताओं को प्रस्तुत किया। इसमें शुरुआत शेफाली शर्मा ने अपनी कविता “एक मात्र” से की। इसके बाद उन्होंने कविता “आर्यभट्ट” को प्रस्तुत किया। डॉ दीवा नियाजी ने गुरूत्वाकर्षण के नियम को जीवन से जोड़कर सुंदर कविता प्रस्तुत की। इसके बाद उन्होंने एआई पर कविता “मशीन”, कोरोना पर कविता ” महामारी आई तो याद आया विज्ञान…” को पढ़ा। डॉ मनीष मोहन गोरे ने कविता “पौधे की व्यथा” से कविता पाठ की शुरुआत की। इसके बाद कविता “कोशिका” पेश किया। डॉ विशाखा राजुरकर ने अपनी कविता ” हमारे यहां तेजी से विकास हो रहा है…” को पेश किया। अगली कविता “समानांतर ब्रह्मांड” को पेश किया। कविता पाठ को आगे बढ़ाते हुए प्रदीप मिश्र जी ने अपनी कविता “महामशीन” और “नाभिक” को पेश किया। वरिष्ठ कवि बलराम गुमास्ता द्वारा “दूर गिलहरी रुकी, आम की पतली टहनी झुकी…”, ” जितनी दूर देख पाती हैं आंखे…” का पाठ किया। अंत में संतोष चौबे द्वारा कविता ” आईना” और “कृत्रिम बुद्धिमत्ता” का पाठ किया।

कठपुतली और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विज्ञान संचार प्रस्तुत

“शोध शिखर” में डॉ. विकास मिश्रा ने कठपुतली और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विज्ञान संचार प्रस्तुत किया। उन्होंने जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल और रोचक ढंग से समझाते हुए विद्यार्थियों व आमजन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर दिया। इस प्रस्तुति में राजेंद्र कुमार त्रिवेदी, इश्कियाक अली, राज कुमार बाजपेयी और पूजा विरमानी का भी सहयोग रहा।

“पर्यावरण संकट समाधान के लिए डाटा साइंस और एआई” पर संवाद सत्र

“पर्यावरण संकट समाधान के लिए डाटा साइंस और एआई” सत्र के प्रमुख वक्ताओं में डिपार्टमेंट ऑफ साइंस (डीएसटी) एवं टेक्नोलोजी के पूर्व डायरेक्टर डॉ मनोज पटेरिया, डीएसटी के पूर्व वैज्ञानिक डॉ बी के त्यागी, आईसीएमआर अहमदाबाद के पूर्व वैज्ञानिक डॉ केएन पांडे और दिल्ली निस्पर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ मनीष मोहन गोरे शामिल रहे। सत्र की अध्यक्षता रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे ने की। इस दौरान अपने वक्तव्य में डॉ मनोज पटेरिया ने कृषि के क्षेत्र में डाटा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज किसानों की संख्या घटती जा रही है इसलिए उनसे संबंधित डाटा महत्वपूर्ण हो गया है। ताकि सही नीतियां एवं योजनाएं बन सके। साथ ही उन्होंने अरावली पर पेड़ लगाने की पहल का जिक्र करते हुए बताया कि इस पहल ने वहां की लोकल प्रजातियों के बीजों को नया जीवन दिया और अरावली को हराभरा बनाया है। ये बातें डाटा के ऑब्जर्वेशन से समझ आई है। उन्होंने दिल्ली में सीएनजी को अपनाए जाने का उदाहरण देकर बताया कि यह अफसरों एवं नेताओं द्वारा लिया गया था , इसे लेकर साइंटिफिक कंसल्टेशन नहीं किया गया था। जबकि स्पेन में म्युनिसिपैलिटी के पास भी साइंटिफिक कंसल्टेंट होता है, इसीलिए उनकी योजनाओं का क्रियान्वयन आदर्श तरीके से होता है। अध्यक्षीय उद्बोधन में संतोष चौबे ने फ्यूचर स्टडीज या फ्यूचर टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट विभाग बनाए जाने की बात कही, जिससे देश में बेहतर तकनीक आ सके और हम बाकी विश्व से आगे चल सकें। डॉ के एन पांडे ने अपने वक्तव्य में पर्यावरण संरक्षण के लिए डाटा संग्रह की आवश्यकता पर जोर दिया। अधिक और बेहतर डेटा सही तस्वीर प्रस्तुत करता है जिससे भविष्य का सही अनुमान लगाना संभव होता है। डॉ बी के त्यागी ने अपने वक्तव्य में पर्यावरण एवं कृषि में एआई के उपयोग पर बात की। उन्होंने बताया कि वन एवं जैव विविधिता के संरक्षण में एआई वाइल्डलाइफ मॉनिटरिंग, हैबिटेट एनालिसिस, डिफोरेस्टेशन डिटेक्शन जैसे कार्यों को कर रहा है। साथ ही उन्होंने एआई रेगुलेशन और डाटा शेयरिंग फ्रेमवर्क पर कार्य किए जाने की बात कही। इससे पहले डॉ मनीष मोहन गोरे ने विज्ञान प्रसार की जरूरत पर बात की।

TAGGED:Madhya PradeshThe grand launch of "Research Summit 2026The grand launch of "Research Summit 2026
ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
पिछली ख़बर ABCDE नहीं, QWERTY क्यों? कीबोर्ड लेआउट का पूरा इतिहास और साइंस ABCDE नहीं, QWERTY क्यों? कीबोर्ड लेआउट का पूरा इतिहास और साइंस
अगली ख़बर PSTST-2025: RCI ने विशेष शिक्षा कॉलम में सुधार के लिए पोर्टल को फिर से खोला PSTST-2025: RCI ने विशेष शिक्षा कॉलम में सुधार के लिए पोर्टल को फिर से खोला

ये भी पढ़ें

छत्तीसगढ़ में बच्चों के लिए तैयार हो रहा बाल-अनुकूल शिक्षा वातावरण, मित्रता और आ

छत्तीसगढ़ में बच्चों के लिए तैयार हो रहा बाल-अनुकूल शिक्षा वातावरण, मित्रता और आ

पंजाब सरकार चलाने के आरोपों पर बोले संजय सिंह—क्या उन्हें हक नहीं कि…?

पंजाब सरकार चलाने के आरोपों पर बोले संजय सिंह—क्या उन्हें हक नहीं कि…?

टेंडर विवाद बना हिंसा की वजह: सतना में गोली चली, मारपीट का वीडियो CCTV में कैद

टेंडर विवाद बना हिंसा की वजह: सतना में गोली चली, मारपीट का वीडियो CCTV में कैद

महतारी वंदन योजना के माध्यम से मातृशक्ति हो रही सशक्त, 42 हजार से अधिक श्रद्धालु

महतारी वंदन योजना के माध्यम से मातृशक्ति हो रही सशक्त, 42 हजार से अधिक श्रद्धालु

सोने की आड़ में करोड़ों की ठगी! रान्या राव की हैरान कर देने वाली कहानी

सोने की आड़ में करोड़ों की ठगी! रान्या राव की हैरान कर देने वाली कहानी

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in Whatsapp Telegram-plane
Uday Bulletin Logo
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?