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मकर संक्रांति और खिचड़ी का गहरा संबंध: परंपरा, आस्था और ज्योतिष का रहस्य

UB News Network
Last updated: जनवरी 13, 2026 12:12 अपराह्न
By : UB News Network
Published on : 3 महीना पहले
मकर संक्रांति और खिचड़ी का गहरा संबंध: परंपरा, आस्था और ज्योतिष का रहस्य
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हर साल माघ माह में सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. इस साल 14 जनवरी को सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे. ऐसे में इस साल ये पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा. पूरे देश में इस त्योहार को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान-दान भी किया जाता है.

इस त्योहार को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है. उत्तर भारत के कई राज्यों में इस दिन खचड़ी बनाई और खाई जाती है. साथ ही इसका दान भी किया जाता है. ये एक पुरानी परंपरा है. यही कारण है कि मकर संक्रांति का नाम आते ही खिचड़ी याद आ जाती है, लेकिन इस परंपरा के पीछे सिर्फ स्वाद भर नहीं है, बल्कि गहरी आस्था और सामाजिक भावना है. इसका ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व भी है. आइए जानते हैं.

ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति के पर्व पर सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव की मकर राशि में प्रवेश करते हैं. इसे एक शुभ परिवर्तन माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन जो भी दान किया जाता है, उससे शुभ फल प्राप्त होते हैं. खिचड़ी में पड़ने वाला चावल, दाल और घी सात्विक आहार है. ये सूर्य को अर्पित करने के लिए उपयुक्त माना जाता है.

इस दिन खिचड़ी का दान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं. जीवन में स्थिरता आती है. यही वजह है कि इस दिन स्नान के बाद खिचड़ी का दान कर उसे प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है.

ये भी है एक धार्मिक मान्यता

धार्मिक कथाओं में मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा बाबा गोरखनाथ से जोड़ी जाती है. बताया जाता है कि एक समय कठिन हालातों और आक्रमणों की वजह से योगी और साधु नियमित रूप से भोजन नहीं बना पाते थे. ऐसे में बाबा गोरखनाथ ने सभी को सलाह दी कि दाल, चावल और मौसमी सब्जियों को एक साथ पकाया जाए. यह भोजन कम समय में बन जाता था और लंबे समय तक उर्जा देता था.

धीरे धीरे इस साधारण और पौष्टिक भोजन की चर्चा साधु संतों से समाज तक पहुंची. इसी के बाद इसे मकर संक्रांति के पर्व से जोड़ दिया गया. तभी से इस दिन खिचड़ी बनाना और खाना शुभ कहा जाने लगा.

TAGGED:KhichdiMakar Sankranti
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