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तारिक रहमान हो सकते हैं बांग्लादेश के अगले पीएम, बचपन की जेल से लेकर सत्ता तक का

UB News Network
Last updated: फ़रवरी 13, 2026 4:02 अपराह्न
By : UB News Network
Published on : 2 महीना पहले
तारिक रहमान हो सकते हैं बांग्लादेश के अगले पीएम, बचपन की जेल से लेकर सत्ता तक का
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ढाका 

बांग्लादेश में आम चुनाव के बाद राजनीतिक तस्वीर तेजी से साफ होती दिख रही है. मतगणना के बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने जीत का दावा किया है और कई मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि 300 सदस्यीय संसद में पार्टी 151 से ज्यादा सीट हासिल कर चुकी है, जो सरकार बनाने के लिए पर्याप्त मानी जाती है. हालांकि निर्वाचन आयोग की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है और कुछ सीटों के नतीजे आने बाकी हैं. बीएनपी ने सोशल मीडिया पर कहा कि वह बहुमत के साथ सरकार बनाने के लिए तैयार है. 200 से ज्यादा सीटों पर बढ़त की भी खबर है. चुनाव जीतने वाली पार्टी उस अंतरिम प्रशासन की जगह लेगी, जिसने अगस्त 2024 में आवामी लीग सरकार के हटने के बाद सत्ता संभाली थी. इसी बीच यह भी खबर है कि पार्टी प्रमुख तारिक रहमान शनिवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं.

बांग्लादेश चुनाव BNP के जीतने के साथ ही विदेशों से प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रहमान को जीत पर बधाई देते हुए कहा कि यह बांग्लादेश की जनता के उनके नेतृत्व पर भरोसे को दिखाता है और भारत साझा विकास लक्ष्यों पर साथ काम करने को तैयार है. अमेरिका ने भी चुनाव को सफल बताते हुए शुभकामनाएं दी हैं. वहीं पाकिस्तान के नेतृत्व की ओर से भी बधाई संदेश भेजे गए हैं.

बांग्लादेश चुनाव को बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधी टक्कर माना गया, क्योंकि आवामी लीग मैदान में नहीं थी. जमात ने मतगणना में देरी और हेरफेर के आरोप लगाए हैं और चेतावनी दी है कि जनादेश छीना गया तो बड़ा आंदोलन होगा. नेशनल सिटिजन पार्टी ने भी कुछ सीटों पर धांधली के आरोप लगाए. दूसरी ओर निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नतीजों में उतार-चढ़ाव सामान्य है.

गुरुवार को देशभर में 299 सीटों पर मतदान गुरुवार सुबह 7:30 बजे शुरू होकर शाम 4:30 बजे तक चला, जिसके बाद तुरंत मतगणना शुरू कर दी गई. चुनाव के दौरान व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए और करीब 10 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई, जिसे अब तक की सबसे बड़ी चुनावी तैनाती माना जा रहा है. आयोग के अनुसार हजारों केंद्रों से अलग-अलग समय पर नतीजे आने के कारण अंतिम तस्वीर बनने में वक्त लग रहा है.

बीएनपी पिछली बार 2001 से 2006 के बीच सत्ता में रही थी. पार्टी ने पहले ही साफ किया था कि जीत मिलने पर तारीक रहमान प्रधानमंत्री बनेंगे. करीब 17 साल विदेश में रहने के बाद पिछले साल देश लौटे रहमान ने समर्थकों से जश्न के बजाय संयम रखने और दुआ करने की अपील की है. फिलहाल आधिकारिक नतीजों की घोषणा का इंतजार है, लेकिन शुरुआती संकेत बताते हैं कि बांग्लादेश की राजनीति में एक नया दौर शुरू होने की तैयारी है.

4 साल की उम्र में जेल से PM की कुर्सी तक

बांग्लादेश के 2026 के आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की ऐतिहासिक जीत में तारिक रहमान की रणनीतिक और करिश्माई भूमिका ने केंद्रबिंदु की तरह काम किया। लंबे निर्वासन और राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने पार्टी को एकजुट किया, युवा मतदाताओं को आकर्षित किया और जनसमर्थन की नई लहर खड़ी की। यह जीत सिर्फ बीएनपी की नहीं, बल्कि तारिक रहमान की नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक दृष्टि का प्रतीक बनकर उभरी है।

इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि बांग्लादेश की राजनीति दशकों से दो मुख्य पारिवारिक‑राजनीतिक धारणाओं के बीच घूमती रही है। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत खालिदा जिया की विरासत के बीच। ऐसे में 2026 के चुनावों में बीएनपी की जीत और तारिक रहमान की उभरती भूमिका यह संकेत देती है कि अब देश का नेतृत्व एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर सकता है। 

पहले तारिक रहमान के बारे में जानिए
20 नवंबर 1965 को जन्मे तारिक रहमान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता और पार्टी के चेयरमैन हैं। वह पार्टी की सर्वोच्च राजनीतिक इकाई का नेतृत्व करते हैं। उन्होंने ढाका यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना शुरू किया। वे बांग्लादेश के इतिहास में एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता जिया उर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति और स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे, जिनकी 1981 में हत्या हो गई थी।

उनकी मां बेगम खालिदा जिया 1991 से 1996 व 2001 से 2006 तक बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री रहीं और बीएनपी की प्रमुख चेयरपर्सन थीं। अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दिनों से ही तारिक अपने परिवार की राजनीति में शामिल रहे हैं और बीएनपी के भीतर स्थायी भूमिका निभाई है। 

जब चार साल की उम्र में जेल गए थे तारिक
तारिक रहमान, जिन्हें बांग्लादेश की राजनीति में अक्सर तारिक जिया कहा जाता है, अपने परिवार के नाम से ही पहचान रखते हैं। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान वे केवल चार साल के थे और कुछ समय के लिए हिरासत में भी रहे। इसी वजह से उनकी पार्टी बीएनपी उन्हें युद्ध के सबसे कम उम्र के बंदियों में शामिल बताकर सम्मान देती है। उनकी राजनीतिक पहचान भी इसी पारिवारिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ी है। छोटे उम्र में संघर्ष और परिवार की विरासत ने उन्हें बांग्लादेश की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा बना दिया। 

अब तारिक रहमान की मां खालिदा जिया के बारे में जानिए
तारिक रहमान की मां और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया ने 3 जनवरी 1982 को पहली बार बीएनपी के सदस्य के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। बाद में वे बीएनसपी की अध्यक्ष बनीं और अपनी मौत तक वह इस पद पर रहीं। बांग्लादेश में सैन्य शासन के खिलाफ खालिदा जिया एक प्रमुख आवाज बनकर उभरीं। लोगों को सैन्य शासन के खिलाफ एकजुट करने में खालिदा जिया ने अहम भूमिका निभाई। 

जिया 1991 में पहली बार बनीं पीएम
खालिदा जिया साल 1991 में पहली बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं। इसके साथ ही बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का गौरव भी हासिल किया। इसके बाद साल 2001 से 2006 तक दूसरी बार भी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं। बताते चले कि खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1946 को अविभाजित भारत के दिनाजपुर जिले में हुआ। उनकी माता का नाम तैयबा और पिता का नाम इसकंदर मजूमदार था।

खालिदा का परिवार जलपाईगुड़ी में चाय का व्यापार करता था और वहां से पलायन करके दिनाजपुर पहुंचा था। साल 1960 में खालिदा जिया की शादी आर्मी कैप्टन जिया उर रहमान के साथ हुई, जो बाद में बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने। साल 1983 में जब खालिदा बीएनपी चीफ बनीं तो उनकी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने खालिदा की काबिलियत पर शक जताते हुए पार्टी छोड़ दी। 

तारिक रहमान के पिता और पूर्व बांग्लादेशी राष्ट्रपति
अब तारिक रहमान के पिता के बारे में जानते हैं। तारिक रहमान के पिता जिया उर रहमान ने बांग्लादेश के स्वतंत्रता सेनानी और देश के सैनिक-राजनीतिक नेता थे। वे 1975 में सैनिक हस्तक्षेप के बाद सत्ता में आए और 1977 से 1981 तक बांग्लादेश के राष्ट्रपति रहे। उन्होंने बीएनपी की स्थापना की और लोकतांत्रिक बहुदलीय राजनीति को मजबूती दी। 1981 में उनकी हत्या हुई, लेकिन उनकी राजनीतिक विरासत आज भी बीएनपी और देश की राजनीति में जीवित है।

तारिक रहमान की पत्नी जुबैदा कौन हैं?
जुबैदा रहमान तारिक रहमान की पत्नी हैं और पेशे से चिकित्सक। वे अपने पति के राजनीतिक जीवन में समर्थक और साथ देने वाली भूमिका निभाती रही हैं। चुनावी अभियानों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में अक्सर उनके साथ नजर आती हैं। निजी जीवन में परिवार और सामाजिक जिम्मेदारियों में सक्रिय रहते हुए वे बीएनपी के भीतर तारिक की छवि को मजबूत करती हैं।

तारिक रहमान की बेटी
अब बात अगर तारिक रहमान की बेटी के बारे में करें तो जाइमा रहमान तारिक रहमान की बेटी हैं। वे राजनीतिक जीवन में अपने पिता के साथ दिखाई देती हैं, विशेषकर चुनावी अभियानों और सामाजिक कार्यक्रमों में। हालांकि वे सार्वजनिक राजनीति में अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हैं, लेकिन युवा समर्थकों और परिवारिक दृष्टि से उनकी उपस्थिति ने बीएनपी के प्रचार और छवि को और व्यापक बनाया है। अच्छा इन सब के बीच एक दिलचस्प बात ये है कि तारिक रहमान के साथ उनकी पारिवारिक पालतू बिल्ली जेबू भी खूब सुर्खियों में रही है। वह लंदन से ढाका लौटने के दौरान उनके साथ आई। 

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