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सहकारिता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना सरकार की प्राथमिकता : मंत्री सारं

UB News Network
Last updated: जनवरी 30, 2026 8:25 अपराह्न
By : UB News Network
Published on : 2 महीना पहले
सहकारिता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना सरकार की प्राथमिकता : मंत्री सारं
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कृषि एवं ग्रामीण विकास को नई दिशा देगा स्टेट फोकस पेपर : मंत्री कंषाना
राज्य ऋण संगोष्ठी : नाबार्ड के स्टेट फोकस पेपर 2026–27 का हुआ विमोचन

भोपाल
राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), मध्यप्रदेश द्वारा शुक्रवार को राज्य ऋण संगोष्ठी का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना द्वारा किया गया। इस अवसर पर स्टेट फोकस पेपर 2026–27 (मध्यप्रदेश) का विधिवत विमोचन किया गया।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना सरकार की प्राथमिकता
मंत्री सारंग ने स्टेट फोकस पेपर 2026–27 के विमोचन अवसर पर कहा कि यह दस्तावेज ग्रामीण एवं कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए आगामी वर्षों का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि एवं सहकारिता है और सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि इन दोनों क्षेत्रों को सशक्त बनाया जाए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था वैश्विक मंच पर तीव्र गति से आगे बढ़ रही है। जनधन योजना के माध्यम से देश के प्रत्येक नागरिक को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया है, जिससे न केवल योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचा है, बल्कि बैंकिंग प्रणाली भी मजबूत हुई है।

कमजोर सहकारी बैंकों को सहायता से मिले सकारात्मक परिणाम
मंत्री श्री सारंग ने बताया कि कुछ कमजोर जिला सहकारी बैंकों के कारण कृषकों को पूर्ण वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में कठिनाइयाँ आ रही थीं। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य शासन द्वारा वित्तीय वर्ष 2024–25 में 6 कमजोर जिला सहकारी बैंकों – रीवा, सतना, जबलपुर, ग्वालियर, शिवपुरी एवं दतिया को ₹50-50 करोड़, कुल ₹300 करोड़ की अंशपूंजी सहायता प्रदान की गई। इस सहायता के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इन बैंकों द्वारा गत वर्ष की तुलना में लगभग ₹675 करोड़ का अल्पकालीन कृषि ऋण 75,000 कृषकों को वितरित किया गया। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जिसके लिए 16 विभागों को मिलाकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस वर्ष भी कृषि क्षेत्र में निवेश धरातल पर उतरेंगे।

ग्रामीण उद्यमियों तक ऋण पहुँचना आवश्यक-मंत्री श्री कंषाना
मंत्री श्री कंषाना ने कहा कि नाबार्ड का स्टेट फोकस पेपर 2026–27 आगामी वित्तीय वर्ष के लिए एक ठोस ब्लूप्रिंट है, जो प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दिशा प्रदान करेगा। विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाना आवश्यक है। इसके लिए ग्रामीण उद्यमियों तक समय पर एवं पर्याप्त ऋण पहुँचना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वर्ष 2026–27 मध्यप्रदेश को विकास की नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा।

स्टेट फोकस पेपर 2026–27 की प्रमुख विशेषताएँ
स्टेट फोकस पेपर के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026–27 में मध्यप्रदेश के लिए कुल प्राथमिकता क्षेत्र ऋण क्षमता ₹3,75,384.29 करोड़ आंकी गई है। यह राज्य की कृषि, MSME एवं ग्रामीण विकास से जुड़ी आवश्यकताओं का व्यापक आकलन प्रस्तुत करता है। इसमें से ₹2,08,743.78 करोड़ कृषि क्षेत्र के लिए प्रस्तावित हैं, जिनमें फसल ऋण, कृषि अवसंरचना एवं सहायक गतिविधियाँ शामिल हैं। ₹1,46,269.36 करोड़ MSME क्षेत्र के लिए संभावित ऋण क्षमता के रूप में आंके गए हैं। शेष ₹20,371.15 करोड़ निर्यात ऋण, शिक्षा, आवास, सामाजिक अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा एवं अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों के लिए अनुमानित हैं।

स्टेट फोकस पेपर में उल्लेख किया गया है कि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान बना हुआ है, जो राज्य के सकल घरेलू राज्य उत्पाद (GSDP) में 44.36% का योगदान देती है। विशाल कृषि योग्य भूमि एवं अनुकूल कृषि-जलवायु परिस्थितियाँ इसे सुदृढ़ आधार प्रदान करती हैं। इसके अनुरूप SFP में कृषि ऋण क्षमता ₹1,79,589.97 करोड़, कृषि अवसंरचना के लिए ₹6,461.67 करोड़ तथा सहायक गतिविधियों के लिए ₹22,692.14 करोड़ का अनुमान लगाया गया है। मध्यप्रदेश गेहूं, चावल, सोयाबीन, चना, दालों एवं तिलहनों के उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, जिससे फसल उत्पादन, कृषि मशीनीकरण, सिंचाई एवं वैल्यू चेन विकास के लिए संस्थागत ऋण की निरंतर आवश्यकता स्पष्ट होती है।

राज्य की अर्थव्यवस्था एवं बैंकिंग परिदृश्य

वित्तीय वर्ष 2024–25 में राज्य का GSDP ₹15.03 लाख करोड़ रहा, जिसमें 6.05% की विकास दर दर्ज की गई। इस अवधि में प्रति व्यक्ति आय ₹1,52,615 रही। प्रदेश के बैंकिंग नेटवर्क में ग्रामीण, अर्ध-शहरी एवं शहरी क्षेत्रों में कुल 8,779 बैंक शाखाएँ तथा 8,882 एटीएम कार्यरत हैं। मार्च 2025 तक राज्य का कुल क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात 83.51% तक पहुँच गया है। ये सभी संकेतक एक मजबूत एवं सक्षम वित्तीय इकोसिस्टम को दर्शाते हैं, जो वित्तीय वर्ष 2026–27 में अनुमानित बढ़ी हुई ऋण आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ है।

संगोष्ठी के दौरान कृषि एवं सहकारिता क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभिन्न विभागों, सहकारी बैंकों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं लघु उद्यमियों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक श्रीमती सी. सरस्वती, भारतीय रिजर्व बैंक की क्षेत्रीय निदेशक सुश्री रेखा चंदनवेली, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) के संयोजक श्री धीरज गोयल सहित वरिष्ठ बैंकर, वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि एवं विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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