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हरियाणा के थप्पड़ कांड में 6 और पुलिसकर्मी सस्पेंड

UB News Network
Last updated: मार्च 9, 2026 5:02 अपराह्न
By : UB News Network
Published on : 1 महीना पहले
हरियाणा के थप्पड़ कांड में 6 और पुलिसकर्मी सस्पेंड
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हिसार/पानीपत.

घरौंडा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में तैनात डॉक्टर को एसएचओ के थप्पड़ मारने के मामले में रविवार को छह और पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। घटना वाले दिन चार मार्च को इन सभी की ड्यूटी सीएचसी में थी। थाना प्रभारी दीपक को पांच मार्च को सस्पेंड किया जा चुका है।

उधर, पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के बाद सरकारी डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म करने की घोषणा कर दी है। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के राज्य प्रधान डा. अनिल, वरिष्ठ उप प्रधान डॉ. नितिन व स्टेट को-आर्डिनेटर डा. दीपक गोयल ने बताया कि सोमवार से प्रदेश में डॉक्टर अपनी ड्यूटी देंगे और ओपीडी शुरू करेंगे। उनका पुलिस प्रशासन से विश्वास उठ चुका है। इसलिए पीड़ित डॉ. प्रशांत अदालत जाएंगे। शनिवार को ओपीडी सेवाएं बंद रहने और रविवार को अवकाश के कारण उपचार लगभग ठप रहा। राज्यभर में प्रतिदिन औसतन 80 से 85 हजार मरीज प्रभावित रहे और दो दिन में यह संख्या करीब 1.6 लाख तक पहुंच गई।

क्या कहते हैं आंकडे?
प्रभावित सेवा     प्रभाव का प्रतिशत     विवरण
सरकारी चिकित्सक भागीदारी     93%     औसतन इतने डॉक्टर हड़ताल में शामिल रहे, जिससे केवल सीमित सेवाएं ही मिल पाईं।
नियोजित सर्जरी (Planned Surgeries)     95%     दो दिनों के भीतर अधिकांश सर्जरी स्थगित करनी पड़ीं और पोस्टमार्टम के मामले भी लंबित रहे।
एमएलसी (MLC) सेवाएं     98%     यह सेवा सबसे अधिक प्रभावित हुई क्योंकि इसके लिए सरकारी डॉक्टर के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं।

जिलों में घटती ओपीडी से बढ़ी परेशानी
प्रदेश के कई जिलों में ओपीडी लगभग ठप रही। भिवानी में 130 में से करीब 100 चिकित्सक कार्य बहिष्कार में शामिल रहे। और पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कालेज में सामान्य दिनों की ढाई हजार ओपीडी के मुकाबले शनिवार को लगभग 1700 मरीज ही पहुंचे। हिसार में करीब 900 मरीज बिना उपचार लौट गए। यमुना नगर, जींद और झज्जर सहित कई जिलों में एनएचएम व जूनियर रेजिडेंट के सहारे सीमित सेवाएं चलती रहीं। राज्य स्तर के आंकड़ों के अनुसार 20 जिलों में प्रतिदिन 80-85 हजार मरीजों की ओपीडी प्रभावित रही। करनाल में लगभग 5200, हिसार में 6100, गुरुग्राम में 6800 और फरीदाबाद में 6300 मरीज प्रभावित हुए।

क्या हुआ हड़ताल का असर?
कुल प्रभावित ओपीडी: इन 20 जिलों में लगभग 80,000 से 85,000 मरीज प्रतिदिन प्रभावित हुए, जिसका कुल योग शनिवार और रविवार को लगभग 1.6 लाख के पार रहा।
भागीदारी: राज्य के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की हड़ताल में भागीदारी का औसत 93% के आसपास रहा। शेष 7% में कुछ आयुष चिकित्सक और एनएचएम के कर्मी शामिल थे जो सीमित स्तर पर सेवाएं दे रहे थे।
सेवा का नाम     प्रभाव का स्तर     मुख्य कारण/विवरण
पोस्टमार्टम     90% से अधिक लंबित     प्रदेश के सभी जिलों में पोस्टमार्टम के मामले बड़ी संख्या में रुक गए।
सर्जरी     95% रद्द     पूरे प्रदेश में नियोजित (Planned) सर्जरी को स्थगित करना पड़ा।
एमएलसी (MLC)     98% बाधित     सरकारी डॉक्टर के हस्ताक्षर अनिवार्य होने के कारण यह सेवा लगभग पूरी तरह ठप रही।

मेडिकल प्रमाण पत्र भी रुके
प्रदेशभर में चिकित्सकों की दो दिन की हड़ताल का असर मेडिकल प्रमाण पत्र जारी होने पर भी पड़ा। भिवानी के पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कालेज और जिला नागरिक अस्पताल में जूनियर रेजिडेंट व एनएचएम चिकित्सकों ने केवल सीमित ओपीडी सेवाएं संभालीं, जबकि मेडिकल प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए। जिले में प्रतिदिन औसतन 30 से अधिक लोग मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने आते हैं, जबकि राज्य स्तर पर यह संख्या 500 से 600 तक है। प्रमाण पत्र न बनने से कई सरकारी नौकरियों के अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन में अड़चन आई। इन दिनों आईटीआई, पालिटेक्निक प्रशिक्षुओं के अलावा पुलिस, होमगार्ड व अन्य सुरक्षा इकाइयों में भर्ती प्रक्रिया में इसकी जरूरत पड़ रही है।

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