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संभल के 68 तीर्थ स्थलों पर पहली बार होली मनाने की तैयारी, धारा 163 लागू

UB News Network
Last updated: मार्च 3, 2026 11:13 पूर्वाह्न
By : UB News Network
Published on : 1 महीना पहले
संभल के 68 तीर्थ स्थलों पर पहली बार होली मनाने की तैयारी, धारा 163 लागू
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 संभल 
संभल में इस बार होली सिर्फ मोहल्लों और चौपालों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन 68 तीर्थों तक पहुंचेगी जिन्हें हाल में खोजे जाने और पुनर्जीवन की प्रक्रिया से जोड़ा गया है. सामाजिक संगठनों का दावा है कि पहली बार इन सभी तीर्थ स्थलों पर एक साथ रंगोत्सव मनाया जाएगा. तैयारियां ऐसी हैं कि शहर का हर कोना उत्सव की आहट से गूंज रहा है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा का अभेद्य घेरा भी बुना गया है | 

तीर्थों पर रंगोत्सव, परंपरा का नया अध्याय

नगर हिंदू सभा, तीर्थ परिक्रमा समिति और विभिन्न मंदिर समितियों ने संयुक्त रूप से 68 तीर्थों और 19 कूपों पर दीप प्रज्वलन व गुलाल उत्सव की रूपरेखा बनाई है. आयोजकों का कहना है कि जिस तरह मथुरा और वृंदावन में होली का रंग कई दिनों तक छाया रहता है, उसी तरह संभल में भी इस बार उत्सव का विस्तार होगा. राधा-कृष्ण मंदिरों से लेकर प्राचीन कुंडों तक, हर स्थान पर सुबह पूजा-अर्चना, दोपहर में गुलाल अर्पण और शाम को दीपोत्सव की योजना है. कई स्थानों पर बच्चों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम और भजन-संध्या भी प्रस्तावित है. मंदिरों के पुजारियों का कहना है कि तीर्थों के जागरण की खुशी को सामूहिक रंगोत्सव के जरिए साझा किया जाएगा | 

जिला तीन सेक्टर में बांटा गया 

जिला प्रशासन के मुताबिक, पूरे जिले में 64 जुलूसों की अनुमति दी गई है. बेहतर प्रबंधन के लिए जिले को तीन सेक्टर में बांटा गया है. 17 थानों पर मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं, जबकि 27 क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) चौबीसों घंटे अलर्ट रहेंगी | 
जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया के अनुसार, सभी आयोजकों के साथ अमन कमेटी की बैठकों में रूट, समय-सारिणी और आचार-संहिता तय कर दी गई है. जुलूस बॉक्स फॉर्मेट में निकलेंगे. आगे-पीछे और दोनों किनारों पर पुलिस बल की मौजूदगी रहेगी, ताकि किसी तरह की अफवाह या उकसावे की गुंजाइश न बचे| 

संवेदनशील पृष्ठभूमि और सुरक्षा का अभेद्य घेरा

ईरान और इजराइल अमेरिका युद्ध में खामेनेई  की मौत के बाद संभल के कुछ हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन हुआ. ऐसे में प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए धारा 163 लागू की है. पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई का कहना है कि एक हजार से अधिक संभावित उपद्रवियों को पाबंद किया गया है. तीन कंपनी और दो प्लाटून पीएसी, रैपिड रिएक्शन फोर्स, 200 से अधिक रंगरूट और कई वरिष्ठ अधिकारी एएसपी, सीओ, एडीएम, एसडीएम मैदान में रहेंगे. जुलूस मार्गों और प्रमुख चौराहों पर 250 से अधिक सीसीटीवी कैमरे सक्रिय हैं, जिनकी मॉनिटरिंग इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से होगी. ड्रोन कैमरे छतों और भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखेंगे. विशेष ध्यान उन मार्गों पर है जहां से चौपाई जुलूस संवेदनशील इलाकों और जामा मस्जिद के सामने से गुजरेंगे. प्रशासन का कहना है कि सभी पक्षों से संवाद कायम है और उद्देश्य सिर्फ शांतिपूर्ण, गरिमामय उत्सव सुनिश्चित करना है| 

रंगों की फैक्ट्री से 12 राज्यों तक सप्लाई

संभल की एक प्रमुख कलर कंपनी ने इस बार बड़े पैमाने पर गुलाल तैयार किया है. मालिक हर्ष गुप्ता बताते हैं कि चंदन, गुलाब, केवड़ा और चॉकलेट-मिंट खुशबू वाले रंगों की खास मांग रही. बच्चों के लिए स्किन-फ्रेंडली और नॉन-टॉक्सिक गुलाल तैयार किया गया है, जो मक्का के आटे और फूड-ग्रेड रंगों से बना है. कंपनी का दावा है कि यूपी के अलावा 10–12 राज्यों में सप्लाई की गई है. अयोध्या, काशी और मथुरा में विशेष मांग आई है. स्थानीय बाजारों में भगवा, गुलाबी, हरा और फिरोजी रंगों की बहार है. पहली बार गुलाल पिचकारी भी उतारी गई है, जिससे सूखे रंगों का प्रयोग बढ़े| 

आयोजकों का कहना है कि 68 तीर्थों पर रंगोत्सव सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्स्मरण का अवसर है. कई स्थानों पर सुबह शंखनाद, दोपहर में सामूहिक आरती और शाम को दीपदान होगा. मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में भी सीसीटीवी निगरानी और पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी के साथ कार्यक्रम तय हैं. प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि सभी जुलूसों के लिए समय-सीमा निर्धारित है, डीजे की ध्वनि-सीमा तय है और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग भी बढ़ाई गई है. अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है | 

पुलिस अधीक्षक ने साफ कहा कि होली आपसी भाईचारे का पर्व है. किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें, संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत सूचना दें. अमन कमेटियों ने भी अपील की है कि जुलूस तय रूट और समय पर ही निकलें. संभल इस बार दोहरी परीक्षा से गुजर रहा है एक ओर तीर्थों पर पहली बार सामूहिक रंगोत्सव का रोमांच, दूसरी ओर संवेदनशील पृष्ठभूमि में शांति बनाए रखने की चुनौती. तैयारियों की बारीकी बताती है कि प्रशासन और आयोजक दोनों इसे प्रतिष्ठा का सवाल मान रहे हैं | 

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