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Pongal Date Confusion: 13 या 14 जनवरी, जानें सही तारीख एक क्लिक में

UB News Network
Last updated: जनवरी 13, 2026 11:43 पूर्वाह्न
By : UB News Network
Published on : 3 महीना पहले
Pongal Date Confusion: 13 या 14 जनवरी, जानें सही तारीख एक क्लिक में
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दक्षिण भारत का सबसे बड़ा और उत्साहपूर्ण त्योहार पोंगल दस्तक देने वाला है. सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व मुख्य रूप से प्रकृति और किसानों को समर्पित है. अक्सर लोगों के मन में तारीख को लेकर उलझन रहती है कि पोंगल 13 जनवरी को है या 14 जनवरी को.आइए, जानते हैं पोंगल की सही तिथि और उसके चार दिनों के महत्व के बारे में.

कब मनाया जाएगा पोंगल?

पंचांग के अनुसार, साल 2026 में पोंगल पर्व 14 जनवरी से 17 जनवरी 2026 तक मनाया जाएगा. इस दौरान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का क्षण यानी संक्रांति शाम 5 बजकर 43 मिनट पर रहेगा, जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है. आमतौर पर उत्तर भारत में जब मकर संक्रांति मनाई जाती है, उसी समय दक्षिण भारत में पोंगल की धूम रहती है.

पोंगल का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

पोंगल शब्द का अर्थ होता है उबालना या लहराना. पारंपरिक रूप से, नए कटे हुए चावलों को दूध में उबालकर भगवान सूर्य को अर्पित किया जाता है.

कृतज्ञता का पर्व: यह त्योहार प्रकृति, सूर्य देव और मवेशियों (गाय-बैल) के प्रति आभार व्यक्त करने का जरिया है, क्योंकि इनकी मदद से ही किसानों को अच्छी फसल प्राप्त होती है.

समृद्धि का प्रतीक: माना जाता है कि पोंगल के दिन घर में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है. यह तमिल कैलेंडर के थाई महीने की शुरुआत भी है, जिसके बारे में कहावत है, थाई पिरंधाल वज़ी पिरक्कुम यानी थाई महीने की शुरुआत के साथ ही नए रास्ते खुलेंगे.

4 दिन तक चलने वाला उत्सव: क्या-क्या होता है?

पोंगल का त्योहार चार दिनों तक चलता है, और हर दिन की अपनी एक विशेष कहानी और परंपरा है.

पहला दिन: भोगी पोंगल (14 जनवरी)

यह दिन देवराज इंद्र को समर्पित है. इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और पुराने, बेकार सामान को घर से बाहर निकाल कर जला देते हैं. यह बुराई के अंत और नई शुरुआत का प्रतीक है.

दूसरा दिन: सूर्य पोंगल (15 जनवरी)

यह पोंगल का सबसे मुख्य दिन है. इस दिन आंगन में नए मिट्टी के बर्तन में नए चावल, दूध और गुड़ डालकर पोंगल बनाया जाता है. जब बर्तन से उबलकर चावल बाहर गिरने लगता है, तो लोग खुशी से पोंगल-ओ-पोंगल का उद्घोष करते हैं. यह भोग सूर्य देव को लगाया जाता है.

तीसरा दिन: मट्टू पोंगल (16 जनवरी)

यह दिन खेती में काम आने वाले मवेशियों, खासकर बैलों और गायों के लिए होता है. उन्हें नहलाया जाता है, उनके सींगों को रंगा जाता है और उन्हें माला पहनाकर उनकी पूजा की जाती है. तमिलनाडु का प्रसिद्ध खेल जल्लीकट्टू भी इसी दिन आयोजित होता है.

चौथा दिन: कानून पोंगल (17 जनवरी)

उत्सव के आखिरी दिन परिवार के सभी लोग एक साथ मिलते हैं. महिलाएं अपने भाइयों और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए पूजा करती हैं. लोग एक-दूसरे के घर जाकर मिठाइयां बांटते हैं और खुशियां मनाते हैं.

TAGGED:Pongal 2026
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