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समुचित वित्तीय प्रबंधन के लिए हमारी सरकार दृढ़ संकल्पित : वित्त मंत्री ओपी चौधर

UB News Network
Last updated: मार्च 12, 2026 11:04 पूर्वाह्न
By : UB News Network
Published on : 1 महीना पहले
समुचित वित्तीय प्रबंधन के लिए हमारी सरकार दृढ़ संकल्पित :  वित्त मंत्री  ओपी चौधर
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वित्त मंत्री  ओपी चौधरी के विभागों के लिए 11 हजार 470 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित

समुचित वित्तीय प्रबंधन के लिए हमारी सरकार दृढ़ संकल्पित :  वित्त मंत्री  ओपी चौधरी

जीएसटी 2.0 से आम जनता को राहत, कर राजस्व में भी रिकॉर्ड वृद्धि

पंजीयन विभाग में बड़े सुधार, रजिस्ट्री प्रक्रिया हुई सरल और पारदर्शी 

रायपुर
 छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वित्त मंत्री  ओपी चौधरी के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु 11 हजार 470 करोड़ 62 लाख 50 हजार रुपए की अनुदान मांगें पारित कर दी गईं। इनमें वित्त विभाग के लिए 9 हजार 630 करोड़ 30 लाख 20 हजार रुपए, आवास एवं पर्यावरण विभाग के लिए 01 हजार 247 करोड़ रुपए, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के लिए 82 करोड़ 49 लाख 60 हजार रुपए तथा वाणिज्यिक कर विभाग के लिए 510 करोड़ 82 लाख 70 हजार रुपए शामिल हैं।

अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता, तकनीकी सुधार और समावेशी विकास के माध्यम से राज्य को मजबूत आर्थिक आधार देना है। 

आवास, पर्यावरण और नवा रायपुर के विकास पर सरकार का फोकस

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में आवास एवं पर्यावरण विभाग की मांगों पर चर्चा के दौरान मंत्री  ओपी चौधरी ने विभागीय उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज के विकास की मजबूत नींव सुरक्षित और सम्मानजनक आवास पर टिकी होती है, इसलिए राज्य सरकार नागरिकों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के समय गृह निर्माण मंडल की 442 करोड़ रुपये की 3219 संपत्तियां लंबे समय से अविक्रित थीं और मंडल पर शासकीय कॉलोनी निर्माण के लिए 735 करोड़ रुपये का ऋण था। राज्य शासन ने ऋण के एकमुश्त भुगतान के लिए बजट में व्यवस्था कर मंडल की वित्तीय स्थिति में सुधार किया।

मंत्री  चौधरी ने कहा कि लंबे समय से अविक्रित संपत्तियों के विक्रय के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू की गई है। इसके तहत अब तक 1410 संपत्तियों का लगभग 210 करोड़ रुपये में विक्रय किया जा चुका है। भविष्य की परियोजनाओं के लिए मंडल ने मांग आधारित निर्माण प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत पर्याप्त बुकिंग मिलने के बाद ही नए आवासों का निर्माण शुरू किया जाएगा।

मंत्री  चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का उद्देश्य केवल मकान बनाना नहीं है, बल्कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, सम्मानजनक और सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराना है। मंडल द्वारा बेहतर वित्तीय स्थिति में आने उपरांत प्रदेश भर में नवीन प्रोजेक्ट प्रारंभ किए गए हैं। उन्होंने कहा कि मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि विगत दो वर्षों में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मण्डल द्वारा प्रदेश के 33 में से 27 जिलों में 3069 करोड़ के 78 नवीन प्रोजेक्ट की लॉचिंग  की गई है जिसके अंतर्गत 16782 नवीन प्रापर्टी निर्माण का लक्ष्य है। जल्द ही मंडल द्वारा शेष जिलों में भी नवीन प्रोजेक्ट प्रारंभ किया जावेगा। मंडल के इस प्रयास को जनता का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। बुकिंग प्रारंभ करने के लिए  राज्य स्तरीय आवास मेला का आयोजन नवम्बर 2025 में किया गया, जिस दौरान 305 करोड़ की 1477 संपत्ति की बुकिंग केवल तीन दिनों में प्राप्त हुई।

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए प्रयासों की जानकारी देते हुए मंत्री  ओपी चौधरी ने बताया कि विगत दोे वर्ष में पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। परिवहन के दौरान कच्चे माल, फ्लाई ऐश एवं अन्य ठोस अपशिष्ट के उड़ने एवं गिरने से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिये छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया (एस.ओ.पी.) जारी किया गया है, जिसमें फ्लाई ऐश के समुचित प्रकार से ढककर परिवहन किये जाने का प्रावधान है। उक्त एस.ओ.पी. 01 अगस्त 2024 से प्रभावशील है। एस.ओ.पी. के उल्लंघन की लगातार मानिटरिंग की जा रही है तथा उल्लंघन की स्थिति में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की जाती है। 

उद्योगों द्वारा जनित फ्लाई ऐश के निष्पादन के मानिटरिंग हेतु जी.पी.एस. तथा जियोटैगिंग के साथ फ्लाई ऐश के परिवहन/भू-भराव की मानिटरिंग हेतु इण्डस्ट्रीयल वेस्ट मैनेजमेंट एण्ड मानिटरिंग सिस्टम (आई.डब्ल्यू.एम.एम.एस.) विकसित किया गया है। आई.डब्ल्यू.एम.एम.एस. प्रारंभ होने के पश्चात् प्रदेश में कुल 1 लाख 44 हजार 291 ट्रीप की गई है।

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा राज्य में स्थापित होने वाले उत्सर्जन और प्रदूषण की रियल-टाईम निगरानी करना और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से CG Nigrani  पोर्टल विकसित किया गया है। इस पोर्टल पर कुल 124 उद्योगों को इस सिस्टम से जोड़ा गया है। इन उद्योगों में IoT आधारित डिवाइस लगाये गये हैं, जो Continuous Emission Monitoring System (CEMS), Effluent Quality Monitoring Systems और Continuous Ambient Air Quality Monitoring System  के माध्यम से डेटा एकत्रित करते हैं। यह सिस्टम 17 प्रकार के अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों में स्थापित किया गया है।

मंत्री  चौधरी ने कहा कि CG Nigrani  सिस्टम की मदद से उद्योगों के उत्सर्जन और प्रदूषण के स्तर की लगातार ऑनलाईन निगरानी प्रारंभ की गई है। यदि किसी उद्योग का उत्सर्जन निर्धारित अनुमेय सीमा (Permissible Limit) से अधिक हो जाता है तो यह सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करता है। इसके अलावा यदि प्रदूषण मानकों का उल्लंघन होता है तो इस सिस्टम के माध्यम से उद्योगों को नोटिस जारी किया जाता है। उन्होंने कहा कि हमारा राज्य केवल आधुनिक विकास की दिशा में ही नहीं बढ़ रहा है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के माध्यम से सिरपुर क्षेत्र के विकास के लिए लगभग 36 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि नवा रायपुर में HNLU, IIIT, IIM, जैसे प्रतिष्ठित संस्थान संचालित हो रहे हैं। हमने यह प्रयास किया कि नवा रायपुर को न केवल राज्य का बल्कि देश के शैक्षणिक केन्द्र के रूप में विकसित किया जाये। यह बताते हुए मुझे गर्व हो रहा है कि NIFT] NIELIT] NFSU  जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों की स्थापना भी नवा रायपुर में होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि नरसी मोनजी प्रबंधन अध्ययन संस्थान (NMIMS) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो चुका है और बहुत शीघ्र इसके कार्य प्रारंभ हो जायेंगे। इस तरह के संस्थान आने से न केवल राज्य के छात्रों को लाभ मिलेगा बल्कि पूरे देश में नवा रायपुर शैक्षणिक केन्द्र के रूप में अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज करायेगा।

मंत्री  चौधरी ने कहा कि हमने अपने संकल्प पत्र में राज्य राजधानी क्षेत्र स्थापित करने का उल्लेख किया था। यह हमारे लिये हर्ष और गर्व दोनों का विषय है कि हमने राज्य राजधानी क्षेत्र अधिनियम बनाकर इस सदन के माध्यम से उसे पारित कराया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ राज्य राजधानी क्षेत्र का गठन भी हो चुका है। जिसका आज विधानसभा में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पहली बैठक हुई है। 

वाणिज्यिक कर (जी.एस.टी) विभाग

छत्तीसगढ़ विधानसभा में वाणिज्यिक कर (जीएसटी) विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से जीएसटी 2.0 लागू कर, कर की दरों  का युक्तियुक्तकरण किया गया है। 

मंत्री  चौधरी ने बताया कि जीएसटी राजस्व संग्रह के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य के जीएसटी राजस्व में 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर रहा। उन्होंने बताया कि व्यापार को सुगम बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। 1 अप्रैल 2025 से पेट्रोल पर 1 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। वहीं राज्य में आंतरिक ई-वे बिल की सीमा 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है, जिससे लगभग 26 प्रतिशत व्यापारियों को लाभ होगा और अनुपालन लागत में करीब 54 प्रतिशत की कमी आएगी।

मंत्री  चौधरी ने बताया कि करदाताओं की सुविधा के लिए राज्य के सभी 33 जिलों में जीएसटी कार्यालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें 6 नए क्षेत्रीय कार्यालय और 3 नई सर्किल शाखाएं शामिल हैं। इसके अलावा व्यापारियों को जीएसटी संबंधी मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करने के लिए राज्य स्तरीय जीएसटी कॉल सेंटर भी स्थापित किया गया है।

मंत्री  ओपी चौधरी ने कहा कि जीएसटी के आठ वर्ष पूरे होने पर सरकार ने जीएसटी 2.0 के रूप में व्यापक कर सुधार लागू किए हैं, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिली है। खाने-पीने की वस्तुओं पर जीएसटी शून्य कर दिया गया है, कपड़ों पर टैक्स 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है और सीमेंट पर जीएसटी 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे 1000 वर्गफुट का घर बनाने पर लगभग 1.5 लाख रुपये की बचत हो रही है। इसके अलावा मोटरसाइकिल, कार, फ्रिज, टीवी और एसी जैसे उपभोक्ता उत्पादों पर भी जीएसटी 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई है। इससे मोटरसाइकिल पर 8 से 12 हजार रुपये, छोटी कार पर 60 हजार से 1 लाख रुपये और टीवी-एसी पर 3 हजार से 25 हजार रुपये तक की बचत संभव हुई है।

मंत्री  चौधरी ने बताया कि दैनिक उपयोग की वस्तुओं जैसे टूथपेस्ट, साबुन, साइकिल, रसोई गैस, डिटरजेंट और बर्तनों पर टैक्स घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे एक मध्यमवर्गीय परिवार को सालाना 25 से 40 हजार रुपये तक की बचत हो रही है।  कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ को ध्यान में रखते हुए किसानों के लिए भी राहत दी गई है। ट्रैक्टर पर करीब 1.20 लाख रुपये और हार्वेस्टर पर लगभग 1.90 लाख रुपये की राहत दी गई है, वहीं कृषि उपकरण, खाद और बीजों पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। 
मंत्री  चौधरी ने कहा कि जीएसटी 2.0 का उद्देश्य केवल कर व्यवस्था को सरल बनाना नहीं है, बल्कि आम जनता के खर्च को कम करना, किसानों और कारीगरों को सशक्त बनाना और छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास को नई गति देना है।

पंजीयन विभाग में बड़े सुधार, रजिस्ट्री प्रक्रिया हुई सरल और पारदर्शी: वित्त मंत्री ओपी चौधरी

छत्तीसगढ़ विधानसभा में पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग की मांगों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि पंजीयन विभाग राज्य का तीसरा सबसे बड़ा राजस्व अर्जक विभाग है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक यह विभाग जटिल प्रक्रियाओं, पुरानी व्यवस्थाओं और तकनीकी पिछड़ेपन से प्रभावित रहा, जिसके कारण आम नागरिकों को रजिस्ट्री कराने के लिए कई कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे और बिचौलियों की भूमिका बढ़ जाती थी। कई स्थानों पर रजिस्ट्री कार्यालयों में नागरिकों के बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा कि नागरिक सुविधा के लिए रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे जिलों में रजिस्ट्री कार्यालयों की संख्या बढ़ाई गई है। साथ ही वीजा सेंटर की तर्ज पर 10 स्मार्ट रजिस्ट्री ऑफिस स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें नवा रायपुर, तिल्दा और रायगढ़ में कार्यालय प्रारंभ हो चुके हैं। आम जनता को राहत देने के लिए पारिवारिक दान पत्र, हकत्याग पत्र और बंटवारा नामे में पंजीयन शुल्क घटाकर मात्र 500 रुपये कर दिया गया है। साथ ही गाइडलाइन दर से अधिक मूल्य पर सौदा होने की स्थिति में अतिरिक्त पंजीयन शुल्क समाप्त किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि सुधार की प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी और पारदर्शिता, प्रौद्योगिकी तथा जनसुविधा के माध्यम से छत्तीसगढ़ को सुशासन का आदर्श राज्य बनाने का लक्ष्य है।

वित्त विभाग

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में वित्त विभाग की अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है। 

राज्य के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखते हुए “छत्तीसगढ़ ग्रोथ एंड स्टेबिलिटी फंड” का गठन किया गया है। इस फंड में वर्तमान में 50 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है तथा आगामी वर्ष के लिए 250 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में संचित शोधन निधि का आकार 8 हजार 875 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जो कुल अवशेष ऋणों का लगभग 7 प्रतिशत है। इसी तरह राज्य सरकार की गारंटी वाले ऋणों की देनदारियों के प्रबंधन के लिए गारंटी मोचन निधि में अब तक 1 हजार 32 करोड़ रुपये निवेशित किए गए हैं तथा बजट में 125 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है।

वित्त मंत्री ने बताया कि विभाग के बजट में मुख्य रूप से शासकीय सेवकों को पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान के लिए प्रावधान किया गया है। इसमें पेंशन, परिवार पेंशन, पेंशन कम्यूटेशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण और एनपीएस में नियोक्ता अंशदान शामिल हैं।

वित्त मंत्री ने बताया कि भविष्य के पेंशन दायित्वों के बेहतर प्रबंधन के लिए राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ पेंशन निधि अधिनियम 2025 लागू कर पेंशन फंड की स्थापना की है। वर्तमान में इस निधि में 1 हजार 121 करोड़ रुपये निवेशित हैं और आगामी वर्ष के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। अंत में वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सकारात्मक सोच के साथ हर क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य किया जा रहा है।

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