कोरोना वायरस और इसकी असलियत, सामने आये दस्तावेज यह साबित करते है कि यह चीनी बायो वार की शुरुआत

चीन एक बार फिर कोरोना वायरस को लेकर संदेह में नज़र आ रहा है। ऐसे संकेत मिल रहे है कि विस्तारवादी नीति सोच को रखने वाले चीन ने इससे एक जैविक हथियार के रूप में उसे करने की योजना बनाई थी।

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चीन का चरित्र लंबे वक्त से संदेह का विषय रहा है। दुनिया भर में चीन का नाम पीठ पर वार करने और धोखा देकर दूसरों को नीचा दिखाने के लिएजाना जाता है। अब कुछ ऐसा ही मामला चीनी वूहान वायरस कोविड 19 ( कोविड-19) से जुड़ा हुआ सामने आया है। जब चीनी वैज्ञानिकों के एकपुराने दस्तावेज ने ऐसा ही खुलासा किया है।

चीन के सैन्य विज्ञान से जुड़े हुए दस्तावेज मिले – 

हाल में ही अमेरिका के विदेश मंत्रालय को बेहद गोपनीय तरीके से चीन के सैन्य विशेषज्ञ और वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों के गुप्त दस्तावेज हाँथ लगेहै जिसमें यह खुलासा हुआ है कि चीन की सरकार लंबे वक्त से अपनी चीनी सेना को देने के लिए एक जैविक हथियार तैयार करने में जुटी थी।

दस्तावेजों के अनुसार चीनी वैज्ञानिक लंबे वक्त से ऐसे घातक जैविक हथियार की खोज कर रहे थे जो किसी देश को एक ही झटके में घुटनों पर लासकता था। दरअसल अत्यधिक महत्वकांक्षी चीन और उसकी सेना को लगता है कि अब आने वाला संभावित तीसरा विश्वयुद्ध केवल जैविक हथियारोंकी मदद से ही लड़ा जाएगा।

वूहान लैब रही खोज का मुख्य केंद्र: 

दरअसल अमेरिका के विदेश मंत्रालय इस बात पर जोर देते हुए जानकारी दी है कि ऐसी खोज के लिए चीन की वूहान लैब को मुख्य केंद्र बनाया गयाथा जिसमें ऐसे किसी जैविक हथियार की खोज लगातार चल रही थी जो दुश्मन देश को या देशों के समूह को बेहद कमजोर कर दे। यहीं आपकोबताते चले कि कोविड 19 का पहला संक्रमण केस भी वुहान लैब से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मीट बाजार में पाया गया था।

दुनिया हो सकती है एकजुट: 

हालांकि इस मामले पर आस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देश पहले ही इस मामले पर बड़ी साजिश होने की आशंका को जता चुके है। हालांकिवैज्ञानिकों का एक समूह इसे बनाया हुआ वायरस नहीं मान रहा लेकिन जो इसे मानव रचित वायरस मान रहे है उनके भी बड़े और मजबूत तर्क है।वैज्ञानिकों ने दलील दी है कि अगर यह वायरस चमगादड़ से आया है तो इसे मानवों तक पहुंचने में एक लंबा अर्सा लगता लेकिन जिस प्रकार से इसकीस्पाइक पर प्रोटीन स्पाइक स्थापित किये गए है। वह सामान्य नहीं है। क्योंकि चमगादड़ के शरीर मे मिलने वाले वायरस में स्पाइक प्रोटीन नहीं होता। जो इस बात को साफ साफ तरीके से सिद्ध करतेहै कि यह वायरस लैब में ही तैयार किया गया है। जो भूलवश लोगों मे फैल गया और दुनिया भर में कोहराम मचा।

जो भी हो इन दस्तावेजों के मिलने के बाद अब दुनिया भर में लामबंदी हो सकती है। सम्भवता यह भी हो सकता है कि निकट भविष्य में आने वालेमहायुद्ध इसी बात को लड़े जाएं। हालांकि अगर यह बात सत्य निकलती है तो जाहिर सी बात है कि चीन को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

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