बांग्लादेश में हिंदू

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सिद्धार्थ शंकर-

भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश के सबसे बड़े धार्मिक अल्पसंख्यक हिंदू हैं। उनकी आबादी करीब पौने दो करोड़ है जो देश की आबादी के नौ फीसदी के करीब है। हाल में दुर्गा पूजा के दौरान कट्टरपंथियों ने देश के कई इलाकों में हिंदुओं और उनके मंदिरों को निशाना बनाया। यह इतना सुनियोजितपूर्ण था कि पुलिस भी इन पर काबू नहीं पा सकी। इन सबके बीच बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने धार्मिक हिंसा रोकने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई का भरोसा तो दिया, लेकिन अप्रत्याशित रूप से भारत को नसीहत भी दे डाली कि वहां ऐसी कोई घटना नहीं होनी चाहिए जिससे बांग्लादेश में रहने वाले हिंदू प्रभावित हों। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को समावेशी विचारों के लिए पहचाना जाता है और प्रधानमंत्री स्वयं बांग्लादेश की स्थापना में भारत के योगदान की प्रशंसा करती रही हैं। लेकिन दुर्गा पूजा पर उनकी नियंत्रण और संतुलन की भाषा वहां पर रहने वाले हिंदू अल्पसंख्यकों की चिंता बढ़ाने वाली है। बांग्लादेश का नोआखाली इलाका धार्मिक हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। यह वही क्षेत्र है जहां आजादी के समय भीषण सांप्रदायिक दंगे हुए थे और महात्मा गांधी ने प्रभावितों के बीच जाकर इसे रोकने में सफलता हासिल की थी। इस समय भी हिंदुओं के लिए हालात वहां काफी खराब हैं लेकिन सरकार के नुमाइंदों की नजर 2023 में होने वाले आम चुनाव पर है। जाहिर है, अवामी लीग कट्टरपंथी ताकतों के आगे बेबस महसूस कर रही है। इससे बांग्लादेश में अस्थिरता बढ़ सकती है। दुर्गा पूजा पर देश भर में हुए हमलों में भारत विरोधी नारे लगाए गए। यह भारत के लिए भी सुरक्षा चुनौती को बढ़ा सकता है। मालूम हो कि भारत और बांग्लादेश के बीच करीब चार हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी सीमा है जो असम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, मेघालय और मिजोरम को छूती है। बांग्लादेश और भारत सीमा के बीच पूर्वोत्तर की भौगोलिक परिस्थितियां घुसपैठ के अनुकूल हैं और फायदा उठा कर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पूर्वोत्तर के रास्ते भारत में आतंकवादियों को घुसाती रही है। डेढ़ दशक पहले भारत के गृह मंत्रालय ने एक दस्तावेज तैयार किया था, जिसका शीर्षक था-पाकिस्तान के वैकल्पिक परोक्ष युद्ध का आधार। इसमें पाकिस्तान द्वारा विध्वंसक गतिविधियों को तेज करने के लिए चलाए गए नए अभियान के बारे में उल्लेख था। इस दस्तावेज में खासतौर पर बताया गया था कि पाक भारत विरोधी अभियानों के लिए बांग्लादेश को एक नए ठिकाने के रूप में विकसित कर रहा है। दस्तावेज में इस बात का भी खुलासा था कि पाकिस्तान ने लगभग दो सौ आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों को पहले ही अपने यहां से हटा कर बांग्लादेश में व्यवस्थित करवा चुका है। 1971 में पाक से अलग होकर अस्तित्व में आया बांग्लादेश लंबे समय से राजनीतिक अव्यवस्थाओं से जूझता रहा है। साथ ही इस मुल्क में राष्ट्रीय सांस्कृतिक पहचान का संकट गहराया है। हिंदू वहां रहना चाहते हैं लेकिन उनकी सुरक्षा चिंताओं को जनसंख्या असंतुलन से समझा जा सकता है। 1971 में बांग्लादेश के जन्म के समय हिंदुओं की आबादी बीस फीसद से भी ज्यादा थी, जो अब घट कर महज नौ फीसद तक रह गई है। इसके पीछे बड़ा कारण इस्लामिक कट्टरतावाद को माना जाता है। पिछले कुछ दशकों से बांग्लादेश में इस्लाम के कट्टरपंथी वहाबी रूप का चलन तेजी से बढ़ा है जो जिहादी आतंकवाद को बढ़ावा देता है। बांग्लादेश के कौमी मदरसे जो एक लाख से ऊपर हैं, वे सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं। इन मदरसों को पाकिस्तान व सऊदी अरब से वित्तीय मदद मिलती रही है। इसमें ईशनिंदा को आधार बना कर कट्टरपंथी तत्व अल्पसंख्यकों के खिलाफ दुष्प्रचार करते रहे हैं। इसमें बांग्लादेश का एक प्रतिबंधित राजनीतिक दल जमात-ए-इस्लामी प्रमुख है। जमात देश की सबसे बड़ी इस्लामी राजनीतिक पार्टी है। 1971 के स्वतंत्रता युद्ध में इस दल ने पाकिस्तान का समर्थन किया था। बाद में यह बांग्लादेश के इस्लामीकरण के प्रयास में जुट गया। जमात-ए-इस्लामी वही संगठन है जिसने तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा किए जाने के बाद ‘बांग्लादेश बनेगा अफगानिस्तानÓ जैसे नारे तक गढ़ डाले।

जमात बांग्लादेश को इस्लाम के कट्टर गढ़ के रूप में स्थापित करना चाहता है। इसीलिए वह युवाओं को कट्टरपंथी बना रहा है। बांग्लादेश में राजनीति शेख हसीना और खालिदा जिया के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है। खालिदा जिया को जहां कट्टरपंथी ताकतों का समर्थक माना जाता है, वहीं शेख हसीना उदार और भारत समर्थक मानी जाती हैं। राजनीतिक अस्थिरता से लगातार जूझने वाले देश शेख हसीना का 13 साल का शासन अल्पसंख्यकों सहित सभी नागरिकों के लिए वरदान साबित हुआ है। दुनिया के कई देशों में पिछले एक दशक से दक्षिणपंथी सरकारें जहां अति राष्ट्रवाद को बढ़ावा देकर धार्मिक भेदभाव को बढ़ा रही हैं, वहीं शेख हसीना के कार्यकाल में धर्म निरपेक्ष मूल्यों को लेकर बांग्लादेश लगातार आगे बढ़ रहा है।

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