कश्मीर में हिंसा

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सिद्वार्थ शंकर-

जम्मू के पुंछ जिले में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ में सेना के चार जवान और एक जेसीओ के जवान शहीद हो गए। सेना ने जवानों की शहादत का बदला लेते हुए तीन आतंकियों को मार गिराया। हालांकि, खतरा अब भी बना हुआ है। घाटी में आतंकी सक्रिय हैं। सिर्फ घाटी ही नहीं, दिल्ली तक में उनका जाल फैला है। राजधानी में पुलिस ने एक आतंकी को गिरफ्तार किया है। दिल्ली में आतंकी का पकड़ा जाना नया नहीं है। अब तक कई बार भारी विस्फोटक और हथियार के साथ आतंकी पकड़े गए हैं। कश्मीर से लेकर दिल्ली तक आतंकियों की मौजूदगी बड़े खतरे की ओर इशारा कर रही है। हमारे सुरक्षा बल मुस्तैद हैं, इसलिए अब तक बड़ी घटना सामने नहीं आई है। फिर भी अचानक से आतंकी गतिविधियों में आई तेजी चिंता बढ़ाने वाली तो है ही। पुंछ जिले में सोमवार को जिस तरह की मुठभेड़ देखने को मिली उससे इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि ये आतंकी बेहतर प्रशिक्षित हैं। सुरक्षाबलों को यहां से तलाशी में अभी बड़ी संख्या में हथियार, नकद और आतंकियों के कपड़े, राशन-पानी जैसे अहम सबूत मिले हंै। यह देखा गया है कि आतंकी संगठनों इस फिराक में होते हैं कि सर्दियों से पहले अपने लोगों की जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करा दी जाए। क्योंकि ठंढ़ और बर्फबारी बढऩे से पास और पहाड़ी रास्तों के बंद हो जाने से घुसपैठ की उनकी कोशिश नाकाम होने लगती है। विशेषज्ञों की राय में आतंकी घटनाओं को लेकर ‘हॉट विंटरÓ आने वाला है क्योंकि आतंकी दस्ते तैयार हो रहे हैं। इस तरह की कई घटनाएं अभी भारी चुनौती पैदा करने वाली है। उड़ी सेक्टर में पकड़े गए पाक आतंकी अली बाबर ने लश्कर और आईएसआई की इन साजिशों का राजफाश भी किया था। सवाल अचानक से बढ़ी हिंसा का भी है। पहले पिछले कुछ महीनों से लगातार आम लोग आतंकियों के निशाने पर हैं, उनकी हत्या की जा रही हैं। ऐसे सवाल में उठ रहा है कि अचानक पिछले एक महीने के दौरान कश्मीर और एलओसी पर आतंक कैसे और क्यों बढ़ रहा है? इसकी दो वजह बताई जा रही है। पहली-अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद पाकिस्तान में बैठे आतंकियों की हिम्मत बढ़ी हुई है। उनका मानना है कि जब वो सुपर अमेरिका को हरा सकते हैं तो कश्मीर भारतीय सुरक्षा बलों को भी मात दी जा सकती है। दूसरी-घाटी में पिछले कई सालों यह ट्रेंड रहा कि सर्दी आने से आतंकी घटनाएं और घुसपैठ दोनों बढ़ जाती है, क्योंकि एक महीने बाद बर्फबारी के चलते सीमा पार से आना बेहद मुश्किल हो जाता है। एक तरफ माहौल बन रहा है कि आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से जम्मू कश्मीर में आतंकी घटनाओं में कमी आई है, पत्थरबाजी की घटनाएं कम हुई हैं, आतंकियों की संख्या भी कम हुई है। दूसरी तरफ तालिबान के आने के बाद से आतंकियों का मनोबल बढ़ा हुआ है। पाकिस्तान की आर्मी और आईएसआई को लग रहा है कि उन्होंने दुनिया फतह कर ली है। आने वाले दिनों में आतंकी घटनाएं और बढऩे का अनुमान है। आईएसआई की कोशिश होगी कि अफगानिस्तान से हथियार और आतंकियों को कश्मीर की तरफ डायवर्ट किया जाए। दरअसल जम्मू-कश्मीर से 370 हटाए जाने के दो साल बाद घाटी में आतंक ने अपना नाम, निशाना और तरीका तीनों बदल लिए हैं। आतंक के नए नाम हैं- द रजिस्टेंस फ्रंट और यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट। उनके निशाने पर हैं- ऐसे गैर-मुस्लिम जो पढ़ाने-लिखाने या बाहर से आकर यहां काम कर रहे हैं। उनके निशाने पर वो मुसलमान भी हैं, जो सियासी गतिविधियों का हिस्सा बन रहे हैं या पुलिस में हैं। आतंकियों की यह नई पौध एके-47 या ग्रेनेड जैसे हथियारों की जगह अचानक करीब आकर पिस्टल जैसे छोटे हथियारों से अपने शिकार को मार रही है। पिछले एक साल में इसी तरह 25 लोगों की हत्या की जा चुकी है। पिछले पांच दिनों में ऐसी सात वारदातों में सात लोग मारे गए हैं। गुरुवार को श्रीनगर के एक सरकारी स्कूल में दो गैर मुस्लिम टीचर्स को गोली मार दी गई। आतंकी ऐसी घटनाओं के जरिए खौफ का माहौल बनाना चाहते हैं और ये संदेश देना चाहते हैं कि घाटी में अभी आतंक खत्म नहीं हुआ है। इस नए संगठन की गतिविधि से पाकिस्तान का भी फायदा होगा। पाकिस्तान आतंकी संगठनों की फंडिंग की वजह से पहले से ही वैश्विक स्तर पर आलोचना का सामना कर रहा है, इसलिए नए आतंकी संगठन की गतिविधि बढऩे से पाकिस्तान का नाम भी नहीं आएगा।

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