ममता ने सत्ता तो पा ली, लेकिन अब उपहार में खून की नदियां बहाई जा रही है

ममता की पार्टी ने जीत के मचाया हाहाकार, कार्य कर्ता खून से मना रहे है जश्न।

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राजनीति में विजय के बाद उत्सव मनाने का रिवाज हमेशा से रहा है लेकिन बंगाल की राजनीति इससे
हमेशा अलग रही है बंगाल में टीएमसी पर अपने विरोधियों के खून बहाने के आरोप लगते रहे है अब भाजपा द्वारा टीएमसी पर खून की होली खेलने के आरोप लगाए जा रहे है।

जो ममता के विरोध मे है उसको जीने का अधिकार नही:

अगर भाजपा के आरोपों पर गौर करें तो भाजपा और उसके छात्र संगठन ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी पर साफ-साफ तरीके से भाजपा समेत अन्य विपक्षी दलों पर जानलेवा हमले कराने का दावा कर रहे है। भाजपा ने ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी द्वारा चुनाव जीतने के बाद करीब ग्यारह हत्याओं को अंजाम देने का आरोप लगाया है साथ ही भाजपा ने दो महिला पोलिंग एजेंट के ऊपर गैंगरेप जैसे जघन्य अपराध किये जाने के आरोप भी लगाए है।

भाजपा के छात्र संगठन एबीवीपी ( अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) के द्वारा उनके प्रांतीय कार्यालय पर टीएमसी के गुंडों द्वारा हमला किये जाने के आरोप लगाए है।

देश मे यह प्रादेशिक राजनीति का कभी ट्रेंड नहीं रहा: मतदान के बाद हत्या और मारपीट का मामला अधिकतर ग्रामीण और स्थानीय निकाय चुनावों में नजर आता रहा है लेकिन बंगाल ने हमेशा इस ट्रेंड को प्रादेशिक चुनावों मे प्रयोग किया है। इस बात की पुष्टि इस बात से भी होती है कि बंगाल में टीएमसी पर यह गंभीर आरोप अब केवल भाजपा द्वारा नहीं बल्कि सीपीआई एम के सीताराम येचुरी द्वारा भी लगाये जा रहे है। येचुरी ने इस मामले पर ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए है। जिसका किसी के पास कोई जवाब नहीं है। 

क्या विजय जुर्म करने की आज़ादी देती है: राजनीति विचारधारा का संघर्ष है जिसमें हिंसा का कोई स्थान नहीं है लेकिन ममता बनर्जी की पार्टी पर दूसरे दल के लोगों पर जानलेवा हमले कराने के आरोप

लगातार लग रहे है। देखना यह होगा कि इस मामले में भाजपा और अन्य विपक्षी दल क्या कदम उठाते है।

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