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Budget 2026 में हो सकता है होम लोन पर बड़ा बदलाव, NAREDCO ने 5 लाख की ब्याज छूट

UB News Network
Last updated: जनवरी 25, 2026 9:06 पूर्वाह्न
By : UB News Network
Published on : 3 महीना पहले
Budget 2026 में हो सकता है होम लोन पर बड़ा बदलाव, NAREDCO ने 5 लाख की ब्याज छूट
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नई दिल्ली:

केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले रियल एस्टेट सेक्टर की शीर्ष संस्था नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (NAREDCO) ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं. संगठन ने होम लोन पर मिलने वाली ब्याज कटौती की सीमा बढ़ाने, किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव करने और रियल एस्टेट क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की आवश्यकता पर जोर दिया है.

NAREDCO का कहना है कि मौजूदा आर्थिक और शहरी परिस्थितियों को देखते हुए आवास क्षेत्र को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत है, ताकि ‘सभी के लिए आवास’ के लक्ष्य को हासिल किया जा सके.

होम लोन पर ब्याज छूट बढ़ाने की मांग
NAREDCO के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कहा कि होम लोन पर चुकाए गए ब्याज पर आयकर अधिनियम के तहत मिलने वाली दो लाख रुपये की छूट सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि यह सीमा करीब 12 वर्ष पहले तय की गई थी, जबकि इस दौरान प्रॉपर्टी की कीमतों और निर्माण लागत में काफी वृद्धि हो चुकी है.

जैन के अनुसार, ब्याज छूट की सीमा बढ़ाने से मध्यम वर्ग और पहली बार घर खरीदने वालों को राहत मिलेगी, जिससे आवासीय मांग को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बजट 2026 में इस प्रस्ताव को शामिल किया जाए.

किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव जरूरी
NAREDCO ने किफायती आवास की मौजूदा परिभाषा को भी अव्यावहारिक बताते हुए इसमें संशोधन की मांग की है. संगठन का कहना है कि वर्तमान में 45 लाख रुपये तक के घरों को किफायती आवास माना जाता है, लेकिन बढ़ती भूमि कीमतों और निर्माण लागत के कारण यह सीमा अब अप्रासंगिक हो गई है.

संस्था ने सुझाव दिया कि 90 लाख रुपये तक की कीमत वाले घरों को किफायती आवास की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए. इससे अधिक संख्या में परियोजनाएं इस श्रेणी में आ सकेंगी और खरीदारों को एक प्रतिशत जीएसटी जैसी कर राहत का लाभ मिलेगा.

रियल एस्टेट को उद्योग का दर्जा देने पर जोर
NAREDCO के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र देश की जीडीपी, रोजगार सृजन और शहरी विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है. इसके बावजूद अब तक इसे उद्योग का दर्जा नहीं दिया गया है.

उन्होंने कहा कि यदि रियल एस्टेट को उद्योग का दर्जा मिलता है, तो डेवलपर्स को सस्ते ऋण, बेहतर वित्तीय संसाधन और निर्माण से जुड़े कच्चे माल की आसान उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी. इससे परियोजनाओं की लागत कम होगी और आवास की आपूर्ति बढ़ेगी.

किराये के आवास को बढ़ावा देने की जरूरत
NAREDCO ने किराये के आवास को प्रोत्साहन देने की भी मांग की है. प्रवीण जैन ने बताया कि मौजूदा समय में किराये से मिलने वाला रिटर्न मात्र एक से तीन प्रतिशत के बीच है, जिससे रियल एस्टेट कंपनियों के लिए इस क्षेत्र में निवेश करना आकर्षक नहीं रह गया है.

उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार कर छूट, वित्तीय प्रोत्साहन और नीतिगत समर्थन के जरिए किराये के आवास को बढ़ावा दे सकती है, जिससे शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आवासीय जरूरतों को पूरा किया जा सके.

सरकारी जमीन और PPP मॉडल का प्रस्ताव
निरंजन हीरानंदानी ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार अपने पास उपलब्ध खाली पड़ी जमीन का उपयोग किफायती और मध्यम आय वर्ग के आवास निर्माण के लिए करे. इसके लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को अपनाया जा सकता है, जिससे तेजी से आवासीय परियोजनाओं का विकास संभव होगा.

2030 तक 1000 अरब डॉलर का सेक्टर
NAREDCO का अनुमान है कि भारतीय रियल एस्टेट उद्योग 2030 तक 1,000 अरब डॉलर के आकार तक पहुंच सकता है. संगठन का मानना है कि यदि बजट में आवास ऋण, कर ढांचे और नीति सुधारों पर ध्यान दिया गया, तो यह क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि को और गति देगा.

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