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“दावोस में ग्लोबल एक्सपर्ट्स की राय: मजबूत विकास दर के साथ क्या भारत दुनिया की त

UB News Network
Last updated: जनवरी 22, 2026 1:03 अपराह्न
By : UB News Network
Published on : 3 महीना पहले
“दावोस में ग्लोबल एक्सपर्ट्स की राय: मजबूत विकास दर के साथ क्या भारत दुनिया की त
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 नई दिल्ली

दुनिया के बहुत कम देश इस साल दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उतनी मजबूती और आत्मविश्वास के साथ पहुंचे हैं, जितना भारत. मजबूत विकास दर, गहरे होते सुधार और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के बीच भारत आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है. इस मोमेंटम को बनाए रखने के लिए अब कड़े फैसलों और तेज क्रियान्वयन (एक्जीक्यूशन) की जरूरत है.

इसी विषय पर इंडिया टुडे ग्रुप के सहयोग से एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसका संचालन इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस-चेयरपर्सन और एग्जीक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी ने किया. सत्र में दिग्गज अर्थशास्त्री, सीईओ और केंद्रीय मंत्री ने इस बात का विश्लेषण किया कि भारत को आगे क्या करने की आवश्यकता है.

भारत का ‘मोमेंटम मोमेंट’

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर और प्रसिद्ध भारीतय-अमेरिकी अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने अर्थव्यवस्था को नया रूप देने वाली प्रगति को स्वीकार करते हुए चर्चा की शुरुआत की. उन्होंने सबसे पहले भारत की अब तक की उपलब्धियों को रेखांकित किया. 
उन्होंने कहा, “डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण बेहद प्रभावशाली रहा है. जीएसटी में जो किया गया, खासकर हालिया सरलीकरण, वह अर्थव्यवस्था के लिए बेहद मददगार है.”

जब कली पुरी ने उनसे पूछा कि इस मोमेंटम को बनाए रखने के लिए अब भारत को क्या करना चाहिए? तो गोपीनाथ का जवाब स्पष्ट था. उन्होंने कहा, “इस मोमेंटम को बनाए रखना, प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना और 2047 के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य तक पहुंचना ही असली चुनौती है. आज भारत की बुनियाद मजबूत है. न सिर्फ विकास दर के लिहाज से, बल्कि महंगाई भी लो सिंगल डिजिट में है. यह भारत के लिए अच्छी स्थिति है.”
 

हालांकि, उन्होंने कुछ पुराने अवरोधों की ओर भी इशारा किया. उन्होंने कहा, “भारत में जमीन अधिग्रहण करना, साफ-सुथरी जमीन के मालिकाना हक होना एक बहुत बड़ी चुनौती है, जो विकास और मैन्युफैक्चरिंग में बाधा डालती है.” उन्होंने न्यायिक सुधारों को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया.

श्रम बाजार पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की जनसांख्यिकीय ताकत का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा. उन्होंने कहा कि भारत के विकास में केवल लगभग 30% हिस्सा ही श्रम से आया है. उन्होंने नए श्रम कानूनों का स्वागत किया, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि यदि भारत वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ना चाहता है, तो उसे बहुत बड़ा सोचना होगा. उन्होंने कौशल विकास (Skilling) को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा, “नौकरियों और श्रमिकों के कौशल के बीच बड़ा अंतर है. स्किलिंग को बड़े पैमाने पर बढ़ाना बेहद जरूरी है.”

प्रदूषण: विकास के रास्ते में बड़ी बाधा

कली पुरी के एक तीखे सवाल पर कि भूमि और श्रम के अलावा भारत को क्या रोक रहा है, गोपीनाथ ने प्रदूषण के मुद्दे को उठाया. उन्होंने साफ-साफ कहा कि प्रदूषण भारत में एक चुनौती है. यह टैरिफ के किसी भी असर से कहीं ज़्यादा गंभीर है. उन्होंने विश्व बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, “भारत में हर साल प्रदूषण के कारण लगभग 17 लाख लोग जान गंवाते हैं. यह न केवल आर्थिक बोझ है, बल्कि वैश्विक निवेशकों को भी हतोत्साहित करता है.” 
उन्होंने प्रदूषण से युद्ध स्तर पर निपटने का आह्वान करते हुए कहा कि अगर आपको वहां रहना है और माहौल ऐसा नहीं है जो आपको अपनी सेहत के लिए अच्छा लगे, तो यह आपको पीछे खींचता है.” 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और वैश्विक अनिश्चितताओं पर बोलते हुए गोपीनाथ ने कहा, “दुनिया पिछले 80 सालों के वैश्विक आर्थिक ढांचे से स्थायी रूप से आगे निकल चुकी है. अब हम पीछे नहीं लौटने वाले.”

अभी भी बाकी हैं बड़े सुधार

कली पुरी ने भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल से एग्जीक्यूशन से जुड़ा था एक अहम सवाल पूछा कि भारत की ग्रोथ को सच में तेजी देने के लिए हमें और क्या करने की जरूरत है?”

मित्तल ने आशावादी लहजे में कहा, “भारत पहले से ही बहुत अच्छी स्थिति में है. हम तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेंगे ही. अगर आध्यात्मिक भाषा में कहूं तो यह किस्मत में लिखा है.” हालांकि, उन्होंने बड़े पैमाने पर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि हमें 25 से 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचना होगा. 

उद्योग जगत की बात करते हुए मित्तल ने कहा कि बुनियादी शर्तें पूरी हैं. उन्होंने कहा, “मेरी जमात यानी बिजनेस कम्युनिटी को एक सक्षम माहौल चाहिए, एक प्रतिबद्ध सरकार चाहिए और नीति में स्थिरता चाहिए. ये तीनों चीजें आज उपलब्ध हैं. उनकी सबसे बड़ी चिंता वैश्विक हालात को लेकर है. जो चीज हमें पटरी से उतार सकती है, वह है दुनिया में बढ़ती प्रतिस्पर्धा. इस माहौल में ट्रेड डील्स बेहद अहम होंगी.”
मित्तल ने पुराने दौर को याद करते हुए कहा कि एक लाइसेंस के लिए सैकड़ों विभागों के चक्कर काटने का दौर अब खत्म हो चुका है. उन्होंने कहा, “मैंने वो दौर देखा है जब DGTD, CCIE जैसे विभागों के बाहर खड़े होकर ढेर सारी किताबें, मैनुअल और हैंडबुक लेकर एक-एक लाइसेंस के लिए चक्कर लगाने पड़ते थे. सैकड़ों विभागों से मंजूरी लेनी होती थी. अब वो सब खत्म हो चुका है.”

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह भारतीय कंपनियों पर और अधिक भरोसा दिखाए. उन्होंने कहा, “हम पर अधिक विश्वास करें, हम नियमों का पालन करेंगे और सही काम करेंगे.”

भारत की सबसे बड़ी ताकत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, “भारत उपभोक्ताओं का महाद्वीप है. हम दुनिया के हर देश के लिए एक बड़ा बाजार हैं. और अब हम सिर्फ उपभोग ही नहीं कर रहे, बल्कि दुनिया के लिए उत्पादन भी कर रहे हैं.”

एक वैश्विक CEO की नजर से भारत

कली पुरी ने IKEA के वैश्विक प्रमुख जुवेन्सियो मेज़्टु हेरेरा से पूछा कि एक ग्लोबल सीईओ के नजरिए से आज भारत कैसा दिखता है. इस पर IKEA के CEO हेरेरा ने बेहद आत्मीयता और साफगोई के साथ जवाब दिया. उन्होंने कहा, “भारत को लेकर मैं भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ हूं. मैंने यहां छह साल बिताए हैं.”

भारत की ताकतों को गिनाते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “भारत एक बहुत बड़ा बाज़ार है. यहां की आबादी युवा है. यह एक लोकतंत्र है. भारत के पास यह क्षमता है कि वह कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था से सीधे अत्याधुनिक AI युग में, किसी भी अन्य देश की तुलना में कहीं तेजी से छलांग लगा सकता है.”

उन्होंने जिस तरह से भारत इन्वेस्टर्स के साथ डील करता है, उसकी तारीफ करते हुए कहा, “जब आपको कोई रुकावट आती है, तो आप दरवाजा खटखटाते हैं और आपकी बात सुनी जाती है. ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के साथ बेहतर तालमेल से भारत और भी तेजी से आगे बढ़ेगा.” 

उन्होंने भारत में आने वाले CEO के लिए सलाह भी दी. हेरेरा ने कहा, “शॉर्ट-टर्म फायदे के लिए भारत मत आओ. भारत को आपकी जरूरत नहीं है. भारतीय स्टेकहोल्डर्स के साथ जुड़ें. यहां समय लगाइए, लोगों को समझिए और दीर्घकालिक सोच के साथ निवेश कीजिए.”

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में तेज सुधार

कली पुरी ने सरकार से सीधा और केंद्रित सवाल किया कि भारत में कारोबार करना आसान बनाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

इस पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सुधारों का विस्तृत ब्योरा दिया. उन्होंने कहा, “पिछले दस वर्षों में 1,600 क़ानूनों को खत्म किया गया है. करीब 35 हजार अनुपालनों (Compliances) को हटाया गया है.”

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कई पुराने कानून उस दौर के हैं, जब सरकारें अंदरमुखी सोच के साथ काम करती थीं. अब उन कानूनों को नए सिरे से लिखा जा रहा है. इन सुधारों का असर जमीनी स्तर पर दिखने लगा है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “पहले एक टेलीकॉम टावर लगाने की अनुमति लेने में 270 दिन लगते थे. आज वही अनुमति सिर्फ़ सात दिनों में मिल जाती है. एक रेलवे टर्मिनल जिसे बनने में पहले छह साल लगते थे, अब ढाई महीने लगते हैं.” 

उन्होंने आगे कहा कि भारत का क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम और टेलीकॉम कानून, जो दोनों 1800 के दशक के हैं, उन्हें मॉडर्न फ्रेमवर्क से बदल दिया गया है.

टैरिफ़ की चुनौती और भारत की रणनीति

कली पुरी ने वैश्विक चुनौतियों को लेकर सवाल किया कि अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ के बीच भारत अपनी विकास गति को कैसे बनाए रखेगा? इस पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत मजबूती से खड़ा रहा है. हम एक बेहद लचीली और मजबूत अर्थव्यवस्था हैं. टैरिफ के बावजूद हमारे निर्यात में बढ़ोतरी हुई है.

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स अब भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बन चुका है. उन्होंने कहा कि भारत नए-नए भौगोलिक क्षेत्रों में अपने निर्यात का विस्तार कर रहा है और संतुलित, स्वस्थ और एक-दूसरे के पूरक व्यापार समझौते कर रहा है.

उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज दुनिया भारत को एक बेहद भरोसेमंद वैल्यू चेन पार्टनर के रूप में देख रही है.

पैनल चर्चा ने इस बात को लेकर कोई संदेह नहीं छोड़ा कि आज भारत किस मुकाम पर खड़ा है. अवसर वास्तविक हैं. रफ्तार वास्तविक है. चुनौतियां अब छिपी हुई नहीं हैं. और अब भारत आगे क्या कदम उठाता है, यही तय करेगा कि 2026 का वादा 2047 की हकीकत बन पाएगा या नहीं.

सत्र के अंत में कली पुरी ने कहा, “भारत दुनिया के लिए एक सकारात्मक ताकत है और इसका सुनहरा भविष्य पहले ही तय हो चुका है.”

 

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