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हनुमान से बजरंगबली तक: इस नाम के पीछे छिपी है अद्भुत और प्रेरक कहानी

UB News Network
Last updated: जनवरी 20, 2026 10:12 पूर्वाह्न
By : UB News Network
Published on : 3 महीना पहले
हनुमान से बजरंगबली तक: इस नाम के पीछे छिपी है अद्भुत और प्रेरक कहानी
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हनुमान जी को भक्त ‘बजरंगबली’ कहकर पुकारते हैं। यह नाम उनकी अपार शक्ति और वज्र जैसी मजबूती का प्रतीक है। ‘बजरंग’ शब्द ‘वज्रांग’ से निकला है, जिसका अर्थ है अंग वज्र (इंद्र के अस्त्र) जैसे कठोर हों। हनुमान जी का शरीर इतना बलशाली था कि इंद्र के वज्र प्रहार से भी उन्हें कोई हानि नहीं हुई। इस नाम की कहानी बाल्यकाल की एक घटना से जुड़ी है, जो उनकी दिव्य शक्ति और अमरता को दर्शाती है। आइए जानते हैं इस नाम की पूरी कहानी और महत्व।

बजरंगबली नाम का मूल अर्थ
‘बजरंगबली’ दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘बजरंग’ और ‘बली’। ‘बली’ का अर्थ है बलशाली या महाबली। ‘बजरंग’ शब्द संस्कृत के ‘वज्रांग’ से अपभ्रंशित रूप है। ‘वज्र’ इंद्र का दिव्य अस्त्र है, जो हीरे से भी कठोर होता है। ‘वज्रांग’ का अर्थ है – जिसके अंग वज्र जैसे मजबूत हों। हनुमान जी के शरीर की मजबूती इतनी थी कि वज्र प्रहार भी उन्हें चोट नहीं पहुंचा सका। इसी कारण उन्हें ‘वज्रांग बली’ कहा गया, जो लोक भाषा में ‘बजरंगबली’ बन गया। यह नाम उनकी अजेय शक्ति और अमरता का प्रतीक है।

बाल्यकाल की घटना – सूर्य को फल समझकर निगलने की कथा
हनुमान जी के बचपन में एक प्रसिद्ध घटना हुई, जिससे उनका नाम ‘बजरंगबली’ पड़ा। बाल हनुमान ने आकाश में लाल-नारंगी सूर्य को फल समझ लिया। वे उड़कर सूर्य को निगलने के लिए पहुंच गए। देवताओं में हड़कंप मच गया। इंद्र ने अपने वज्र से हनुमान जी पर प्रहार किया। वज्र प्रहार से हनुमान जी का ठुड्डी (हनु) टूट गया और वे बेहोश होकर गिर पड़े। इसी कारण उनका नाम ‘हनुमान’ पड़ा, जिसका अर्थ है – जिसका हनु (ठुड्डी) टूटा हो। लेकिन वज्र प्रहार से भी वे मरे नहीं, बल्कि और अधिक बलशाली बन गए। इस घटना ने सिद्ध कर दिया कि उनके अंग वज्र जैसे कठोर हैं।

वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास जी का योगदान
मूल वाल्मीकि रामायण में ‘बजरंगबली’ शब्द का प्रयोग नहीं है। वहां हनुमान जी को ‘मारुति’, ‘कपिश्रेष्ठ’, ‘अंजनिपुत्र’ या ‘हनुमान’ कहा गया है। ‘वज्रांग’ या ‘बजरंग’ का उल्लेख नहीं मिलता है। लेकिन गोस्वामी तुलसीदास जी ने जब अवधी भाषा में श्री रामचरितमानस लिखी, तब उन्होंने ‘वज्रांग’ को लोक भाषा में ‘बजरंग’ लिखा। तुलसीदास जी की रामचरितमानस में ‘बजरंग बली’ शब्द का प्रयोग हुआ, जिससे यह नाम जन-जन तक पहुंचा। तुलसीदास जी ने ही इस नाम को लोकप्रिय बनाया, जो आज भी हनुमान जी का सबसे प्रिय नाम है।

बजरंगबली नाम का महत्व और प्रतीक
‘बजरंगबली’ नाम हनुमान जी की अजेय शक्ति, अमरता और वज्र जैसी मजबूती का प्रतीक है। यह नाम भक्तों को साहस, बल और सुरक्षा का संदेश देता है। जब भी कोई संकट आए, भक्त ‘बजरंगबली’ नाम जपते हैं और हनुमान जी की कृपा प्राप्त करते हैं। यह नाम बताता है कि सच्ची भक्ति और बल से कोई भी बाधा नहीं रोक सकती है। बजरंगबली नाम से हनुमान जी की पूजा करने से भय, रोग और शत्रु दूर होते हैं। यह नाम भक्तों के जीवन में साहस और आत्मविश्वास भरता है।

हनुमान जी को ‘बजरंगबली’ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि उनके अंग वज्र जैसे कठोर थे और इंद्र के वज्र प्रहार से भी वे अडिग रहे। यह नाम तुलसीदास जी की कृपा से लोकप्रिय हुआ। बजरंगबली नाम जपने से जीवन में बल, साहस और सुरक्षा मिलती है।

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