वेब सीरीज रिव्यू: रामयुग – जो उम्मीदों पर बिल्कुल खरी नहीं उतरती

कई निर्देशक रामायण को फिर से बनाने की कोशिश करते हैं लेकिन रामानंद सागर के रामायण के स्तर की बराबरी कोई नहीं कर सकता।

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एक ओर जहां देश मे कोरोना काल अपने चरम पर है और लोगों का धर्म और आध्यात्म से ज्यादा जुड़ाव हो रहा है ऐसे वक्त में रामयुग जैसी वेबसीरीज लोगों को थोड़ी बहुत मानसिक रूप से राहत देने की कोशिश थी लेकिन इस वेब सीरीज किसी मायने में खरी नहीं उतर पाती, वेब सीरीज न सिर्फ दर्शकों को निराश करती है बल्कि कई जगहों पर ऐसा लगता है मानो कॉस्ट कटिंग के चक्कर मे महाकाव्य को आड़ा तिरछा कर दिया है।

कहानी और संवाद: 

कहानी का क्या है हमने बचपन से सुनी थी कि श्री महा विष्णु धरती पर चल रहे अत्याचार को समाप्त करने के लिए अयोध्या के चक्रवर्ती राजा दशरथके पुत्र श्री राम के रूप में अवतरित होते है और उस काल मे सबसे दुर्दांत आततायी राजा रावण को उसके कर्मो का दंड देने के लिए दंदाकरान्य के मध्यसे गुजरकर लंका तक पहुँचते है।

इस दौरान शुरुआत से ही श्री राम विवाह, वनवास, हनुमान मिलन और सीता हरण जैसे घटनाक्रमों का आना होता है और आखिर में सत्य और न्याय रूपी श्री राम के हाथों लंकाधिपति रावण का अंत होता है और पृथ्वी पर रामयुग की स्थापना होती है तो कहानी का प्लाट ऐसा है जिसके बारे में सब जानते है।

किसी से कुछ छुपा नहीं है बस अंतर होता है लोगों के कथा और कहानी के प्रस्तुतिकरण का जिसमें  रामयुग वेब सीरीज पक्के तौर पर फेल हुई है। दरअसल निर्माता और निर्देशक के साथ-साथ पटकथा लेखक यह निर्णय कर ही नहीं पाए कि आखिरवो करना क्या चाहता है। बेहूदा संवाद जो ऐतिहासिक नहीं बल्कि आज के जमाने के लगते है। कुल मिलाकर इस बेहतरीन बन सकने वाली वेबसीरीज को निम्न स्तर का बना देती है।

मेकअप में तो मानो वेब सीरीज ने कहर ही ढाया गया है।

कास्ट और निर्माता निर्देशक: 

अगर आपने रामानंद सागर कृत “रामायण” देख रखी है तो यकीनन आप अपने मन मे राम और सीता के साथ लगभग सभी पात्रों को रिप्लेस नहीं कर सकेंगे चूंकि चरित्रों के साथ इतने प्रयोग किये गए है कि ये किसी डेली सोप के सीरियल के कैरेक्टर मालूम पड़ते है।

हालांकि आपको बताते चले कि इस वेब सीरीज को निर्देशित किया है कुणाल कोहली ने और इस सीरीज की कथा को अपने हिसाब से निरूपितकिया है कमलेश पांडेय ने जबकि इस पर पैसा खर्च किया है निहारिका कोतवाल और रवीना कोहली ने।

अभिनेताओं और अभिनेत्रियों के तौर पर टिस्का चोपड़ा, अनूप सोनी , विक्रम सिंह चौहान समेत लगभग 23 अन्य लोग शामिल है।

लूप होल तो देखिए: रामयुग की नाव में अंग्रेजी लिखी मिलती थी

फिल्मांकन: 

अगर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जीवन चरित्र पर गौर करें तो उनके जीवन मे कही भी जादुई चमत्कार की उम्मीद नहीं की जा सकती लेकिन इस वेबसीरीज को महज एक तिलिस्मी कहानी बनाकर पेश किया है। 

स्टंट के तौर पर ऐसे ऐसे कारनामे दिखाए है जिसमे श्री राम, लक्ष्मण और रावन, हनुमान जैसे चरित्र किसी चाइनीज फ़िल्म के चरित्रों की तरह उछलते कूदते नजर आते है। वहीं सीता का चरित्र इतना नीरस और भाव भंगिमा हीन दिखाई देताहै कि लोग बोर हो सकते है। वही बैक ग्राउंड संगीत आज के समय का नजर आता है।

सस्ते वीएफएक्स (VFX) वेब सीरीज को न सिर्फ बोझिल बनाते है बल्कि अजीब भी लगते है। हालांकि गीतकार के तौर पर नवोदित कवि अमन अक्षर अपने शब्दों के साथ न्याय करते हुए नजर आते है लेकिनम्यूजिक के तौर पर साजिद वाजिद उतना जादू नहीं कर पाते जितना उम्मीद की जाती है।

देखे या ना देखे: 

एमएक्स प्लेयर(MX PLAYER) पर फ्री में उपलब्ध है। अठन्नी खर्च नहीं हो रहा और अगर आपके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है तो बेशक देखसकते है या फिर अपने लंबे वक्त से फर्जी के वीएफएक्स वाला सिनेमा नहीं देखा तो आप जरूर देखें लेकिन अगर आप चूजी है तो इससे बचे, क्योंकिये वेब सीरीज आपका स्वाद बिगाड़ देगी। बांकी शरीर आपका है दिमाग आपका है आप देखे अथवा ना देखें।

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