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लिवर फेलियर की समय से चेतावनी: एंटीबायोटिक्स पर वैज्ञानिकों की अहम खोज

UB News Network
Last updated: मार्च 5, 2026 10:52 पूर्वाह्न
By : UB News Network
Published on : 1 महीना पहले
लिवर फेलियर की समय से चेतावनी: एंटीबायोटिक्स पर वैज्ञानिकों की अहम खोज
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एंटीबायोटिक्स जीवन रक्षक दवाएं हैं क्योंकि ये जानलेवा संक्रमणों से लड़ती हैं। फिर भी इनके कुछ अनचाहे दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं । डाक्टरों ने लंबे समय से यह देखा है कि कुछ एंटीबायोटिक्स लिवर एंजाइम को बढ़ा देती हैं या सूजन पैदा करती हैं और कुछ मामलों में ये गंभीर क्षति भी पहुंचा सकती हैं, जिससे लिवर फेलियर हो सकता है। इसका कारण ये लिवर कोशिकाओं पर किस स्थान पर स्थित होती हैं और उनकी बाहरी परत के साथ कैसे प्रतिक्रिया करती हैं, यह भी मायने रखता है।

दवाओं को लेकर नया नजरिया
आईआईटी बांबे के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए नए अध्ययन में जिसमें बायोसाइंसेज और बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर आशुतोष कुमार ने और मलेशिया के सनवे विश्वविद्यालय के प्रोफेसर वेत्रिसेलवन सुबरामणियन शामिल थे, ने यह दिखाया कि इसका जवाब शायद इस बात में नहीं है कि कोई दवा कितनी तेजी से काम करती है, बल्कि इस बात में है कि यह लिवर सेल्स की बाहरी परत (मेम्ब्रेन) के साथ कहां और कैसे इंटरैक्ट करती है। प्रोफेसर कुमार ने कहा कि परंपरागत रूप से लोगों का मानना था कि दवा का मालिक्यूल सेल्स को कितना नुकसान पहुंचाता है, इससे यह होता है कि यह सेल मेम्ब्रेन को कितना तोड़ता है । हमारे नतीजे इस नजरिए को बदल सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह अंतर्दृष्टि नई और सुरक्षित दवाओं के विकास के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ रखती है।

लिवर की चोट चिंता का विषय
दवाओं के कोशिका झिल्ली (सेल मेम्ब्रेन) के साथ मालिक्यूलर लेवल पर कैसे जुड़ते हैं, इसका अध्ययन करके वैज्ञानिक विषाक्तता के जोखिमों की भविष्यवाणी कर सकेंगे, इससे पहले कि क्लिनिकल ट्रायल शुरू हो। अध्ययन में यह भी पता चला कि दवा से होने वाली लिवर की चोट मेडिसिन में एक बड़ी चिंता का विषय है और यह एक मुख्य कारण है कि दवाओं को अप्रूवल के बाद मार्केट से वापस ले लिया जाता है या उन पर रोक लगा दी जाती है।

चुनौती यह है कि लिवर की चोट की भविष्यवाणी करना कठिन है क्योंकि कई मरीजों में पहले कोई लक्षण नहीं होते, जबकि अन्य कई दवाओं पर होते हैं, जिससे असली दोषी की पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। यहां तक कि निकटता से संबंधित दवाएं भी अलग व्यवहार कर सकती हैं। पेपर के पहले लेखक आकाश कुमार झा ने कहा कि कोशिका की झिल्ली दवा और लिवर की कोशिकाओं के बीच संपर्क का पहला बिंदु है। रक्त में प्रवाहित होने वाली कोई भी दवा कोशिका में प्रवेश करने या कोशिकीय लक्ष्यों को प्रभावित करने से पहले कोशिका की झिल्ली के साथ इंटरैक्शन करनी चाहिए।

विषाक्तता के खतरों का जल्द पता लगेगा
इसने शोधकर्ताओं को यह विश्वास दिलाया कि प्रारंभिक विषाक्त प्रभाव अक्सर झिल्ली स्तर पर शुरू होते हैं, जो परिवहन, संकेत भेजने और मेटाबालिज्म के लिए जिम्मेदार कई प्रोटीन भी होते है। ये नतीजे दवा बनाने के प्रोसेस में विषाक्तता के खतरों का जल्दी पता लगाकर दवा की सुरक्षा का अनुमान लगाने का एक नया तरीका बताते हैं, यह ट्रैक करके कि लैब में दवाएं सेल मेम्ब्रेन के साथ कैसे इंटरैक्ट करती हैं। झा ने आगे कहा, इस झिल्ली केंद्रित दृष्टिकोण को लागू करके यह पता लगा सकते हैं कि कुछ उपचार से अप्रत्याशित दुष्प्रभाव क्यों पैदा होते हैं और उस ज्ञान का उपयोग कर कम विषैले यौगिकों को डिजाइन कर सकते हैं। चूंकि ये परीक्षण तेज व स्केलेबल हैं, इन्हें दवा बनाने के दौरान स्टैंडर्ड सेफ्टी चेक में जोड़ा जा सकता है।

 

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