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हरियाणा बिजली टैरिफ पर डिस्कॉम ने नहीं दी वोल्टेज-सर्विस कास्ट अध्ययन रिपोर्ट

UB News Network
Last updated: जनवरी 7, 2026 5:32 अपराह्न
By : UB News Network
Published on : 3 महीना पहले
हरियाणा बिजली टैरिफ पर डिस्कॉम ने नहीं दी वोल्टेज-सर्विस कास्ट अध्ययन रिपोर्ट
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चंडीगढ़.

हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) के समक्ष उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVNL) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVNL) द्वारा दाखिल टैरिफ याचिकाओं को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व विद्युत मंत्री प्रोफेसर संपत सिंह ने आयोग को सौंपी।

उन्होंने आरोप लगाया है कि आयोग के बार-बार निर्देशों के बावजूद डिस्कॉम ने वोल्टेज व उपभोक्ता वर्गवार सर्विस कास्ट अध्ययन रिपोर्ट दाखिल नहीं की। फिर भी वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 3000 करोड़ रुपए की भारी टैरिफ वृद्धि को मंजूरी दे दी गई। यह निर्णय न तो किसी विधिवत याचिका पर आधारित था और न ही उपभोक्ताओं एवं हितधारकों को सुनवाई का अवसर दिया गया। 9 जनवरी को एचईआरसी इसको लेकर 9 जनवरी को सुनवाई करने जा रहा है।

4484 करोड़ रुपए का घाटा

संपत सिंह ने एचईआरसी को लिखे लेटर में कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 की याचिका में भी यह देखा गया है कि वितरण कंपनियों ने 4484.71 करोड़ रुपए से अधिक के संयुक्त राजस्व घाटे का अनुमान लगाया है जबकि इस घाटे को पूरा करने के लिए कोई कार्यप्रणाली भी नहीं बताई है। इस तरह की गैर-अनुपालन को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और पिछले वित्तीय वर्ष की तरह उपभोक्ताओं की जानकारी के बिना कोई भी टैरिफ नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।

हजारों करोड़ का पूंजीगत व्यय

प्रोफेसर ने लिखा है कि डीएचबीवीएन ने 2738.69 करोड़ रुपए के पूंजीगत व्यय का प्रस्ताव रखा है, जबकि आवर्ती राजस्व (APR) 1900 करोड़ रुपए है और टू-अप (2024 25) का दावा 1658.36 करोड़ रुपए है, जो निराधार प्रतीत होता है। एकीकृत योजना के संबंध में स्पष्ट रूप से विचारहीन है।

इसी प्रकार यूएचबीवीएन ने 2056 करोड़ रुपए के पूंजीगत व्यय का प्रस्ताव रखा है। प्रतिपूर्ति विवरण और लागत-लाभ विश्लेषण के बिना पूंजीगत व्यय अर्थहीन है इसलिए प्रत्येक मद के तहत विस्तृत जानकारी और हानि में कमी, आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ भार वृद्धि पर उनके प्रभाव को हस्तक्षेप कर्ताओं द्वारा विश्लेषण और टिप्पणी के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

एआरआर रिपोर्ट पर उठाए सवाल

अनुमानित राजस्व 28,112 करोड़ रुपए (डीएचबीवीएन) है, जो 4116 करोड़ रुपए की राजस्व वृद्धि है। जिसका मुख्य कारण निश्चित शुल्कों में वृद्धि है। यह राशि टैरिफ में कमी के रूप में उपभोक्ताओं को दी जानी चाहिए थी। विभिन्न वार्षिक रिपोर्ट (ARR) रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2022-23 के लिए वितरण हानियां 11.42 प्रतिशत थी जबकि वर्ष 2023-24 के लिए यह 11.35 प्रतिशत थी। 27 नवंबर 2025 के ज्ञापन अनुसार वर्ष 2024-25 के लिए वितरण हानियां 9.54 प्रतिशत निर्धारित की गई हैं।

सप्लाई लॉस बढ़ाया गया

इसी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026-27 के लिए लक्ष्य 9.75 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। वितरण हानियों को कम करने की दिशा में प्रयास वार्षिक एआरआर चर्चाओं में प्रमुख बिंदुओं में से एक रहा है। सप्लाई लॉस के लक्ष्य को 9.54 प्रतिशत से और कम करने के बजाय इसे बढ़ा दिया गया है। आयोग इस पर विचार कर सकता है और एक कम करने योग्य लक्ष्य निर्धारित कर सकता हैं ताकि डीएचबीवीएन इसे प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त प्रयास कर सके।

कंपनियों का प्रबंधन नहीं

पूर्व ऊर्जा मंत्री ने लिखा है कि भारी पूंजीगत व्यय के बावजूद डीएचबीवीएन ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वितरण हानि 9.54 प्रतिशत और यूएचबीचीएन ने 9.85 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। ये आंकड़े उनके द्वारा बताए गए वास्तविक पाटे से अधिक हैं। वितरण कंपनियां परिचालन की दृष्टि से अक्षम बनी हुई हैं।

एफआरपी और उदय से पहले के आंकड़ों से इनको तुलना करना निरर्थक है। एचटी-एलटी अनुपात में सुधार को देखते हुए इस प्रकार की हानि 6 से 8 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। दोनों डिस्कॉमों द्वारा प्राप्तियों का प्रबंधन लगातार सुस्त बना हुआ है। जिसके परिणामस्वरूप कार्यशील पूंजी की आवश्यकता और उस पर ब्याज में काफी वृद्धि हुई है।

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