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डिजिटल भुगतान पर खतरा! UPI फ्रॉड को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र, RBI और NPCI

UB News Network
Last updated: फ़रवरी 20, 2026 3:12 अपराह्न
By : UB News Network
Published on : 2 महीना पहले
डिजिटल भुगतान पर खतरा! UPI फ्रॉड को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र, RBI और NPCI
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नई दिल्ली

ऑनलाइन पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के बीच दिल्ली में UPI फ्रॉड के मामलों में तेजी से इजाफा होने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं से जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने UPI फ्रॉड रोकने तथा पीड़ितों को तुरंत राहत देने के लिए ठोस गाइडलाइंस बनाने की मांग पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किए। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते दायरे के साथ साइबर ठगी की घटनाएं भी चिंताजनक स्तर पर पहुंच रही हैं।

अदालत ने वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब देने को कहा है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि UPI फ्रॉड रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और पीड़ितों को त्वरित राहत देने के लिए कौन-सी व्यवस्था मौजूद है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने ऑनलाइन ठगी के मामलों में तेजी पर चिंता जताई
याचिकाकर्ता पंकज निगम ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि फरवरी 2024 में ऑनलाइन किराये का फ्लैट ढूंढते समय उनसे 1.24 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। उन्होंने कहा कि मकान किराये पर दिलाने के नाम पर आरोपियों ने डिजिटल पेमेंट के जरिए पैसे ट्रांसफर करवा लिए, जिसके बाद उनका कोई संपर्क नहीं हुआ। याचिकाकर्ता के अनुसार, घटना की शिकायत संबंधित एजेंसियों से करने के बावजूद न तो उनकी रकम वापस मिली और न ही आरोपियों के बारे में कोई ठोस जानकारी दी गई। उन्होंने अदालत को बताया कि ऐसे मामलों में आम लोग खुद को पूरी तरह असहाय महसूस करते हैं, क्योंकि न तो त्वरित कार्रवाई होती है और न ही पीड़ितों को समय पर राहत मिलती है। उन्होंने कोर्ट से मांग की कि UPI और ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में सख्त दिशा-निर्देश बनाए जाएं, ताकि भविष्य में लोगों को इस तरह की ठगी से बचाया जा सके और पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके।

क्या कहा याचिका में ?
याचिका में कहा गया है कि फर्जी या अधूरी जानकारी वाले बैंक खातों के जरिए होने वाली ठगी रोकने के लिए केवल फुल KYC (पूर्ण सत्यापन) वाले बैंक अकाउंट को ही UPI से जोड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसके अलावा एक यूनिफाइड रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म बनाने की भी मांग की गई है, जो साइबर क्राइम हेल्पलाइन को UPI ऐप, बैंकों, पेमेंट कंपनियों और टेलीकॉम सेवाओं से जोड़ सके। इससे ठगी के शिकार लोगों को अलग-अलग जगह भटकने के बजाय एक ही मंच पर तुरंत शिकायत दर्ज कराने की सुविधा मिल सकेगी।

याचिका में कहा गया है कि ऐसा सिस्टम होने पर फ्रॉड की जानकारी तुरंत संबंधित एजेंसियों तक पहुंचेगी और संदिग्ध लेनदेन को समय रहते रोका जा सकेगा। अदालत ने इस मामले में वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से जवाब मांगा है, ताकि डिजिटल भुगतान प्रणाली को और सुरक्षित बनाया जा सके।

याचिका दाखिल कर SOP बनाने की मांग
UPI फ्रॉड के बढ़ते मामलों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका में और भी कड़े कदम उठाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि 10 लाख रुपये तक के UPI फ्रॉड मामलों को ई-जीरो FIR सिस्टम में शामिल किया जाए, ताकि पीड़ित को तुरंत कानूनी कार्रवाई का लाभ मिल सके। याचिकाकर्ता का कहना है कि गंभीर मामलों में अपने-आप FIR दर्ज होने की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे पुलिस कार्रवाई में देरी न हो और आरोपियों तक जल्दी पहुंचा जा सके। इससे साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती “गोल्डन टाइम” का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा, जब रकम को ट्रैक या फ्रीज करना संभव होता है।

इसके अलावा, अलग-अलग राज्यों में अलग नियमों के कारण जांच में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए पूरे देश में एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू करने की भी मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि एक समान व्यवस्था होने से एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर होगा और पीड़ितों को समय पर राहत मिल सकेगी। मामले में अदालत पहले ही वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से विस्तृत जवाब मांग चुकी है, ताकि डिजिटल भुगतान से जुड़े फ्रॉड पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस दिशा-निर्देश तय किए जा सकें।

TAGGED:DelhiDelhi High CourtUPI fraud
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