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देविशा बनीं सूर्यकुमार यादव की ताकत, बोले—उन्होंने मेरी जिंदगी को नई दिशा दी

UB News Network
Last updated: मार्च 17, 2026 8:12 अपराह्न
By : UB News Network
Published on : 2 महीना पहले
देविशा बनीं सूर्यकुमार यादव की ताकत, बोले—उन्होंने मेरी जिंदगी को नई दिशा दी
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नई दिल्ली
टी20 विश्व कप विजेता कप्तान सूर्यकुमार यादव ने अपनी जिंदगी और करियर में पत्नी देविशा शेट्टी की भूमिका पर खुलकर बात की है। इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कैसे करीब 8 साल पहले पत्नी से एक बहुत ही छोटी सी बातचीत ने उनकी जिंदगी बदल दी, करियर को लेकर नजरिया बदल दिया। उनकी पत्नी के सीधे सरल सवाल ने ही उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने को प्रेरित किया और अब जबकि सूर्यकुमार यादव विश्व कप विजेता कप्तान बन चुके हैं, तो वे अपनी ‘बेहद निश्छल’ पत्नी देविशा की जितनी भी प्रशंसा करें वह कम है क्योंकि उन्होंने ही उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

यह साल 2018 की बात है जब देविशा शेट्टी ने सूर्यकुमार से एक सरल सवाल पूछा, ‘अगर आप भारत के लिए खेलना चाहते हैं, तो आपकी क्या योजना है?’ उस ‘बेहद सादगीपूर्ण बातचीत’ के आठ साल बाद सूर्यकुमार की अगुवाई में भारत ने टी20 विश्व कप में अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया।

सूर्यकुमार ने ‘पीटीआई वीडियो’ के साथ एक पॉडकास्ट साक्षात्कार के दौरान उस बातचीत को याद करते हुए कहा, ‘हमारी शादी 2016 में हुई थी जब मैं केकेआर के लिए खेल रहा था। सब कुछ बहुत सहजता से आगे बढ़ रहा था। मैं अच्छा खेल रहा था, खेल का आनंद ले रहा था। जब मैं 2018 में मुंबई इंडियंस में शामिल हुआ तो वह तब तक के मेरे सफर और दिनचर्या को देखती रही। मुझे लगता है कि इसके बाद हमने चीजों को थोड़ा अलग तरीके से करना शुरू कर दिया था।’

उन्होंने कहा, ‘उसने (सूर्यकुमार की पत्नी) मुझसे कहा कि आपके साथ आयु वर्ग में खेलने वाले सभी खिलाड़ी अब भारत के लिए खेल रहे हैं। आपके मन में क्या है? मैंने कहा, ‘मुझे भी भारत के लिए खेलना है।’ उसने पूछा, ‘कैसे खेलोगे?’

इस 35 वर्षीय खिलाड़ी ने अपनी पत्नी के साथ उनके करियर को बदलने वाली बातचीत के बारे में कहा, ‘वह संक्षिप्त सी बातचीत थी। वह किसी तरह की बहस नहीं बल्कि संक्षिप्त चर्चा थी। लेकिन निश्चित तौर पर यह इस बारे में चर्चा थी कि आप अपने लक्ष्य की ओर एक कदम आगे कैसे बढ़ा सकते हैं। अगर मैं भारत के लिए खेलना चाहता हूं और भारत को जीत दिलाना चाहता हूं, तो मैं यह कैसे कर सकता हूं?’

एक बार जब अंतिम लक्ष्य हासिल करने की दिशा में अतिरिक्त प्रयास करने का फैसला कर लिया गया तो उनकी जिंदगी में कुछ चुनौतियां भी सामने आई लेकिन सूर्यकुमार और देविशा ने एक जोड़े के रूप में उस रास्ते पर चलना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा, ‘हमें कई चीजों में कटौती करनी पड़ी। इनमें खान-पान से लेकर सप्ताहांत में दोस्तों से मिलना, शनिवार-रविवार को आराम, सोमवार से शुक्रवार तक के कार्यक्रम शामिल थे। हमने इस तरह से शुरुआत की और 2018 में आईपीएल में मेरा प्रदर्शन (512 रन) बहुत अच्छा रहा। मैंने घरेलू क्रिकेट में भी अच्छा प्रदर्शन किया।’

सूर्यकुमार ने कहा, ‘उस साल मुझे मुंबई इंडियंस की तरफ से पारी की शुरुआत करने का भी मौका मिला और मैंने रन भी बनाए। हमने 2019 और 2020 में भी यही सिलसिला जारी रखा और मैं एक अलग ही मूड में था। उसने देखा कि वह चीजों का अधिक आनंद लेने लगा है। मेरे लिए 2020 (आईपीएल में फिनिशर के तौर पर 480 रन) और भी बेहतर रहा और फिर 2021 में मुझे भारतीय टीम में चुना गया।’

बेहद मिलनसार कप्तान ने कहा कि देविशा पर्दे के पीछे रहकर उनकी ताकत बनी रहीं। उन्होंने कहा, ‘उसने सच्ची बातें बताकर नेपथ्य में रहते हुए मुझ पर बहुत प्रभाव डाला है। अगर वह आपकी अर्धांगिनी है तो वह हमेशा आपके प्रति ईमानदार रहेगी क्योंकि वह सिर्फ आपकी तरक्की चाहती हैं। अगर आप साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहते हैं तो आपके बीच बातचीत में निश्छलता होना जरूरी है।’

भारतीय कप्तान ने कहा, ‘कई बार ऐसा करना मुश्किल भी रहा लेकिन कुल मिलाकर यह अच्छा रहा। अगर आज मैं इस मुकाम पर खड़ा हूं तो इसमें उन बातचीत का बहुत बड़ा योगदान रहा है।’ देविशा ने कभी भी उनकी क्रिकेट को लेकर हस्तक्षेप नहीं किया क्योंकि वह उनका क्षेत्र नहीं था, लेकिन उन्होंने उन्हें क्रिकेट से परे जीवन के बारे में सलाह दी। सूर्यकुमार ने कहा, ‘मैं उसे इसका पूरा श्रेय देता हूं क्योंकि उसने मुझे सिर्फ क्रिकेट में मेरे करियर को लेकर सलाह ही नहीं दी, बल्कि जीवन से जुड़ी कई बातें बताईं। मुझे क्या करना चाहिए? किसी खास परिस्थिति से कैसे निपटना चाहिए? मुझे खुद को कैसे पेश करना चाहिए?’

और सबसे महत्वपूर्ण उन्होंने घर में प्रवेश करने से पहले क्रिकेट को दरवाजे पर छोड़ने के लिए कहा। घर पर वह सुपरस्टार सूर्यकुमार यादव नहीं बल्कि सिर्फ सूर्या हैं। उन्होंने कहा, ‘उसने मुझसे कहा कि क्रिकेट को घर के अंदर लेकर मत आना। यह सब महत्वपूर्ण बातें थी जो मैंने सीखी। आपको अपनी उपलब्धियों के बावजूद विनम्र और जमीन से जुड़े रहना चाहिए। घर पर आप सूर्यकुमार यादव नहीं हैं इसलिए सहज व्यवहार करें। खाना खाने के बाद प्लेट को बर्तन धोने वाले स्थान पर रख दें। यह छोटी-छोटी बातें आपके जीवन में बहुत महत्व रखती हैं।’

 

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