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बसंत पंचमी पर संशय खत्म: सरस्वती पूजा 23 को या 24 जनवरी? जानें सही तिथि, मुहूर्त

UB News Network
Last updated: जनवरी 22, 2026 10:53 पूर्वाह्न
By : UB News Network
Published on : 3 महीना पहले
बसंत पंचमी पर संशय खत्म: सरस्वती पूजा 23 को या 24 जनवरी? जानें सही तिथि, मुहूर्त
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बसंत पंचमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख और ज्ञान-विद्या का पर्व है, जो माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है। मां सरस्वती विद्या, बुद्धि, कला, संगीत और वाणी की देवी हैं। बसंत पंचमी पर पीले वस्त्र पहनकर, पीले फूल चढ़ाकर और पीले प्रसाद से पूजा करने से बुद्धि तेज होती है, परीक्षा में सफलता मिलती है और जीवन में ज्ञान की प्राप्ति होती है। साल 2026 में बसंत पंचमी को लेकर थोड़ा असमंजस है कि 23 या 24 जनवरी को मनाई जाएगी। आइए पंचांग के आधार पर सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और उपाय जानते हैं।

बसंत पंचमी 2026 की सही तारीख और मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 (शुक्रवार) को रात 02:28 बजे शुरू होगी और 24 जनवरी 2026 (शनिवार) को रात 01:46 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्योदय सुबह 7:15 बजे के आसपास होगा, जब पंचमी तिथि ही रहेगी। 24 जनवरी को सूर्योदय पर षष्ठी शुरू हो जाएगी। इसलिए मुख्य तिथि 23 जनवरी शुक्रवार है। शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:50 से 12:40 बजे और अमृत काल में पूजा करना सर्वोत्तम है।

बसंत पंचमी का धार्मिक महत्व
बसंत पंचमी को वसंत ऋतु की शुरुआत और सरस्वती जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। पीला रंग बसंत का प्रतीक है, इसलिए पीले वस्त्र, पीले फूल और पीला प्रसाद चढ़ाया जाता है। यह पर्व विद्या, बुद्धि, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती की पूजा का दिन है। छात्र-छात्राएं इस दिन किताबें, वाद्ययंत्र और कलम की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से बुद्धि तेज होती है, परीक्षा में सफलता मिलती है और वाणी में मधुरता आती है। यह पर्व ज्ञान और सृजनात्मकता का प्रतीक है।

सरस्वती पूजा की विधि और सामग्री

  • पूजा की विधि सरल लेकिन श्रद्धापूर्वक होनी चाहिए:
  • सुबह स्नान कर पीले वस्त्र पहनें।
  • पूजा स्थल पर मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • पीले फूल (गेंदा, चमेली), पीला चंदन, हल्दी, अक्षत, पीली मिठाई (बेसन के लड्डू, खीर), फल, किताबें, कलम और वाद्ययंत्र चढ़ाएं।
  • धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं।
  • ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ या सरस्वती मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • सरस्वती वंदना या सरस्वती चालीसा का पाठ करें।
  • अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
  • छात्र किताबें और कलम को पूजा में शामिल करें और उन्हें छूकर प्रणाम करें।

बसंत पंचमी पर क्या करें और क्या न करें
क्या करें:

  1. पीले वस्त्र पहनें और पीले फूलों से पूजा करें।
  2. किताबें, वाद्ययंत्र और कलम की पूजा करें।
  3. नई पढ़ाई या लेखन कार्य की शुरुआत करें।
  4. पीले चावल, बेसन की मिठाई या खीर का प्रसाद बनाएं।
  5. ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ मंत्र का जाप करें।
  6. पीपल या आम के पेड़ को जल दें।

क्या ना करें:

  1. सफेद या काले वस्त्र न पहनें।
  2. मांस-मदिरा और तामसिक भोजन ना करें।
  3. क्रोध, झूठ या नकारात्मक बातें ना करें।
  4. नई किताब या लेखन सामग्री ना जलाएं या नष्ट करें।
  5. पूजा के समय मौन या शांत रहें।

बसंत पंचमी के विशेष उपाय और लाभ

  • इस दिन मां सरस्वती को पीले फूल और पीला चंदन चढ़ाने से बुद्धि तेज होती है।
  • छात्रों को किताबों की पूजा करने से परीक्षा में सफलता मिलती है।
  • ‘सरस्वती वंदना’ या ‘या कुन्देन्दु तुषारहार धवला’ स्तोत्र का पाठ करने से वाणी मधुर होती है।
  • पीले चावल या हल्दी का दान करने से ज्ञान प्राप्ति होती है।
  • इस दिन नई पढ़ाई या कला सीखने की शुरुआत करने से सफलता निश्चित होती है।
  • पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करने से मन शांत रहता है और एकाग्रता बढ़ती है।

बसंत पंचमी 2026 में 23 जनवरी शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन मां सरस्वती की पूजा, पीले रंग का प्रयोग और ज्ञान की शुरुआत से जीवन में बुद्धि, सफलता और सुख प्राप्त होता है।

TAGGED:Basant PanchamiSaraswati Puja
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