शनिवार, मई 9, 2026

विज्ञापन के लिए संपर्क करें

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in Whatsapp Telegram-plane
उदय बुलेटिन
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • स्वास्थ्य
  • अपराध
  • खेल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • मनोरंजन
  • धर्म
Reading: SIR केस पर CJI का कड़ा रुख: ‘ऐसी याचिका बर्दाश्त नहीं’, कोर्ट में जताई नाराजगी
Font ResizerAa
Notification
उदय बुलेटिन
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • स्वास्थ्य
  • अपराध
  • खेल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • मनोरंजन
  • धर्म
Search
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • स्वास्थ्य
  • अपराध
  • खेल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • मनोरंजन
  • धर्म
Follow US
© 2024. All Rights Reserved.

Home - देश - SIR केस पर CJI का कड़ा रुख: ‘ऐसी याचिका बर्दाश्त नहीं’, कोर्ट में जताई नाराजगी

SIR केस पर CJI का कड़ा रुख: ‘ऐसी याचिका बर्दाश्त नहीं’, कोर्ट में जताई नाराजगी

UB News Network
Last updated: मार्च 10, 2026 8:52 अपराह्न
By : UB News Network
Published on : 2 महीना पहले
SIR केस पर CJI का कड़ा रुख: ‘ऐसी याचिका बर्दाश्त नहीं’, कोर्ट में जताई नाराजगी
साझा करें

नई दिल्ली
देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ आज (मंगलवार, 10 मार्च को) पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। इस दौरान राज्य सरकार की तरफ से मामले की पैरवी कर रहीं सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी पर CJI भड़क गए। दरअसल, 28 फरवरी को प्रकाशित हुई पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची से नाम हटाने को चुनौती दी गई थी, जिसकी वह पैरवी कर रही थीं। याचिका में याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि उनके नाम SIR से पहले मतदाता सूची में थे और उन्होंने मतदाता के तौर पर नाम शामिल करने तथा बने रहने के समर्थन में सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए थे लेकिन जरूरी डॉक्यूमेंट्स स्वीकार न करने की वजह से वोटर लिस्ट से नाम हटा दिया गया है।

ज्यूडिशियल ऑफिसर्स पर आपको भरोसा नहीं है?
बहस के दौरान गुरुस्वामी ने कहा, “ज्यूडिशियल ऑफिसर्स ने लगभग 7 लाख दावों पर फैसला किया है। 63 लाख पर फैसला हो रहा था। 57 लाख अभी बाकी हैं।” इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा, “हमें पता था कि जब ज्यूडिशियल ऑफिसर्स अपॉइंट होंगे तो आप लोग भाग जाएँगे। HC के चीफ जस्टिस ने हमें बताया है कि 10 लाख पर फैसला हो चुका है। आज सुबह हमें बताया गया।” इसके बाद CJI ने् भड़कते हुए कहा, “आपका एप्लीकेशन प्रीमैच्योर है और इससे लगता है कि आपको ज्यूडिशियल ऑफिसर्स पर भरोसा नहीं है। आपने ऐसी याचिका डालने की हिम्मत कैसे की? किसी को भी ज्यूडिशियल ऑफिसर्स से सवाल करने की हिम्मत नहीं करनी चाहिए।”

‘CJI के रूप में इसे बर्दाश्त नहीं करूंगा’
इस पर गुरुस्वामी ने कहा कि हम ज्यूडिशियल ऑफिसर्स से सवाल नहीं कर रहे हैं। इस पर CJI ने कहा, “हो सकता है आपने न किया हो। लेकिन सवाल हैं। भारत के चीफ जस्टिस के तौर पर मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूँगा।” इसके बाद गुरुस्वामी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि कोई भी ज्यूडिशियल ऑफिसर्स पर सवाल नहीं उठा सकता। हम चीफ जस्टिस के सामने पेश हुए हैं और उनके सामने पेश होना हमारे लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि ज्यूडिशियल ऑफिसर्स के पास अब मोटे तौर पर 50 लाख केस हैं जिन पर फैसला होना है। लगभग 48 लाख मैप्ड वोटर हैं.. हम कहते हैं कि वे मैप्ड हैं क्योंकि वे 2002 के इलेक्टोरल रोल में थे और उन्होंने वोट दिया है..

वोटिंग से एक दिन पहले तक…
CJI ने कहा, “इसीलिए SIR हैं। सभी असली वोटर शामिल किए जाएंगे। सभी अनऑथराइज्ड वगैरह नहीं होंगे। इस पर ज्यूडिशियल ऑफिसर्स विचार कर रहे हैं। हमें इस पर क्यों विचार करना चाहिए। वोटिंग से एक दिन पहले तक अगर किसी वोटर पर से बादल हट जाता है तो वह वोट दे सकता है।” इसी बीच CJI ने दूसरे वकील की तरफ इशारा करते हुए कहा कि मुझे वह एप्लीकेशन ढूंढने दीजिए। उस पर कंटेम्प्ट जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने पूछा, “क्या आपने इसे फाइल किया है?”

अगर हम सजा देना चाहते तो…
बार एंड बेंच के मुताबिक, इस पर सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने कहा, “नहीं माय लॉर्ड। हमने नहीं किया है। चिंता यह है कि बाद में सप्लीमेंट्री लिस्ट पब्लिश करनी होगी।” इस पर CJI ने कहा, “तो हमें इसे ढूंढने दीजिए।” इसी दौरान एडवोकेट गुरुस्वामी ने फिर से CJI से अनुरोध करते हुए कहा, प्लीज 48 लाख मैप्ड वोटरों को सजा न दें। इतना सुनते ही बेंच के दूसरे जज जस्टिस बागची ने कहा कि अगर हम सजा देना चाहते तो हम इतनी बड़ी कार्रवाई नहीं करते। उन्होंने कहा कि हम तारीख के करीब आने पर स्थिति का जायज़ा लेंगे।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 20 फरवरी को पश्चिम बंगाल सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच “विश्वास की कमी” और सहयोग के अभाव का उल्लेख करते हुए इस स्थिति को “असाधारण” बताया था और मतदाता सूची में “तार्किक विसंगतियां” श्रेणी से जुड़े दावों और आपत्तियों के निपटारे की निगरानी के लिए सेवारत और सेवानिवृत्त जिला एवं अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों (ज्यूडिशियल ऑफिसर्स) की तैनाती का निर्देश दिया था।

 

TAGGED:Supreme Courttop-news
ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
पिछली ख़बर प्रधानमंत्री  मोदी का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया आभार व्यक्त प्रधानमंत्री मोदी का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया आभार व्यक्त
अगली ख़बर क्या यूपी चुनाव से ही लागू होगा 33% महिला आरक्षण? कानून में बदलाव की तैयारी क्या यूपी चुनाव से ही लागू होगा 33% महिला आरक्षण? कानून में बदलाव की तैयारी

ये भी पढ़ें

छत्तीसगढ़ में बच्चों के लिए तैयार हो रहा बाल-अनुकूल शिक्षा वातावरण, मित्रता और आ

छत्तीसगढ़ में बच्चों के लिए तैयार हो रहा बाल-अनुकूल शिक्षा वातावरण, मित्रता और आ

पंजाब सरकार चलाने के आरोपों पर बोले संजय सिंह—क्या उन्हें हक नहीं कि…?

पंजाब सरकार चलाने के आरोपों पर बोले संजय सिंह—क्या उन्हें हक नहीं कि…?

टेंडर विवाद बना हिंसा की वजह: सतना में गोली चली, मारपीट का वीडियो CCTV में कैद

टेंडर विवाद बना हिंसा की वजह: सतना में गोली चली, मारपीट का वीडियो CCTV में कैद

महतारी वंदन योजना के माध्यम से मातृशक्ति हो रही सशक्त, 42 हजार से अधिक श्रद्धालु

महतारी वंदन योजना के माध्यम से मातृशक्ति हो रही सशक्त, 42 हजार से अधिक श्रद्धालु

सोने की आड़ में करोड़ों की ठगी! रान्या राव की हैरान कर देने वाली कहानी

सोने की आड़ में करोड़ों की ठगी! रान्या राव की हैरान कर देने वाली कहानी

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in Whatsapp Telegram-plane
Uday Bulletin Logo
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?