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बच्चों से जुड़े अपराध में लंबी जद्दोजहद: MP में तेजी, दिल्ली में 4.5 साल लगते है

UB News Network
Last updated: फ़रवरी 19, 2026 9:04 पूर्वाह्न
By : UB News Network
Published on : 2 महीना पहले
बच्चों से जुड़े अपराध में लंबी जद्दोजहद: MP में तेजी, दिल्ली में 4.5 साल लगते है
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भोपाल 

मध्य प्रदेश में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज होने वाले गंभीर अपराधों के मामलों में पीड़ितों को न्याय मिलने की रफ्तार देश के कई बड़े राज्यों और महानगरों की तुलना में काफी बेहतर है।

राज्यसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश के फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) में इन मामलों के ट्रायल (विचारण) में लगने वाला औसत समय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों के मुकाबले काफी कम है।

एमपी में 380 दिन में फैसला, दिल्ली में साढ़े 4 साल

विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी 2024 के आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में एक पॉक्सो मामले के निपटारे में औसतन 380 दिन का समय लगता है। इसकी तुलना यदि अन्य राज्यों से की जाए, तो तस्वीर काफी चौंकाने वाली है।

    दिल्ली: यहां पॉक्सो केस के ट्रायल में औसतन 1639.5 दिन (लगभग 4.5 साल) लग रहे हैं।
    गुजरात: यहां न्याय मिलने में औसतन 1292.5 दिन का समय लगता है।
    उत्तर प्रदेश: यहां भी ट्रायल में औसतन 861 दिन लगते हैं, जो एमपी से दोगुने से भी अधिक है।

देशभर में 2.24 लाख से ज्यादा मामले लंबित

मंत्रालय ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पॉक्सो अधिनियम के तहत कुल 2,24,572 मामले लंबित थे। इन मामलों के त्वरित निपटान के लिए वर्तमान में देश भर में 774 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय कार्य कर रहे हैं, जिनमें 398 विशेष तौर पर केवल पॉक्सो (ई-पॉक्सो) कोर्ट हैं।

चाइल्ड फ्रेंडली न्याय प्रणाली पर सरकार का फोकस

सरकार पीड़ितों को सुविधाजनक माहौल देने के लिए न्यायालय परिसरों के भीतर सुभेद्य साक्षी निक्षेपण केन्द्रों (VWDC) के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। इसके माध्यम से बच्चों के लिए डरावने न्यायिक वातावरण के बजाय एक ‘चाइल्ड फ्रेंडली’ माहौल तैयार किया जा रहा है। इसके लिए अब तक 10,000 से अधिक प्रतिभागियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।

कानून व्यवस्था राज्य की जिम्मेदार
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य के विषय हैं। इसलिए, कानून व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा और अपराधों की जांच व अभियोजन की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। केंद्र सरकार महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इसके लिए कई कदम उठा रही है।

2.45 मामले अभी भी पेंडिंग
न्याय में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार ने फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों और विशेष POCSO अदालतों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है। 31 दिसंबर 2025 तक, देश भर में 774 FTSCs और 398 e-POCSO अदालतें काम कर रही हैं। इन अदालतों ने 3.66 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया है, जबकि लगभग 2.45 लाख मामले अभी भी लंबित हैं।

22 राज्यों में 880 फास्ट ट्रैक अदालत
इसके अलावा, 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 880 फास्ट-ट्रैक अदालतें भी चल रही हैं। ये अदालतें गंभीर अपराधों, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और लंबी बीमारियों से पीड़ित लोगों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई करती हैं। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि मध्य प्रदेश में इन 880 अदालतों में से एक भी फास्ट-ट्रैक अदालत कार्यरत नहीं है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 373 और महाराष्ट्र में 102 ऐसी अदालतें हैं। मध्य प्रदेश में 67 फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतें, जिनमें POCSO अदालतें भी शामिल हैं, कार्यरत हैं।

अब ट्रायल को भी समझ लीजिए

    ट्रायल का औसत समय: विशेष रूप से उस अवधि को दर्शाता है जो अदालत में ‘ट्रायल’ (विचारण) की प्रक्रिया शुरू होने से लेकर अंतिम फैसले तक लगती है।

    ट्रायल की शुरुआत: कानूनी प्रक्रिया में ट्रायल तब शुरू माना जाता है, जब पुलिस अपनी जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल कर देती है और अदालत उस पर संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू करती है।

    अवधि की गणना: दस्तावेजों में ‘औसत विचारण समय’ की गणना उन दिनों के आधार पर की गई है जो फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) और अनन्य पॉक्सो (e-POCSO) न्यायालयों में मामले की सुनवाई चलने और फैसला आने के बीच व्यतीत हुए हैं।

    केस दर्ज होने से अंतर: आमतौर पर केस दर्ज होने (FIR) और विचारण (Trial) शुरू होने के बीच ‘जांच’ का समय होता है। जो 380 दिन (मध्य प्रदेश के लिए) का आंकड़ा दिया गया है, वह मुख्य रूप से अदालती कार्यवाही (Trial) में लगने वाला समय है।

    त्वरित निपटान का लक्ष्य: इन विशेष न्यायालयों का उद्देश्य ही यह है कि विचारण की इस अवधि को कम किया जाए ताकि पीड़ितों को वर्षों तक इंतजार न करना पड़े।

मंत्री बोले- जितना जल्दी न्याय मिलेगा, तभी हम कहेंगे न्याय हुआ पॉक्सो के मामलों के जल्द निपटारे पर मप्र के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने कहा- न्याय जितने जल्दी मिले, तभी हम कह सकते हैं कि न्याय हुआ। अन्यथा जितना देरी होगी उतना अन्याय की दिशा में हम बढे़ेंगे। मप्र के लिए हमें यह संतोष है कि जो शिकायतें हुई उनका जितना जल्दी हो सके न्याय दिलाने का प्रयास किया है।

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