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अपराधियों को तोड़ने 6 नए फॉरेंसिक सेंटर से हाईटेक होगी बिहार पुलिस

UB News Network
Last updated: जनवरी 20, 2026 6:07 अपराह्न
By : UB News Network
Published on : 3 महीना पहले
अपराधियों को तोड़ने 6 नए फॉरेंसिक सेंटर से हाईटेक होगी बिहार पुलिस
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पटना.

बिहार में अपराधियों के लिए अब बच निकलना आसान नहीं होगा। पुलिस महकमा मुकदमों की जांच को और अधिक वैज्ञानिक, तेज और मजबूत बनाने की दिशा में बड़े कदम उठा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार पुलिस को हाईटेक बनाने की कड़ी में राज्य में छह नए फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) स्थापित किए जाने की तैयारी है। इसके साथ ही साल के अंत तक बिहार में एक दर्जन के करीब फॉरेंसिक जांच केंद्र कार्यरत होंगे।

छह नए जिलों में खुलेंगे एफएसएल
सीआईडी के एडीजी पारसनाथ ने सोमवार को पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि गयाजी, बेतिया, छपरा, मुंगेर, पूर्णिया और सहरसा में नए एफएसएल स्थापित किए जाएंगे। वर्तमान में राज्य में पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में चार एफएसएल कार्यरत हैं। इसके अलावा दरभंगा और रोहतास में मार्च तक एफएसएल कार्यालय शुरू होने की संभावना है।

साइबर अपराधियों पर मार्च से शिकंजा
एडीजी पारसनाथ ने बताया कि इस वर्ष मार्च तक पटना और राजगीर स्थित एफएसएल में साइबर फॉरेंसिक यूनिट की शुरुआत कर दी जाएगी। इसके बाद साइबर अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी और भी तेज हो जाएगी। डिजिटल साक्ष्यों की जांच के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड और अन्य तकनीकी अपराधों में सजा की दर बढ़ेगी।

नए कानूनों से बढ़ी एफएसएल की भूमिका
उन्होंने बताया कि 1 जुलाई 2024 से देश में लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) समेत नए आपराधिक कानूनों के बाद अधिकांश मामलों में एफएसएल रिपोर्ट अनिवार्य कर दी गई है। खासकर सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्य जरूरी हैं। अब अपराधियों को सजा दिलाने में फॉरेंसिक रिपोर्ट निर्णायक भूमिका निभा रही है।

हजारों मामलों की हो चुकी है जांच
आंकड़ों का हवाला देते हुए एडीजी ने बताया कि 2024 में 1 जुलाई से 31 दिसंबर के बीच 5,141 कांडों के 25,285 प्रदर्शों की फॉरेंसिक जांच पूरी की गई। वहीं, 2025 में अब तक 10,995 कांडों के 56,511 प्रदर्शों की जांच कर संबंधित एजेंसियों को रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा चुकी है। इससे साफ है कि बिहार में फॉरेंसिक जांच की क्षमता लगातार बढ़ रही है।

डीएनए यूनिट और संसाधनों का विस्तार
उन्होंने बताया कि मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर के लिए एक-एक डीएनए यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया है। इसके साथ ही पटना स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला के लिए भी अतिरिक्त डीएनए जांच सुविधा विकसित की जा रही है। उपकरणों के आधुनिकीकरण के लिए करीब 162 करोड़ 93 लाख रुपये का प्रस्ताव भी भेजा गया है।

मानव संसाधन को भी किया जा रहा मजबूत
वर्तमान में राज्य की एफएसएल में 44 राजपत्रित पदाधिकारी और 85 वरीय वैज्ञानिक सहायक कार्यरत हैं। इसके अलावा 89 सहायक निदेशक और 100 वरीय वैज्ञानिक सहायकों की संविदा पर नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्र सत्यापन और मेडिकल जांच की प्रक्रिया चल रही है।

आधुनिक भवन और चलंत फॉरेंसिक यूनिट
पटना के शास्त्रीनगर थाना क्षेत्र में सीआईडी को आवंटित कॉलोनी में एक अत्याधुनिक फॉरेंसिक परिसर के निर्माण का प्रस्ताव भी भेजा गया है। वहीं, राज्य के सभी 38 जिलों के लिए चलंत फॉरेंसिक इकाइयों को स्वीकृति दी गई है।
फिलहाल 51 चलंत फॉरेंसिक वाहन उपलब्ध हैं और 50 अतिरिक्त वाहनों की खरीद के लिए 212 करोड़ रुपये का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया है।

अपराधियों के लिए बढ़ेगी मुश्किल
बिहार पुलिस के इस हाईटेक अभियान से अपराधियों की पहचान, गिरफ्तारी और सजा की प्रक्रिया और तेज होगी। वैज्ञानिक साक्ष्यों के मजबूत होने से न सिर्फ जांच की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा भी और मजबूत होगा।

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