बुधवार, मई 13, 2026

विज्ञापन के लिए संपर्क करें

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in Whatsapp Telegram-plane
उदय बुलेटिन
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • स्वास्थ्य
  • अपराध
  • खेल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • मनोरंजन
  • धर्म
Reading: बालाघाट पुलिस की पहल: आत्मसमर्पित नक्सली सिलाई और ड्राइविंग सीख रहे, 14 परिवारों
Font ResizerAa
Notification
उदय बुलेटिन
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • स्वास्थ्य
  • अपराध
  • खेल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • मनोरंजन
  • धर्म
Search
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • स्वास्थ्य
  • अपराध
  • खेल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • मनोरंजन
  • धर्म
Follow US
© 2024. All Rights Reserved.

Home - देश - मध्‍य प्रदेश - जबलपुर - बालाघाट पुलिस की पहल: आत्मसमर्पित नक्सली सिलाई और ड्राइविंग सीख रहे, 14 परिवारों

बालाघाट पुलिस की पहल: आत्मसमर्पित नक्सली सिलाई और ड्राइविंग सीख रहे, 14 परिवारों

UB News Network
Last updated: मार्च 16, 2026 1:24 अपराह्न
By : UB News Network
Published on : 2 महीना पहले
बालाघाट पुलिस की पहल: आत्मसमर्पित नक्सली सिलाई और ड्राइविंग सीख रहे, 14 परिवारों
साझा करें

बालाघाट 

बालाघाट पुलिस ने नक्सलियों को समाज की मुख्य धारा में वापस लाने और नक्सली हिंसा के पीड़ितों की मदद के लिए एक खास मुहिम शुरू की है। इसके तहत आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सली अब हथियार छोड़कर सिलाई और ड्राइविंग जैसे काम सीख रहे हैं.

पुलिस लाइन में फिलहाल 10 आत्मसमर्पित नक्सली (5 पुरुष और 5 महिला) सिलाई और ड्राइविंग का प्रशिक्षण ले रहे हैं। पिछले डेढ़ महीने से चल रही इस ट्रेनिंग में ये लोग शर्ट-पेंट सिलना और जेसीबी चलाना सीख रहे हैं ताकि वे खुद का रोजगार शुरू कर सकें। इनमें सुनीता ओयाम, सुरेंद्र, राकेश और सलीता जैसे कई पूर्व नक्सली शामिल हैं।

पीड़ित परिवारों को मिला सहारा
पुलिस ने उन 14 परिवारों की भी मदद की है जिनके सदस्यों को नक्सलियों ने ‘मुखबिरी’ के शक में मार दिया था। इन परिवारों के सदस्यों को आरक्षक (कॉन्स्टेबल) के पद पर नौकरी दी गई है।

सुमित उईके के पिता की हत्या 2002 में हुई थी। सुमित बताते हैं कि उन्हें पहले पुलिस की नौकरी से डर लगता था, लेकिन अब वे खुश हैं।

संजय कुमार पुसाम सिर्फ 8वीं तक पढ़े हैं, इन्होंने कभी सोचा नहीं था कि पिता की मौत के बाद उन्हें पुलिस विभाग में काम करने का मौका मिलेगा।

पुलिस अधीक्षक की पहल
एसपी आदित्य मिश्रा के नेतृत्व में चल रही इस पहल का मकसद हिंसा से प्रभावित लोगों का पुनर्वास करना और उन्हें आर्थिक सुरक्षा देना है। नौकरी पाने वालों में तेजाबसिंह, अनिल मेरावी, निशा राउत और डिलेश्वरी जैसे 14 लोग शामिल हैं, जो अब पुलिस बल का हिस्सा बनकर समाज की सेवा कर रहे हैं।

TAGGED:Madhya PradeshNaxal
ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
पिछली ख़बर भारत ने होर्मुज से अपने जहाज को सुरक्षित निकाला, ईरान को किया मनाने में सफल; जयश भारत ने होर्मुज से अपने जहाज को सुरक्षित निकाला, ईरान को किया मनाने में सफल; जयश
अगली ख़बर मध्य प्रदेश में 2 दिन तेज गर्मी, 18-19 मार्च को बारिश,  ग्रीन नेट से धूप से बचाव मध्य प्रदेश में 2 दिन तेज गर्मी, 18-19 मार्च को बारिश, ग्रीन नेट से धूप से बचाव

ये भी पढ़ें

छत्तीसगढ़ में बच्चों के लिए तैयार हो रहा बाल-अनुकूल शिक्षा वातावरण, मित्रता और आ

छत्तीसगढ़ में बच्चों के लिए तैयार हो रहा बाल-अनुकूल शिक्षा वातावरण, मित्रता और आ

पंजाब सरकार चलाने के आरोपों पर बोले संजय सिंह—क्या उन्हें हक नहीं कि…?

पंजाब सरकार चलाने के आरोपों पर बोले संजय सिंह—क्या उन्हें हक नहीं कि…?

टेंडर विवाद बना हिंसा की वजह: सतना में गोली चली, मारपीट का वीडियो CCTV में कैद

टेंडर विवाद बना हिंसा की वजह: सतना में गोली चली, मारपीट का वीडियो CCTV में कैद

महतारी वंदन योजना के माध्यम से मातृशक्ति हो रही सशक्त, 42 हजार से अधिक श्रद्धालु

महतारी वंदन योजना के माध्यम से मातृशक्ति हो रही सशक्त, 42 हजार से अधिक श्रद्धालु

सोने की आड़ में करोड़ों की ठगी! रान्या राव की हैरान कर देने वाली कहानी

सोने की आड़ में करोड़ों की ठगी! रान्या राव की हैरान कर देने वाली कहानी

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in Whatsapp Telegram-plane
Uday Bulletin Logo
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?