सोमवार, अप्रैल 27, 2026

विज्ञापन के लिए संपर्क करें

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in Whatsapp Telegram-plane
उदय बुलेटिन
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • स्वास्थ्य
  • अपराध
  • खेल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • मनोरंजन
  • धर्म
Reading: आर्मी जवान का तलाक केस हाईकोर्ट में पहुंचा, पत्नी के प्रेगनेंसी को लेकर उठे सवाल
Font ResizerAa
Notification
उदय बुलेटिन
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • स्वास्थ्य
  • अपराध
  • खेल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • मनोरंजन
  • धर्म
Search
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • स्वास्थ्य
  • अपराध
  • खेल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • मनोरंजन
  • धर्म
Follow US
© 2024. All Rights Reserved.

Home - देश - मध्‍य प्रदेश - जबलपुर - आर्मी जवान का तलाक केस हाईकोर्ट में पहुंचा, पत्नी के प्रेगनेंसी को लेकर उठे सवाल

आर्मी जवान का तलाक केस हाईकोर्ट में पहुंचा, पत्नी के प्रेगनेंसी को लेकर उठे सवाल

UB News Network
Last updated: फ़रवरी 6, 2026 2:53 अपराह्न
By : UB News Network
Published on : 3 महीना पहले
आर्मी जवान का तलाक केस हाईकोर्ट में पहुंचा, पत्नी के प्रेगनेंसी को लेकर उठे सवाल
साझा करें

जबलपुर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से एक ऐसा फैसला आया है, जिसने शादी, तलाक और पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों में नई बहस छेड़ दी है. मामला एक आर्मी जवान और उसकी पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे तलाक विवाद का है, जिसमें पत्नी ने बच्चे के DNA टेस्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया कि यह मामला बच्चे की वैधता पर सवाल उठाने का नहीं, बल्कि पत्नी पर लगाए गए आरोपों की जांच से जुड़ा है.

हाईकोर्ट ने क्या कहा, क्यों खारिज की पत्नी की याचिका?
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की एकलपीठ में जस्टिस विवेक जैन ने पत्नी की याचिका खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के DNA टेस्ट के आदेश को सही ठहराया. कोर्ट ने साफ कहा कि यह जांच किसी भी तरह से बच्ची को अवैध या नाजायज ठहराने के लिए नहीं है और न ही उसकी कानूनी पहचान पर इसका कोई असर पड़ेगा. कोर्ट का मकसद सिर्फ यह देखना है कि पत्नी पर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है.

DNA सैंपल से इनकार किया तो क्या होगा?
 खबर के मुताबिक, हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि अगर पत्नी DNA सैंपल देने से इनकार करती है, तो फैमिली कोर्ट को पूरा अधिकार होगा कि वह भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114(h) या नए BSA 2023 के तहत उसके खिलाफ प्रतिकूल अनुमान लगाए. यानी सैंपल न देने का फायदा पत्नी को नहीं मिलेगा.

पत्नी ने डीएनए नहीं दिया तो?
कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी डीएनए नमूने देने से इनकार करती है, तो फैमिली कोर्ट भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114(h) या बीएसए 2023 के संबंधित प्रावधानों के तहत पत्नी के खिलाफ अनुमान लगा सकती है। यानी कि अगर पत्नी नमूने देने से इनकार करती है, तो कोर्ट यह मान लेगा कि पति जो कह रहा है, वही सच है। क्योंकि इस टेस्ट का मकसद पत्नी के ‘अफेयर’ की जांच करना है, बच्ची को ‘नाजायज’ साबित करना या उसे नीचा दिखाना नहीं।

चार दिन बाद ही पत्नी हुई गर्भवती
यह मामला व्यभिचार के आरोप पर दायर तलाक याचिका से संबंधित है। पति बच्चे की पितृत्व जानने या भरण-पोषण की देनदारी से इनकार करने के उद्देश्य से डीएनए टेस्ट नहीं चाहता है। पति का कहना है कि वह भारतीय सेना में है और पत्नी ने उसे अक्टूबर 2015 में बुलाया था। पति ने कोर्ट से कहा कि वह छुट्टी पर घर आए और सिर्फ 4 दिन में पत्नी ने कह दिया कि वह प्रेग्नेंट है।। पति के अनुसार, डॉक्टर 4 दिन में प्रेग्नेंसी की स्थिति नहीं बता सकते, यह नामुमकिन होता है। इसके लिए इंतजार करना होता है। दूसरी तरफ बच्चा भी तय समय से पहले और उस समय पैदा हुआ, जब वह घर पर नहीं थे। इसलिए पति ने बच्चे का डीएनए कराने की मांग की है। 

पत्नी के वकील की दलील
पत्नी के वकील अनुज पाठक ने तर्क दिया कि बच्चे का डीएनए टेस्ट उसकी निजता, स्वायत्तता और पहचान के अधिकार का उल्लंघन करेगा और उसकी वैधता पर अनुचित रूप से संदेह पैदा करेगा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 112 एक वैध विवाह के दौरान पैदा हुए बच्चे की वैधता का एक मजबूत अनुमान स्थापित करती है, और डीएनए टेस्ट नियमित रूप से नहीं दिए जाने चाहिए। वकील ने कहा कि अदालतों को बच्चे के सर्वोत्तम हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी बच्चे को इस तरह से पारिवारिक विवादों में नहीं घसीटा जाना चाहिए जिससे उसके भविष्य पर कलंक लगे।

पति के वकील ने भी दिए तर्क
पति के वकील शीतल तिवारी ने प्रतिवाद किया कि यह चुनौती कार्यवाही को रोकने और महत्वपूर्ण तथ्यों को दबाने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि पति भारतीय सेना में तैनात है और कुछ महीनों में एक बार घर आ पाता है, जबकि पत्नी मध्य प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल है। पति के वकील ने दावा किया कि मेडिकल सलाह के अनुसार, गर्भधारण के चार दिनों के भीतर गर्भावस्था का पता नहीं लगाया जा सकता है। इस पर कोर्ट का भी मानना है कि जब पति पुख्ता सबूत दे रहा है कि वह उस वक्त पत्नी के साथ नहीं था, तो सच का पता लगाने के लिए DNA टेस्ट कराना गलत नहीं है।

‘4 दिन में प्रेग्नेंसी’ का दावा क्यों बना सबसे बड़ा सवाल
मामले की सबसे चौंकाने वाली बात वही है, जिसने पूरे केस की दिशा बदल दी. पति ने कोर्ट को बताया कि वह भारतीय सेना में पदस्थ है और अक्टूबर 2015 में पत्नी के बुलाने पर घर आया था. लौटने के सिर्फ चार दिन बाद पत्नी ने उसे बताया कि वह गर्भवती है. कोर्ट ने माना कि मेडिकल साइंस के हिसाब से चार दिन में प्रेग्नेंसी का पता चलना बेहद संदिग्ध है. इसके अलावा बच्ची का जन्म भी अक्टूबर 2015 के करीब आठ महीने बाद हुआ, जिससे पति-पत्नी के साथ न होने की दलील और मजबूत हो जाती है.

तीन तलाक याचिकाएं और 10 साल का विवाद
यह कोई नया विवाद नहीं है. पहली तलाक याचिका 2019 में दायर हुई थी, जिसे आपसी सहमति से तलाक के आश्वासन पर वापस ले लिया गया. दूसरी याचिका भी 2019 में दाखिल हुई, लेकिन पत्नी दूसरी मोशन में पेश नहीं हुई और मामला 2 मार्च 2021 को बंद हो गया. इसके बाद 2021 में तीसरी तलाक याचिका दायर की गई, जो अब तक लंबित है और इसी में DNA टेस्ट की मांग की गई.

कोर्ट का साफ संदेश
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि जब तलाक का आधार व्यभिचार हो, पति ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बच्चे की वैधता या भरण-पोषण का मुद्दा न हो, तो DNA टेस्ट का आदेश देना कानूनन गलत नहीं है. यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक अहम नजीर माना जा रहा है.

TAGGED:Madhya Pradeshpregnant
ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
पिछली ख़बर लोकसभा में हंगामे के बाद कार्यवाही स्थगित, 9 फरवरी तक नहीं होगी बैठक लोकसभा में हंगामे के बाद कार्यवाही स्थगित, 9 फरवरी तक नहीं होगी बैठक
अगली ख़बर “आप 75 के हो गए,” पर पीएम मोदी ने जवाब दिया, “अभी तो 25 बाकी हैं” “आप 75 के हो गए,” पर पीएम मोदी ने जवाब दिया, “अभी तो 25 बाकी हैं”

ये भी पढ़ें

छत्तीसगढ़ में बच्चों के लिए तैयार हो रहा बाल-अनुकूल शिक्षा वातावरण, मित्रता और आ

छत्तीसगढ़ में बच्चों के लिए तैयार हो रहा बाल-अनुकूल शिक्षा वातावरण, मित्रता और आ

पंजाब सरकार चलाने के आरोपों पर बोले संजय सिंह—क्या उन्हें हक नहीं कि…?

पंजाब सरकार चलाने के आरोपों पर बोले संजय सिंह—क्या उन्हें हक नहीं कि…?

टेंडर विवाद बना हिंसा की वजह: सतना में गोली चली, मारपीट का वीडियो CCTV में कैद

टेंडर विवाद बना हिंसा की वजह: सतना में गोली चली, मारपीट का वीडियो CCTV में कैद

महतारी वंदन योजना के माध्यम से मातृशक्ति हो रही सशक्त, 42 हजार से अधिक श्रद्धालु

महतारी वंदन योजना के माध्यम से मातृशक्ति हो रही सशक्त, 42 हजार से अधिक श्रद्धालु

सोने की आड़ में करोड़ों की ठगी! रान्या राव की हैरान कर देने वाली कहानी

सोने की आड़ में करोड़ों की ठगी! रान्या राव की हैरान कर देने वाली कहानी

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in Whatsapp Telegram-plane
Uday Bulletin Logo
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?