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RSS की बड़ी बैठक हरियाणा में, एजेंडे में चुनावी तैयारी और UGC विवाद

UB News Network
Last updated: मार्च 13, 2026 12:02 अपराह्न
By : UB News Network
Published on : 1 महीना पहले
RSS की बड़ी बैठक हरियाणा में, एजेंडे में चुनावी तैयारी और UGC विवाद
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पनीपत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था ‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा’ की तीन दिवसीय बैठक हरियाणा के पनीपत में शुक्रवार से शुरू हो रही है. संघ के टॉप लीडरशिप की इस बैठक में आरएसएस के 100 साल के कार्य विस्तार की समीक्षा के साथ-साथ आगामी 100 सालों के कार्यक्रमों-अभियानों की रूपरेखा तैयार की जाएगी. इतना ही नहीं संघ के एजेंडे में 2026 और 2027 की चुनाव से लेकर यूजीसी विवाद पर मंथन किए जाने की संभावना है।

आरएसएस की कार्य पद्धति में निर्णय करने वाली सर्वोच्च ईकाई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा है. इसकी साल में महज एक बार बैठक होती है. संघ के शताब्दी वर्ष पूरे होने के बाद एबीपीएस की बैठक इस बार हरियाणा के पनीपत जिले की समालखा स्थित माधव सृष्टि परिसर में हो रही है।

संघ की तीन दिनों तक चलने वाली महत्वपूर्ण बैठक के लिए सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले पहुंच चुके हैं. क्षेत्र-प्रांत संघचालक, कार्यवाह, प्रचारक और संघ प्रेरित 32 संगठनों के पदाधिकारी शामिल होंगे. देशभर से संघ और संघ प्रेरित संगठनों के 1487 प्रतिनिधि शिरकत करेंगे। 

RSS की हरियाणा में तीन दिन की बैठक
संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि बैठक का औपचारिक आगाज शुक्रवार सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की उपस्थिति में होगा, जो रविवार तक चलेगी. बैठक में आरएसएस से जुड़े भारतीय मजदूर संघ, विश्व हिंदू परिषद, एबीवीपी, सेवा भारती और भारतीय किसान संघ जैसे संगठन शामिल होंगे. इस दौरान संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों,सामाजिक चुनौतियों और संगठन विस्तार की आगामी रूपरेखा पर गहन मंथन किया जाएगा।

सुनील आंबेकर ने कहा कि संघ की चर्चाओं में सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संत शिरोमणि रविदास की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों को भी शामिल किया जाएगा. माना जा रहा कि बैठक में शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे कार्यक्रमों की समीक्षा होगी. इसके साथ ही अगले वर्ष की योजनाओं पर चर्चा होगी और  जिन्हें पिछली बेंगलुरू बैठक में जिम्मेदारियों सौंपी गई थी, उन्होंने उसे कितना पूरा किया, इस पर भी चर्चा होगी. पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारियां भी दी जाएंगी।

संघ अगले एक साल का बनाएगा प्लान
RSS के शताब्दी वर्ष के जनसंपर्क अभियान के तहत, ‘गृह संपर्क अभियान’ ने कई राज्यों में 10 करोड़ से अधिक परिवारों से पहले ही संपर्क स्थापित कर लिया है. पिछले एक वर्ष में 5,500 से अधिक नई RSS शाखाएं शुरू की गई हैं. शताब्दी वर्ष की गतिविधियों के हिस्से के रूप में पूरे देश में लगभग 97 प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे. बैठक के अंतिम दिन संडे को दत्तात्रेय होसबाले मीडिया को संबोधित करेंगे और बैठक लाए गए प्रस्तावों और निर्णयों का विवरण साझा करेंगे।

संघ के ‘पंच परिवर्तन’ प्रोजेक्ट पर फिर से ज़ोर दिए जाने की संभावना है. इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद सामाजिक सद्भाव, पारिवारिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण, अपनी पहचान, आत्मनिर्भरता और नागरिक कर्तव्यों को बढ़ावा देना है।

RSS के एजेंडे में UGC से चुनाव तक
संघ सूत्रों के मुताबिक एबीपीएस की बैठक में यूजीसी के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो सकती है. देश के शिक्षण संस्थानों में दलित और पिछड़ी जाति के छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने के लिए यूजीसी ने नए नियम बनाए थे, जिसे लेकर विरोध शुरू हो गया था. संघ की कोशिश है कि यूजीसी के नियमों लागू करने का स्वरूप इस कदर बनाया जाए, जिससे सामाजिक विरोध न हो सके। 

यूजीसी के नियम को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. एक तरफ उच्च जाति के समुदायों को लगता है कि इन नियमों से उनके साथ ज्यादती होगी और कानून का गलत इस्तेमाल हो सकता है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट के द्वारा अदालतों द्वारा इन पर रोक लगाए जाने से दलितों के बीच जवाबी लामबंदी शुरू हो गई है।

ओबीसी और दलित समूह कथित तौर पर नाराज माने जा रहे हैं जबकि ये समुदाय महत्वपूर्ण वोट बैंक बनाते हैं, जिन्हें बीजेपी लुभाने की कोशिश कर रही है. 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए, इस मुद्दे ने पार्टी को एक मुश्किल स्थिति में डाल दिया है. ऐसे में सूत्रों की माने तो संघ की इस अहम बैठक में यूजीसी के नए नियमों पर चर्चा हो सकती है. संघ इस मुद्दे पर कोई दिशा दे सकता है। 

2026 में देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव है, जिसमें असम, बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी शामिल हैं. ऐसे में संघ की बैठक में इन राज्यों के चुनाव को लेकर भी चर्चा हो सकती है. वैचारिक रूप से बीजेपी से बंगाल, केरल व तमिलनाडु को अहम माना जाता है और सियासी तौर पर पार्टी अभी तक इन राज्यों में सत्ता में नहीं आ सकी है. इस तरह संघ की बैठक में चुनावी राज्यों के लिए मंथन कर रणनीति बनाई जा सकती है।

घुसपैठ के मुद्दे पर भी क्या होगी चर्चा
पड़ोसी मुल्कों से गैरकानूनी माइग्रेशन के चलते देश के कुछ राज्यों में हो रहे जनसंख्या असंतुलन को लेकर आरएसएस चिंतित है.घुसपैठ के कारण देश के कई राज्यों की जनसंख्या की स्थिति बदल रही है. असम और पश्चिम बंगाल में पहले से ही अवैध घुसपैठ का मुद्दा शुरू से ही रहा है. इन दोनों राज्यों में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं. बीजेपी इन राज्यों में घुसपैठ को मुद्दा बनाने में जुटी है. ऐसे में एबीपीएस की चर्चाओं में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने के मुद्दे पर भी बात हो सकती है। 

एबीपीएस मीटिंग के दौरान कई ‘राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों’ पर एक प्रस्ताव पारित करने की भी उम्मीद है. हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यूजीसी और एनआरसी पर कोई प्रस्ताव आएगा या नहीं, लेकिन संघ की यह सबसे महत्वपूर्ण बैठक है. इसमें सरसंघचालक मोहन भागवत और दूसरे नंबर के नेता दत्तात्रेय होसबले सहित सभी सह सरकार्यवाह सहित अहम पदाधिकारियों की उपस्थित होगी। 

संघ के एबीपीएस बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी बैठक में शामिल हो सकते हैं. इस दौरान अहम मुद्दों पर चर्चा करने साथ लिए गए फैसले न केवल अगले वर्ष के लिए संघ को दिशा देते हैं बल्कि बीजेपी की केंद्र और राज्य सरकारों को यह भी संकेत देते हैं कि वह नीतिगत स्तर पर क्या लागू करना चाहता है।

 

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