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कारोबार करना होगा आसान! चंडीगढ़ में नया एक्ट लागू, सरकारी कामकाज में आएगी तेजी

UB News Network
Last updated: मार्च 17, 2026 9:17 अपराह्न
By : UB News Network
Published on : 1 महीना पहले
कारोबार करना होगा आसान! चंडीगढ़ में नया एक्ट लागू, सरकारी कामकाज में आएगी तेजी
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चंडीगढ़
यूटी प्रशासन शहर में कारोबार को और आसान बनाने के लिए जल्द एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। पंजाब की तर्ज पर जल्द ही इज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट लागू करने की तैयारी है। इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को बड़ी राहत मिलेगी। उद्योग विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मसौदा तैयार किया जा रहा है और एक्ट को अगले महीने लागू कर दिया जाएगा। इससे उद्योगों, व्यापारियों और स्टार्टअप्स को सरकारी प्रक्रियाओं में होने वाली देरी और जटिलताओं से छुटकारा मिलेगा।

व्यापार शुरू करने, लाइसेंस प्राप्त करने, भवन अनुमति, प्रदूषण से संबंधित मंजूरी, बिजली और पानी कनेक्शन जैसी कई प्रक्रियाएं सरल हो जाएंगी और पारदर्शी आएगी। तय समय सीमा के भीतर अनुमति या सेवा प्रदान करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी होगी। प्रस्तावित एक्ट के तहत नए एमएसएमई उद्यमों को सेल्फ-डिक्लेरेशन के आधार पर सर्टिफिकेट ऑफ इन-प्रिंसिपल अप्रूवल जारी किया जाएगा। यह प्रमाणपत्र तीन वर्ष छह माह तक मान्य रहेगा और इस अवधि में उद्यमों को कई तरह की नियामकीय मंजूरियों और नियमित निरीक्षणों से छूट मिलेगी।

प्रशासन इस एक्ट को डीरेगुलेशन 2.0 नामक व्यापक सुधार कार्यक्रम के साथ लागू करेगा। भूमि उपयोग, निर्माण, बिजली-पानी जैसी सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल सेवाओं से जुड़े कई नियमों को सरल बनाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार यह सुधार मार्च से सितंबर 2026 के बीच चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे और सभी विभागों को समयबद्ध लक्ष्य दिए गए हैं।

सीएलयू की अनिवार्यता समाप्त किया जाएगा
सुधारों के तहत चेंज इन लैंड यूज की अनिवार्यता समाप्त करने का भी प्रस्ताव है। इससे जमीन मालिकों, खासकर किसानों को लंबी प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी। साथ ही भूमि उपयोग योजना में परमिटेड अनटिल प्रोहिबिटेड सिद्धांत अपनाने की योजना है, जिसके तहत मास्टर प्लान तैयार होने तक भी निर्माण संबंधी अनुमतियां दी जा सकेंगी। औद्योगिक क्लस्टरों में औद्योगिक भूमि उपयोग को भी बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जाएगा और एमएसएमई के लिए विशेष प्रविधान किए जाएंगे। इन बदलावों को 30 जून 2026 तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं को तेजी देने के लिए बिल्डिंग परमिट प्रक्रियाओं को सरल किया जाएगा और अग्नि सुरक्षा मानकों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुसार तार्किक बनाया जाएगा। यह सुधार 31 मई 2026 तक लागू करने की योजना है, जिससे बिल्डरों और संपत्ति मालिकों को मंजूरियां जल्दी मिल सकेंगी।

कई अहम फैसले प्रस्तावित
व्यापारियों और उद्यमियों के लिए भी कई अहम फैसले प्रस्तावित हैं। 30 अप्रैल 2026 तक डुअल लाइसेंसिंग व्यवस्था खत्म करने, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से जुड़े नियमों को उदार बनाने तथा लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत लाइसेंस प्रक्रिया को सरल करने की योजना है। औद्योगिक क्लस्टरों में मंजूरियों के लिए राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण को एकल नोडल एजेंसी बनाया जाएगा, जबकि एमएसएमई को सेल्फ-डिक्लेरेशन के आधार पर पूर्व-स्थापना मंजूरी दी जाएगी और नियमित निरीक्षणों से संरक्षण मिलेगा। इसके अलावा प्रशासन ने 31 मार्च 2026 तक बिजली कनेक्शन देने की प्रक्रिया तेज करने का लक्ष्य भी तय किया है, जिससे नए घरों और कारोबारियों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों का समाधान हो सके।

पर्यावरण मंजूरी के लिए पोर्टल किया जाएगा अपलोड
पर्यावरण मंजूरियों को तेजी से देने के लिए राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति और राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण की बैठकों की संख्या बढ़ाई जाएगी। साथ ही क्षतिग्रस्त वन और गैर-वन भूमि का एक लैंड बैंक बनाकर उसे पारदर्शिता के लिए पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी नियामकीय ढील देने की योजना है। निजी स्कूलों और विश्वविद्यालयों के लिए न्यूनतम भूमि स्वामित्व की अनिवार्यता हटाई जाएगी, जबकि उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए बुनियादी ढांचे और एंडोमेंट फंड से जुड़े नियमों को 31 जुलाई 2026 तक तार्किक बनाया जाएगा।

स्वास्थ्य क्षेत्र में 30 जून 2026 तक डाॅक्टरों के पंजीकरण और एनओसी प्रक्रिया को सरल करने तथा सभी स्वास्थ्य लाइसेंस के लिए एकल नोडल एजेंसी नियुक्त करने की योजना है। डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के तहत सेवाओं की समय सीमा घटाई जाएगी और राइट टू सर्विसेज के तहत आटो-अपील व्यवस्था लागू की जाएगी। इससे तय समय में सेवा न मिलने पर आवेदन स्वतः उच्च स्तर पर भेज दिया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि यह पहल विश्वास आधारित शासन और तकनीक आधारित सेवा वितरण की दिशा में बड़ा कदम है, जिससे लोगों और निवेशकों को होने वाली अनावश्यक परेशानियां कम होंगी तथा चंडीगढ़ में कारोबार और निवेश का माहौल बेहतर होगा।

 

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