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मुकाबले से नेतृत्व तक का सफर, चिन्नास्वामी में गढ़ी मेरी पहचान: अनिल कुंबले

UB News Network
Last updated: फ़रवरी 15, 2026 11:32 पूर्वाह्न
By : UB News Network
Published on : 2 महीना पहले
मुकाबले से नेतृत्व तक का सफर, चिन्नास्वामी में गढ़ी मेरी पहचान: अनिल कुंबले
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बेंगलुरु
भारत में कुछ ही ग्राउंड ऐसे हैं जो एम चिन्नास्वामी स्टेडियम जितनी यादें, जीत और दुख समेटे हुए हैं। भारत के पूर्व कप्तान अनिल कुंबले शुक्रवार को स्टेडियम की 50वीं सालगिरह मनाने के लिए स्टेडियम लौटे, और अपने करियर के बारे में बताया जो एक युवा दर्शक के तौर पर वहीं से शुरू हुआ और देश के सबसे मशहूर क्रिकेट ग्राउंड में से एक के साथ-साथ आगे बढ़ा।
कुंबले ने याद किया कि नौ साल की उम्र में वह बेंगलुरु की इस जगह पर रणजी ट्रॉफी मैच देखने के लिए पुलिस को चकमा देकर चुपके से निकल गए थे। उन्होंने याद करते हुए कहा, “मैं रोजर बिन्नी को सेंचुरी बनाते देखने आया था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मैं यहां खेलूंगा, या इंडियन कैप भी पहनूंगा।” किस्मत ने पलटा खाया, कुंबले के अपने रणजी डेब्यू में भी बिन्नी कप्तान थे, यह एक ऐसे करियर की शानदार शुरुआत थी जिसने इंडियन स्पिन के एक युग को तय किया। उन्होंने स्टेडियम को अपना दूसरा घर बताया, जहाँ क्रिकेट का हर सबक सीखा गया-एज-ग्रुप मैचों की मुश्किलों से लेकर रणजी ट्रॉफी मुकाबलों की तेज़ी तक। उन्होंने कहा, “यहीं पर मैंने मुकाबला करना, लीड करना और सपने देखना सीखा। स्टैंड्स ने गर्व, दिल टूटना और ऐसे यादगार पल देखे हैं जो हमेशा आपके साथ रहते हैं।”

 

TAGGED:Anil KumbleSports
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