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भोपाल-इंदौर समेत शहरों में टाउनशिप विकास के लिए नई गाइडलाइन, राज्य समिति करेगी अ

UB News Network
Last updated: फ़रवरी 13, 2026 9:05 पूर्वाह्न
By : UB News Network
Published on : 2 महीना पहले
भोपाल-इंदौर समेत शहरों में टाउनशिप विकास के लिए नई गाइडलाइन, राज्य समिति करेगी अ
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भोपाल
 मध्य प्रदेश में अब एकीकृत टाउनशिप बनेंगी। किसान, किसानों के समूह या निजी व्यक्ति भी शहरों के आसपास लैंड पुलिंग के जरिये भूमि लेकर टाउनशिप बना सकेंगे। परियोजना के 15 प्रतिशत भू-भाग पर उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और एलआइजी श्रेणी के आवास बनाने होंगे।

किफायती आवास बनाने पर अलग से अनुदान मिलेगा। विकासकर्ता को नगर तथा ग्राम निवेश में पंजीयन कराना होगा। ग्रीन बेल्ट जैसी पांबदियों से छूट मिलेगी। परियोजना के बीच सरकारी भूमि आने पर आठ हेक्टेयर तक छूट दी जा सकेगी।
नियम अधिसूचित कर लागू कर दिए हैं

नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने  नियम अधिसूचित कर लागू कर दिए हैं। प्रदेश में शहरीकरण को लेकर बढ़ते दबाव और बेतरतीब विकास को व्यवस्थित करने के लिए सरकार अब एकीकृत टाउनशिप को बढ़ावा देगी। इसके लिए नियम लागू कर दिए हैं, जो विकास प्राधिकरण सहित अन्य हाउसिंग एजेंसियों पर भी लागू होंगे।

10 से 20 हेक्टेयर न्यूनतम भूमि की शर्त

नियमों के अनुसार पांच लाख से कम जनसंख्या वाले नगरों में एकीकृत टाउनशिप के लिए न्यूनतम 10 हेक्टेयर भूमि आवश्यक होगी। पांच लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में यह सीमा 20 हेक्टेयर तय की गई है।

स्थानीय निकाय सीमा या योजना क्षेत्र में 40 हेक्टेयर या अधिक क्षेत्रफल वाली परियोजनाओं के लिए कम से कम 30 मीटर चौड़ी सड़क अनिवार्य होगी। बड़े शहरों में विकास योजना सड़क की चौड़ाई 24 मीटर निर्धारित की गई है।

66 वर्गमीटर तक अफोर्डेबल आवास का प्रावधान

नियमों में अफोर्डेबल हाउसिंग के तहत अधिकतम 66 वर्गमीटर तक के आवास निर्माण की अनुमति दी गई है। परियोजना स्थल एक ही स्थान पर होना चाहिए। केवल राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग या प्रमुख जिला मार्ग से विभाजित स्थिति में छूट रहेगी।

डेवलपर के पंजीयन के लिए संचालक नगर एवं ग्राम निवेश को पंजीयन अधिकारी बनाया गया है। आवेदन ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। 15 दिन के भीतर आवेदन स्वीकृत या निरस्त किया जाएगा। निरस्तीकरण की स्थिति में 20 प्रतिशत कटौती के बाद शुल्क वापस होगा।

पंजीयन शुल्क 50 हजार, नवीनीकरण 25 हजार

पंजीयन शुल्क 50 हजार रुपए और नवीनीकरण शुल्क 25 हजार रुपए तय किया गया है। पंजीयन पूरे राज्य में मान्य रहेगा। डेवलपर को शपथ पत्र देना होगा कि वह किसी आपराधिक मामले में दोषी नहीं है।

पांच लाख से अधिक जनसंख्या वाले जिलों में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित होगी। इसमें संबंधित विभागों के प्रमुख अधिकारी सदस्य होंगे। अन्य जिलों में कलेक्टर अध्यक्ष होंगे और संबंधित स्थानीय अधिकारी सदस्य रहेंगे।

बड़े जिलों में नगर एवं ग्राम निवेश संचालनालय नोडल एजेंसी होगा, जबकि अन्य में संयुक्त संचालक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।

भूमि अधिग्रहण में प्रशासनिक सहयोग का प्रावधान

डेवलपर को कम से कम 80 प्रतिशत भूमि स्वयं प्राप्त करनी होगी। शेष भूमि के लिए आवश्यकता होने पर प्रशासनिक सहयोग लिया जा सकेगा। पारस्परिक सहमति के माध्यम से भूमि एकत्र करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

यहां नियम लागू नहीं

बनक्षेत्र के नदी-ताला, तालाब, बांध आदि राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य। रक्षा संपदा क्षेत्र, छावनी बोई। अधिसूचित पर्यावरण ईको संवेदनशील क्षेत्र। खदान, एसईजेड वन्यजीव गलियारा। ऐतिहासिक पुरा स्थलों से प्रभावित स्थल। रेलवे भूमि या जिसे राज्य सरकार ने प्रतिबंधित किया।

यह करना अनिवार्य

    टाउनशिप डेगालपर का टीएंडसीपी में पंजीयन।
    पंजीयन शुल्क 50000, नवीनीकरण शुल्क 25000 व प्रमाण-पत्र की वैधता 5 वर्ष जैसी व्यवस्थाएं लागू।
    कुल क्षेत्र का 2.5%, ग्रीन कवर।
    टाउनशिप में कुल क्षेत्रफल का 10%, पार्क और खुला क्षेत्र राना अनिवार्य।
    15% ईडबल्यूएस-निम्न आय वर्ग के लिए रिजर्व।

कोई भी व्यक्ति या किसानों का समूह टाउनशिप विकसित कर सकेगा

अभी तक टाउनशिप का विकास कालोनाइजरों तक सीमित था, लेकिन अब कोई भी व्यक्ति या किसानों का समूह टाउनशिप विकसित कर सकेगा। इन पर कालोनाइजर एक्ट के प्रविधान लागू होंगे। नागरिकों को पेयजल, बिजली, सड़क, नाली सहित सभी सुविधाएं देनी होंगी।
निजी भूमि का आपसी सहमति से होगा अधिग्रहण

टाउनशिप विकसित करने के लिए यदि भूमि कम पड़ती है और वहां सरकारी भूमि उपलब्ध है तो वह आठ हेक्टेयर की सीमा में उपलब्ध कराई जा सकेगी। बीच में यदि निजी भूमि आती है तो विकासकर्ता सरकार से अनुरोध कर आपसी सहमति के आधार पर अधिग्रहण करा सकेंगे।
टाउनशिप का विकास अधिकतम तीन चरण में करना होगा

निर्धारित शुल्क चुकाकर उन्हें पंजीयन भी कराना होगा। टाउनशिप का विकास अधिकतम तीन चरण में करना होगा। प्रत्येक चरण के लिए तीन वर्ष रखे जाएंगे। दूसरे चरण का काम तभी प्रारंभ किया जा सकेगा, जब पहले चरण का काम कम से कम 50 प्रतिशत पूरा हो जाए।
पांच लाख से कम आबादी क्षेत्र के लिए दस हेक्टेयर भूमि

नियम में स्पष्ट किया गया है कि पांच लाख से कम आबादी वाले शहरों के आसपास टाउनशिप के लिए कम से कम दस हेक्टेयर भूमि आवश्यक होगी। पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए यह 20 हेक्टेयर रहेगी। मार्ग चौड़ाई 24.0 मीटर से कम न हो।
मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई 30.0 मीटर रखनी होगी

40 हेक्टेयर या उससे अधिक क्षेत्र वाले टाउनशिप में मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई 30.0 मीटर रखनी होगी। पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में टाउनशिप के विकास की अनुमति राज्य स्तर से लेनी होगी।

इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में साधिकार समिति रहेगी। बाकी के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता वाली साधिकार समिति देगी। आवेदन करने पर 60 दिन के अंदर अनुमति देनी होगी।

 

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