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मलेशिया दौरे से PM मोदी भारत को दिलाएंगे सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ में बड़ा लाभ

UB News Network
Last updated: फ़रवरी 7, 2026 9:02 पूर्वाह्न
By : UB News Network
Published on : 3 महीना पहले
मलेशिया दौरे से PM मोदी भारत को दिलाएंगे सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ में बड़ा लाभ
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नई दिल्ली.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल से दो दिन के लिए (7-8 फरवरी 2026) मलेशिया की यात्रा पर जा रहे हैं. यह यात्रा दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ एलीमेंट्स (REE) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नए दरवाजे खोलने का काम करेगी. हाल ही में यूनियन बजट 2026 में सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और रेयर अर्थ कॉरिडोर्स की घोषणा के बाद यह यात्रा और भी खास हो गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत की सप्लाई चेन मजबूत होगी, नौकरियां बढ़ेंगी और चीन पर निर्भरता कम होगी.

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) कई बार कह चुके हैं कि कि रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग से सेल्फ-रिलायंस बढ़ेगी और चीन पर निर्भरता कम होगी. मलेशिया के साथ टेक्नोलॉजी शेयरिंग से यह आसान होगा. बता दें कि वैष्णव क्रिटिकल मिनरल्स पर काम कर रहे हैं. बेंचमार्क मिनरल इंटेलिजेंस (Benchmark Mineral Intelligence) में रेयर अर्थ एक्सपर्ट और रिसर्च मैनेजर नेहा मुखर्जी (Neha Mukherjee) ने भारत की नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन की तारीफ की है और कहा है कि मलेशिया जैसे पार्टनर्स से डाइवर्सिफिकेशन तेज होगा, जिससे चीन पर से निर्भरता घटेगी.

कितना महत्वपूर्ण है मलेशिया?

पीएम मोदी और मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम के बीच बातचीत के केंद्र में अन्य मुद्दों के साथ सेमीकंडक्टर पर गहरा सहयोग भी होगा. मलेशिया सेमीकंडक्टर का बड़ा हब है, जहां दुनिया की 12-15 फीसदी REE प्रोसेसिंग होती है. भारत यहां से तकनीक और निवेश ले सकता है. बजट में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए 40,000 करोड़ रुपये का ऐलान हुआ है, जो इंडस्ट्री-लेड रिसर्च और ट्रेनिंग पर फोकस करेगा. इससे भारत में सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट, मटेरियल और फुल स्टैक आईपी डेवलप होगा.

मलेशिया रेयर अर्थ पर भी बड़ा जोर देता है. मलेशिया में लिनास प्लांट दुनिया का बड़ा REE प्रोसेसर है. 2025 में लिनास में पहली बार भारी REE (जैसे डिस्प्रोसियम ऑक्साइड) का कमर्शियल उत्पादन शुरू किया, जो चीन के बाहर पहला ऐसा प्लांट है. भारत के आम बजट में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिल नाडु में डेडिकेटेड REE कॉरिडोर्स बनाने का प्लान है. यह माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगा. लक्ष्य है 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष REE परमानेंट मैग्नेट बनाना, जो EV, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस में इस्तेमाल होंगे. गौरतलब है कि यह भारत सरकार की एक बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसका नाम REPM है. इसे नवंबर 2025 में कैबिनेट ने मंजूरी दी थी, और कुल ₹7,280 करोड़ का बजट रखा गया है.
भारत को कितना फायदा?

    सप्लाई चेन मजबूत: मलेशिया से REE और सेमीकंडक्टर पार्ट्स आसानी से मिलेंगे. इससे भारत की मैन्युफैक्चरिंग स्पीड बढ़ेगी और चीन पर निर्भरता 20-30 फीसदी कम हो सकती है.

    निवेश और टेक्नोलॉजी: मलेशिया के साथ JV से 3 अरब डॉलर का राजस्व और 24,800 नौकरियां पैदा होंगी. सेमीकंडक्टर मार्केट 2026 तक 64 अरब डॉलर और 2030 तक 110 अरब डॉलर पहुंचेगा.

    EV और क्लीन एनर्जी: REE से EV बैटरी और मोटर सस्ते होंगे. मलेशिया 2030 तक EV प्रोडक्शन 15% बढ़ाना चाहता है, जिसमें भारत मदद कर सकता है.

    ट्रेड बूस्ट: दोनों देशों का व्यापार 25 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. MICECA समझौते की समीक्षा से निर्यात बढ़ेगा.

    स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप: रक्षा, डिजिटल टेक और हेल्थ में सहयोग बढ़ेगा, जो भारत को ASEAN में मजबूत बनाएगा.

कुल मिलाकर, यह यात्रा भारत को आत्मनिर्भर बनाने में बड़ा रोल प्ले करेगी. 2030 तक REE से 3 अरब डॉलर राजस्व और 6.5 अरब डॉलर की आर्थिक ग्रोथ हो सकती है.

भारत और मलेशिया में कितना व्यापार?
2025 में भारत-मलेशिया का कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 18-20 अरब डॉलर के आसपास रहा. भारत मलेशिया से मुख्य रूप से पाम ऑयल (करीब 2.8-3 अरब डॉलर का), इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, कंप्यूटर हार्डवेयर और अन्य वनस्पति तेल आयात करता है. वहीं भारत मलेशिया को परिष्कृत पेट्रोलियम (रिफाइंड पेट्रोलियम, करीब 2.3 अरब डॉलर), कृषि उत्पाद जैसे बफेलो मीट, और कुछ इलेक्ट्रिकल मशीनरी निर्यात करता है.

कैसे हैं दोनों देशों में ऐतिहासिक संबंध?
दोनों देशों के बीच मजबूत नींव है. 2010 में MICECA (मलेशिया-इंडिया कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट) ने व्यापार को आसान बनाया. 2015 में संबंधों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा मिला, और 2024 में इसे अपग्रेड करके कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप बना दिया गया. ये समझौते टैरिफ कम करने, निवेश बढ़ाने और नए क्षेत्रों में सहयोग का रास्ता खोलते हैं.

भारत-मलेशिया: भविष्य के प्लान क्या हैं?
दोनों देश AITIGA (ASEAN-इंडिया ट्रेड इन गुड्स एग्रीमेंट) की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि टैरिफ और मार्केट एक्सेस बेहतर हो. फोकस डिजिटल फाइनेंस, रिन्यूएबल एनर्जी, सेमीकंडक्टर और EV जैसे हाई-टेक क्षेत्रों पर है. मलेशिया में अनुमानित 16.2 मिलियन टन रेयर अर्थ एलीमेंट्स (REE) के रिजर्व हैं, जिनकी वैल्यू सैकड़ों अरब डॉलर है. ये रिजर्व भारत के साथ JV या टेक्नोलॉजी शेयरिंग के जरिए इस्तेमाल हो सकते हैं, खासकर REE प्रोसेसिंग और मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग में. व्यापार को 25 अरब डॉलर तक पहुंचाने का टारगेट है.

क्या चुनौतियां हैं सामने?
ट्रेड बैलेंस अभी असंतुलित है. मलेशिया का सरप्लस ज्यादा है, इसलिए भारत नए निर्यात सेक्टर (जैसे सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग) ढूंढ रहा है. पर्यावरणीय मुद्दे भी बड़े हैं, खासकर पाम ऑयल की खेती से जुड़े जंगल कटाई और सस्टेनेबिलिटी के सवाल. REE माइनिंग में भी पर्यावरण सुरक्षा जरूरी है, ताकि प्रदूषण न फैले. दोनों देश इन मुद्दों पर बात करके बैलेंस्ड और ग्रीन ट्रेड बढ़ाना चाहते हैं.

भारत-मलेशिया में ग्लोबल कनेक्शन?
मलेशिया ने अमेरिका के साथ REE सप्लाई चेन पर MoU साइन किया है. भारत भी इंडो-US ट्रेड डील और क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के जरिए काम कर रहा है. इससे REE और सेमीकंडक्टर की सप्लाई चेन मजबूत होगी, चीन पर निर्भरता कम होगी, और दोनों देश ग्लोबल वैल्यू चेन में बेहतर पोजिशन पा सकेंगे. कुल मिलाकर, ये रिश्ते सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी, एनर्जी और स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का मजबूत आधार बन रहे हैं.

मोदी की मलेशिया यात्रा कब है?
7-8 फरवरी 2026 को. यह उनकी तीसरी यात्रा है, जिसमें व्यापार और रणनीतिक मुद्दों पर बात होगी.
मलेशिया से सेमीकंडक्टर में भारत को क्या फायदा?
मलेशिया से टेक्नोलॉजी और निवेश मिलेगा. इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से 40,000 करोड़ रुपये लगेंगे, जो जॉब्स और आत्मनिर्भरता बढ़ाएगा.
रेयर अर्थ एलीमेंट्स क्या हैं और क्यों जरूरी?
REE विशेष धातुएं हैं जो EV, मोबाइल, डिफेंस और रिन्यूएबल एनर्जी में इस्तेमाल होती हैं. भारत इन्हें ज्यादातर चीन से आयात करता है, अब घरेलू उत्पादन बढ़ेगा.

REE कॉरिडोर्स कहां बनेंगे?
ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिल नाडु में. इससे माइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी.
चीन पर निर्भरता कैसे कम होगी?
घरेलू कॉरिडोर्स और मलेशिया जैसे पार्टनर्स से सप्लाई चेन डाइवर्सिफाई होगी, जिससे आयात 20-30% घट सकता है.

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