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इतिहास से रहस्य तक: तात्या टोपे ने जहां काटे 45 दिन, वही रकमगढ़ किला बना भूतिया

UB News Network
Last updated: जनवरी 26, 2026 5:23 अपराह्न
By : UB News Network
Published on : 3 महीना पहले
इतिहास से रहस्य तक: तात्या टोपे ने जहां काटे 45 दिन, वही रकमगढ़ किला बना भूतिया
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जयपुर
इतिहास से जुड़ा रकमगढ़ किला राजस्थान के राजसमंद जिले से करीब 10 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित रकमगढ़ किला एक छोटी पहाड़ी पर बना ऐतिहासिक किला है। यह किला आज खेड़ाना पंचायत क्षेत्र में आता है और इसका इतिहास एशिया की प्राचीनतम मीठे पानी की कृत्रिम झीलों में शामिल राजसमंद झील से भी जुड़ा हुआ है। आकार में भले ही यह किला छोटा हो, लेकिन इसका ऐतिहासिक महत्व बेहद बड़ा माना जाता है।

आज़ादी की लड़ाई में रकमगढ़ की भूमिका
जानकारी के अनुसार, इस किले का निर्माण कोठारिया रियासत के तत्कालीन राव साहब ने करवाया था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह किला उस समय चर्चा में आया, जब महान क्रांतिकारी तात्या टोपे ने यहां लगभग 45 दिनों तक अंग्रेजों से बचकर शरण ली थी। जैसे ही अंग्रेजों को इसकी भनक लगी, उन्होंने रकमगढ़ किले पर हमला कर दिया। उस समय तात्या टोपे ने कोठारिया राव जी से सहायता की गुहार लगाई, जिसके बाद कोठारिया किला और रकमगढ़ के बीच तोपों से जबरदस्त गोलाबारी हुई। आज भी किले की दीवारों पर उस संघर्ष के निशान देखे जा सकते हैं।

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का आगमन
कहते हैं कि जब झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को तात्या टोपे पर हुए हमले की जानकारी मिली, तो वह स्वयं उनकी सहायता के लिए रकमगढ़ किले तक पहुंचीं। अंग्रेजों को पीछे हटाने के बाद तात्या टोपे ने यह स्थान छोड़ दिया, लेकिन तब से यह किला उनकी वीरता, साहस और बलिदान की मूक गवाही देता हुआ आज भी खड़ा है।

किले से जुड़ी रहस्यमय कथाएं
इतिहास के साथ-साथ रकमगढ़ किला अपनी रहस्यमय कहानियों के लिए भी जाना जाता है। आबादी से दूर पहाड़ी पर स्थित होने के कारण आसपास के गांवों में यहां भूत-प्रेत होने की चर्चाएं लंबे समय से चलती आ रही हैं। ग्रामीणों का मानना है कि तात्या टोपे और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अपना सुरक्षित खजाना इसी किले की जमीन में दबाया था। इसी विश्वास के चलते कई लोगों ने वर्षों पहले किले के भीतर 5 से 10 फीट तक गहरे गड्ढे खोद डाले।

काले सांप की लोककथा
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, किले के पास दो लोक देवताओं के मंदिर हैं और कहा जाता है कि एक बहुत बड़ा काला सांप उस खजाने की रखवाली करता है। मान्यता है कि उस सांप के सिर पर धार्मिक निशान मौजूद हैं। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जिन्हें सपने में माताजी के दर्शन होते हैं, वे किले से धन निकाल सकते हैं और उस सांप से उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचता। हालांकि, बीते समय में सांप के काटने से कुछ लोगों की मौत की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, जिससे इन कहानियों को और बल मिला।

खंडहर में बदलती ऐतिहासिक धरोहर
आज यह किला कोठारिया राजपरिवार की निजी संपत्ति माना जाता है। निजी स्वामित्व और वारिसों के कारण, पुरातत्व विभाग के अधीन होने के बावजूद इसकी देखरेख पर अब तक विशेष ध्यान नहीं दिया गया है। संरक्षण के अभाव में यह किला धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है, लेकिन इसकी जर्जर दीवारें आज भी स्वतंत्रता संग्राम, वीरता और इतिहास की अनकही कहानियां बयां करती हैं। रकमगढ़ किला केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि आज़ादी की लड़ाई, वीरता और लोककथाओं का जीवंत प्रतीक है। जहां एक ओर यह तात्या टोपे और झांसी की रानी के शौर्य की याद दिलाता है, वहीं दूसरी ओर रहस्य और किंवदंतियों के कारण लोगों के लिए कौतूहल का केंद्र बना हुआ है।

TAGGED:RajasthanRamgarh Fort
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