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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कुत्ते के काटने से हुई मौत पर राज्य सरकार को भरना ह

UB News Network
Last updated: जनवरी 14, 2026 9:07 पूर्वाह्न
By : UB News Network
Published on : 3 महीना पहले
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कुत्ते के काटने से हुई मौत पर राज्य सरकार को भरना ह
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नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने  कहा कि कुत्ते के काटने और किसी बच्चे, बड़े या बूढ़े, कमजोर व्यक्ति की मौत या चोट लगने पर, वह भारी मुआवजा तय कर सकता है, जिसका भुगतान राज्य सरकार करेगी. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने मामले में सुनवाई की.

पीठ ने कहा कि 75 साल से सरकारों ने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए कुछ नहीं किया. अदालत ने कहा कि वह इस लापरवाही के लिए राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराना चाहती है. पीठ ने कहा कि “इसके लिए उनसे जवाब तलब करें.”

जस्टिस नाथ ने कहा, “हर कुत्ते के काटने और बच्चे, बड़े या बूढ़े, कमजोर व्यक्ति की मौत या चोट के लिए, हम सरकार की तरफ से भारी मुआवजा तय कर सकते हैं. पिछले 75 वर्षों से कुछ नहीं किया गया.”

एक पशु कल्याण संगठन की तरफ से वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा, माय लॉर्ड्स, आपको ऐसा करना चाहिए, आपको बिल्कुल करना चाहिए.

जस्टिस नाथ ने कहा, “साथ ही, उन सभी लोगों की जिम्मेदारी और जवाबदेही है जो दावा करते हैं कि वे कुत्तों को खाना खिला रहे हैं… उनकी रक्षा करें, उन्हें घर ले जाएं. उन्हें अपने परिसर में, अपने घर में रखें. उन्हें हर जगह कूड़ा क्यों फैलाना चाहिए और लोगों को डराना और काटना, जिससे मौत हो.”

जस्टिस मेहता ने कुत्तों द्वारा लोगों का पीछा करने के बारे में भी कहा. जस्टिस नाथ ने कहा कि कुत्ते के काटने का प्रभाव जिंदगी भर रहता है. गुरुस्वामी ने कहा कि वह भी कुत्ते के हमले का शिकार हो चुकी हैं. जस्टिस मेहता ने कहा कि भावनाएं और चिंताएं सिर्फ कुत्तों के लिए होती हैं. गुरुस्वामी ने जवाब दिया कि उन्हें इंसानों की भी उतनी ही चिंता है.

गुरुस्वामी ने कहा कि जो तरीके काम करेंगे, वे हैं कुत्तों का रोगाणुनाशन (Sterilization) और उनके साथ मानव व्यवहार. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि नियामक अपना काम करने में विफल रहे.

पीठ के सामने यह तर्क दिया गया कि ऐसे नियामक या केंद्र फंड का कम इस्तेमाल कर रहे हैं, और ABC रूल्स सिर्फ कुत्तों की जनसंख्या नियंत्रण के बारे में नहीं हैं, बल्कि ये जानवरों को बंद रखने के खिलाफ एक कोशिश है.

सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से पूछा, जब नौ साल के बच्चे को आवारा कुत्ते मार देते हैं, जिन्हें कुत्ता प्रेमी संगठन खाना खिला रहे हैं, तो किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? पीठ ने आगे पूछा, क्या इस कोर्ट को अपनी आंखें बंद कर लेनी चाहिए और चीजों को होने देना चाहिए?

पीठ ने कहा कि उसके पास केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से गंभीर सवाल हैं, वह उन्हें कब सुनेगी. पीठ ने यह भी कहा कि जानवरों से इंसानों को होने वाले दर्द का क्या, अगर जानवर इंसानों पर हमला कर दे तो कौन जिम्मेदार होगा?

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