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सार्थक जीवन जीना ही महत्वपूर्ण – राज्यपाल पटेल

UB News Network
Last updated: जनवरी 10, 2026 8:19 अपराह्न
By : UB News Network
Published on : 3 महीना पहले
सार्थक जीवन जीना ही महत्वपूर्ण – राज्यपाल पटेल
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भोपाल. 
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सही, सार्थक जीवन जीना ही महत्वपूर्ण है। भौतिक संसाधनों से क्षणिक सुख प्राप्त होता है। वास्तविक सुख आत्मीय आनंद में है। उन्होंने युवाओं का आहवान किया है कि वह भारतीय ज्ञान परपंरा के ग्रंथों और महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लें। उनकी नैतिकता, आदर्शों और जीवन मूल्यों को आचरण में आत्मसात करें। राज्यपाल पटेल शनिवार को इन्फोटेक एजुकेशन सोसायटी के IES विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में विश्वविद्यालय द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 45 शोधार्थी को पी.एच.डी., 231 को स्नातकोत्तर और 938 को स्नातक की उपाधि प्रदान की।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद गोविन्द लालजी भाई ढोलकिय, सांसद, पद्मडॉ. पी.टी वाइस चेयर पर्सन ऑफ राज्यसभा प्रेसिडेंट इण्डियन ओलम्पिक एसोसियेशन, क्रिकेटर चन्द्रकांत सीताराम पंडित, शिक्षा के क्षेत्र में श्रीमती माधुरी सहस्बुद्धे, मूर्तिकार अरुण योगीराज, जल संग्रहण में उमाशंकर पान्डे, आयुर्वेदाचार्य बालेन्दु प्रकाश, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जीवन सिंह टटियाल को मानद उपाधि प्रदान की गई।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि रामायण एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के लिए जीवन आदर्श मिलते हैं। उन्होंने राम, लक्ष्मण संवाद के प्रसंग के माध्यम से युवाओं को हमारे सांस्कृतिक जीवन मूल्यों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि दीक्षांत, शैक्षणिक जीवन का एक महत्वूपर्ण पड़ाव है। वहीं शिक्षा अनुसंधान और राष्ट्र निर्माण की दिशा में संस्थान की सतत और दीर्घकालिक यात्रा का उत्सव भी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता केवल उनकी नहीं इसमें माता-पिता का त्याग, गुरुजनों का मार्गदर्शन और समाज के किसी ना किसी व्यक्ति का योगदान है। उन्हें प्राप्त ज्ञान और सामर्थ्य से कृतज्ञता के भाव, भावना के साथ समाज और राष्ट्र सेवा में सहभागी बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में समर्थ, सशक्त, समद्ध और विकसित भारत के रूप में आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय की यह जिम्मेदारी है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न आयामों को केवल औपचारिक नहीं बल्कि प्रभावी और सार्थक रूप में लागू करें। क्योंकि शिक्षण संस्थान और शिक्षक केवल ज्ञान के केंद्र नहीं, बल्कि आने वाले कल और भावी पीढ़ी के सशक्त निर्माता होते हैं।

पशुपालन डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने कहा कि जीवन में सफलता शार्टकट से नहीं कड़ी मेहनत से आती है। मेहनत से सफलता निश्चित है। उसका कोई तोड़ नहीं है। उन्होंने कहा कि गुरूजन और माता-पिता के संरक्षण के वातावरण से बाहर निकालकर स्वतंत्र जीवन के शुभारंभ का अवसर दीक्षांत है। यहां से जीवन की दिशा तय होती है। भावी जीवन के फैसले सोच समझ कर ही लेने चाहिए।

सांसद डोलकिया ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वह स्वयं अपना ब्रान्ड बने। दूसरे ब्रान्डों का अनुकरण नहीं करें। स्वतंत्र रहे मगर स्वछंद नहीं बने। संस्कृति से जुड़े रहें। जीवन मूल्यों और सत्य का पालन करें। सांसद, पद्मडॉ. पी.टी. ऊषा ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक प्रयासों की सराहना की। राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता की शुभकामनाएं दी।

दीक्षांत समारोह में स्वागत उद्बोधन विश्वविद्यालय के चांसलर इंजीनियर बी.एस. यादव ने दिया। विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन का वाचन और विद्यार्थियों को दीक्षांत शपथ वाइस चांसलर जी.के. पाण्डेय ने दिलाई। आभार प्रदर्शन मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवांश सिंह ने किया। इस अवसर पर श्रीमती माया नरोलिया (राज्यसभा सांसद), देवांश सिंह, (सी.ई.ओ. आई.ई.एस. युनिर्वसिटी), डॉ. कविता पाटीदार (राज्यसभा सांसद), पुज्य शांडिल्य जी महाराज ( पीठाधीश्वर करूणाधाम आश्रम ) डॉ. सुनीता सिंह (पूर्व चांसलर आई.ई.एस. युनिर्वसिटी), इंजी. बी.एस. यादव (फाउडर एवं चांसलर आई.ई.एस. युनिर्वसिटी), सुमेर सिंह सोलंकी (राज्यसभा सांसद) आदि मंचासीन थे।

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