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एमपी में 21 साल बाद सरकारी बसें, 15 लाख कर्मचारियों को आयुष्मान का तोहफा, पेंशन

UB News Network
Last updated: दिसम्बर 31, 2025 9:37 पूर्वाह्न
By : UB News Network
Published on : 4 महीना पहले
एमपी में 21 साल बाद सरकारी बसें, 15 लाख कर्मचारियों को आयुष्मान का तोहफा, पेंशन
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भोपाल 

मध्य प्रदेश में नए साल की शुरुआत कई बड़े बदलाव और सुविधाओं के साथ होने जा रही है। 21 साल बाद सरकारी बस सेवा फिर से शुरू होगी, 15 लाख कर्मचारियों को आयुष्मान जैसी स्वास्थ्य योजना का लाभ मिलेगा और पेंशन नियमों में बदलाव होगा। इसके अलावा, सरकारी नौकरी में दो बच्चों की शर्त खत्म होने जा रही है।

अब सिलसिलेवार जानिए इन बदलाव के बारे में

1.मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना में कैश लैस इलाज

    क्या है मौजूदा सिस्टम: वर्तमान में, राज्य के कर्मचारियों और पेंशनर्स को इलाज का खर्च पहले खुद उठाना पड़ता है, जिसका भुगतान सरकार बाद में केंद्रीय स्वास्थ्य योजना (CGHS) की दरों के अनुसार करती है। इस प्रणाली में अक्सर इलाज का पूरा खर्च कवर नहीं होता। उदाहरण के लिए, लिवर ट्रांसप्लांट पर लगभग 20 लाख रुपए का खर्च आता है। सरकार केवल 4 लाख रुपए की प्रतिपूर्ति करती है, वह भी कर्मचारी द्वारा बिल जमा करने के बाद।

    प्रस्तावित योजना: ‘मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना’ के तहत प्रदेश के 15 लाख कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिवारों को कैश लेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इस मॉडल में कर्मचारियों के वेतन से 3,000 से 12,000 रुपए तक का वार्षिक अंशदान लिया जाएगा, जबकि शेष राशि सरकार वहन करेगी। अंशदान की अंतिम राशि अभी तय होनी है। इस योजना में सामान्य बीमारियों के लिए 5 लाख और गंभीर बीमारियों के लिए 10 लाख रुपए तक के कैश लेस इलाज का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, कर्मचारी इलाज के बाद अपने विभाग से चिकित्सा रिफंड के लिए भी आवेदन कर सकेगा।

2. इक्कीस साल बाद अप्रैल से चलेंगी सरकारी बसें मध्य प्रदेश की सड़कों पर 21 साल बाद एक बार फिर सरकारी बसें चलने वाली है। सरकार ने इसे ‘जनबस’ नाम दिया है। राज्य परिवहन निगम की जगह सरकार ने यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी बनाई है जो 25 जिलों में बसों का संचालन करेगी। 18 नवंबर को कंपनी के संचालक मंडल की बैठक में 6 हजार से ज्यादा रूट को मंजूरी दी गई है। इन रूट पर 10 हजार 879 बसें दौड़ेंगी।

इस सेंट्रलाइज्ड सिस्टम की शुरुआत अप्रैल 2026 से आर्थिक राजधानी इंदौर से की जाएगी। इसके बाद सिलसिलेवार तरीके से बाकी जिलों में भी बसें चलना शुरू होंगी। अप्रैल 2027 तक सभी संभाग और जिलों में यह नई व्यवस्था लागू होगी। ये व्यवस्था न केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित रहेगी, बल्कि इसका मुख्य फोकस ग्रामीण, दूर दराज के इलाके और आदिवासी एरिया को जिला मुख्यालयों और बड़े शहरों से जोड़ना है। सरकार पूरी व्यवस्था की मॉनिटरिंग करेगी और निजी ऑपरेशन बसों का संचालन करेंगे।

ई-बसों का संचालन भी कंपनियां करेंगी इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ई-बसों का संचालन है। केंद्र सरकार की नेशनल ई-बस स्कीम के तहत देश के 88 शहरों में साढ़े छह हजार से ज्यादा ई-बसें चलाई जानी हैं, जिनमें से 582 बसें मध्य प्रदेश को मिली हैं। इन बसों का संचालन भी इन्हीं क्षेत्रीय कंपनियों के अधीन होगा। इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में 472 मिडी ई-बस (26 सीटर) और 110 मिनी ई-बस (21 सीटर) चलाई जाएंगी।

ई-बसों का किराया मौजूदा सिटी बसों से काफी कम होगा, जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ घटेगा।

3.केंद्र के समान पेंशन नियम, बेटियों को मिलेगा फायदा मध्य प्रदेश सरकार पेंशन नियमों को केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक बना रही है। नए नियम के तहत, 25 साल से ज्यादा उम्र की अविवाहित, विधवा या परित्यक्ता बेटी भी परिवार पेंशन की पात्र होगी। वर्तमान में यह फायदा केवल 25 वर्ष तक की अविवाहित बेटी को ही मिलता है। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार द्वारा 2011 में लागू की गई व्यवस्था पर आधारित है।

कर्मचारी आयोग भी पहले इसकी अनुशंसा कर चुका है। सेवानिवृत्त आईएएस जीपी सिंघल की अध्यक्षता वाले आयोग की रिपोर्ट पर वित्त विभाग सैद्धांतिक सहमति दे चुका है और अब यह प्रस्ताव अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया में है।

4. 48 साल बाद बदल रहे कर्मचारियों के छुट्टी नियम मध्य प्रदेश के 6.5 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों के लिए 1 जनवरी 2026 से छुट्टियों का पूरा कैलेंडर बदलने जा रहा है। 48 साल पुराने मध्यप्रदेश अवकाश नियम 1977 की जगह अब मध्यप्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम 2025 लागू होंगे। नए नियम केंद्र सरकार की छुट्टियों के नियमों के लगभग समान हैं और इन्हें मौजूदा सामाजिक और प्रशासनिक जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है।

नए नियमों के मुताबिक अब बीमारी और मातृत्व अवकाश लेना ज्यादा सुविधाजनक होगा, वहीं इनके दुरुपयोग पर भी लगाम लगेगी। अधिकारी छुट्टी देने में मनमानी न कर सकें, इसके लिए रोस्टर बनाना अनिवार्य होगा। नए नियमों को ज्यादा जेंडर न्यूट्रल बनाया गया है, जिसमें सरोगेसी और सिंगल फादर जैसी नई परिस्थितियों के लिए भी प्रावधान जोड़े गए हैं।

साल की शुरुआत में ही खाते में आ जाएगी अर्निंग लीव

अभी तक अर्जित अवकाश (EL) साल भर की नौकरी पूरी होने के बाद कर्मचारी के खाते में दर्ज होता था। अब ऐसा नहीं होगा। 1 जनवरी को 15 दिन की EL खाते में क्रेडिट हो जाएगी। इसके बाद साल के मध्य में 1 जुलाई को फिर 15 दिन की EL जुड़ जाएगी। इसका फायदा नए कर्मचारियों को भी मिलेगा।

ई एल की तर्ज पर अब HPL भी साल में दो बार 1 जनवरी और 1 जुलाई को 10–10 दिन के हिसाब से कर्मचारी के खाते में अग्रिम जमा हो जाएगी। इससे कर्मचारियों को छुट्‌टी जमा होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। साल की शुरुआत में उन्हें अवकाश की सुविधा मिल जाएगी और यह भी पता चल जाएगा कि साल भर की कुल कितनी छुटि्टयां उन्हें मिलेंगी। साथ ही शिक्षकों और प्रोफेसरों को भी 10 दिन की EL मिलेगी।

5.सरकारी नौकरी में दो बच्चों की शर्त खत्म होगी सरकार लगभग 24 साल पुराने उस नियम को खत्म करने की तैयारी में है, जिसके तहत दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माने जाते हैं। इस संशोधन के बाद तीन संतान वाले उम्मीदवार भी नियुक्ति के पात्र होंगे। 26 जनवरी 2001 से लागू इस नियम में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट में पेश किया जाएगा। मध्य प्रदेश से पहले छत्तीसगढ़ और राजस्थान भी यह शर्त हटा चुके हैं।

शर्त समाप्त होने के बाद तीसरी संतान से जुड़े जितने भी केस न्यायालयों या विभागीय जांचों में लंबित हैं, उन्हें स्वतः समाप्त मान लिया जाएगा। इन पर अब कोई कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि, वर्ष 2001 के बाद जिन शासकीय सेवकों पर तीसरी संतान के आधार पर कार्रवाई हो चुकी है या वे नौकरी से बाहर किए जा चुके हैं, उन मामलों पर कोई सुनवाई नहीं होगी। इस फैसले मेडिकल एजुकेशन, हेल्थ, स्कूल शिक्षा, और उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों को राहत मिलेगी।

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